News India Live, Digital Desk : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के खिलाफ घोषित की गई हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) की सैन्य घेराबंदी को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हड़कंप मच गया है। ट्रंप ने उम्मीद जताई थी कि उनके पुराने सहयोगी देश इस मोर्चे पर अमेरिका का कंधे से कंधा मिलाकर साथ देंगे, लेकिन स्थिति इसके उलट नजर आ रही है। ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया जैसे भरोसेमंद सहयोगियों ने इस सैन्य अभियान में शामिल होने से स्पष्ट रूप से इनकार कर दिया है, जिससे ट्रंप की रणनीति को बड़ा झटका लगा है।
ब्रिटेन का सख्त रुख: युद्ध की आग में नहीं झोंकेंगे अपने पैर
ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने साफ कर दिया है कि उनका देश ईरान के साथ किसी भी युद्ध जैसी स्थिति में शामिल नहीं होगा। ब्रिटेन ने अमेरिकी राष्ट्रपति के उन दावों को भी खारिज कर दिया है जिसमें कहा गया था कि नाटो (NATO) देश और ब्रिटेन इस घेराबंदी में माइंसवीपर (सुरंग हटाने वाले जहाज) भेज रहे हैं। लंदन का मानना है कि हॉर्मुज को खुला रखना वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए जरूरी है, लेकिन वह ट्रंप की ‘ब्लॉकहेड’ यानी घेराबंदी की नीति का हिस्सा बनकर तनाव को और नहीं बढ़ाना चाहता।
ऑस्ट्रेलिया ने भी झाड़ा पल्ला, कूटनीति पर दिया जोर
ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज ने भी इस मामले में अमेरिका को झटका दिया है। अल्बनीज ने बयान जारी कर कहा है कि ऑस्ट्रेलिया को अमेरिका से इस तरह की किसी भी सैन्य घेराबंदी में शामिल होने का कोई आधिकारिक अनुरोध प्राप्त नहीं हुआ है। उन्होंने वाशिंगटन और तेहरान दोनों से शांति वार्ता बहाल करने की अपील की है। ऑस्ट्रेलिया का कहना है कि वे जलमार्ग की सुरक्षा के पक्ष में तो हैं, लेकिन सीधे तौर पर ईरान के साथ सैन्य टकराव के मूड में नहीं हैं।
क्या है ट्रंप का प्लान और क्यों मचा है बवाल?
पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में ईरान के साथ हुई वार्ता विफल होने के बाद, ट्रंप ने घोषणा की थी कि अमेरिकी नौसेना ईरान के बंदरगाहों पर आने और जाने वाले सभी जहाजों को रोकेगी। ट्रंप का मानना है कि इस घेराबंदी से ईरान पर दबाव बनेगा, लेकिन अंतरराष्ट्रीय जानकारों का कहना है कि यह कदम ‘समुद्री डकैती’ जैसा है। इससे न केवल कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आने का खतरा है, बल्कि एक व्यापक क्षेत्रीय युद्ध छिड़ने की भी आशंका पैदा हो गई है।
दुनिया भर में ऊर्जा संकट का खतरा
हॉर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्ग है। यदि यह घेराबंदी लंबे समय तक चलती है, तो भारत समेत दुनिया भर में ईंधन की कीमतों में आग लग सकती है। रूस और चीन ने भी अमेरिकी कदम की आलोचना की है। नाटो के अन्य देशों के भी पीछे हटने से अब ट्रंप प्रशासन इस मोर्चे पर अकेला पड़ता दिखाई दे रहा है।
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