News India Live, Digital Desk : पश्चिम एशिया में जारी भारी तनाव और समुद्री रास्तों पर मंडराते खतरों के बीच भारत के लिए एक राहत भरी खबर सामने आई है। भारत का सातवां एलपीजी टैंकर ‘ग्रीन सांवरी’ (Green Saanvari) सफलतापूर्वक हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को पार कर चुका है। वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए सबसे संवेदनशील माने जाने वाले इस रास्ते पर हूती विद्रोहियों और क्षेत्रीय संघर्षों के कारण जहाजों की आवाजाही बेहद जोखिम भरी बनी हुई है। भारत अपनी गैस आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए पल-पल की निगरानी कर रहा है।
हॉर्मुज में ‘ग्रीन सांवरी’ की सफल एंट्री: क्यों है यह महत्वपूर्ण?
हॉर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया का वह संकरा समुद्री रास्ता है जहां से वैश्विक तेल और गैस का एक बड़ा हिस्सा गुजरता है। मरीन ट्रैफिक (MarineTraffic) के आंकड़ों के अनुसार, ‘ग्रीन सांवरी’ का सुरक्षित निकलना भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। मौजूदा हालातों में जहां कई अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियों ने इस रास्ते से दूरी बना ली है, वहां भारतीय टैंकरों का लगातार आगे बढ़ना यह दर्शाता है कि भारत अपनी रणनीतिक योजना के तहत गैस की किल्लत नहीं होने देना चाहता।
खतरा अभी टला नहीं: 17 टैंकर अब भी कतार में
भले ही सात टैंकर सुरक्षित निकल गए हों, लेकिन चुनौतियां अभी खत्म नहीं हुई हैं। ताजा रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत के लिए गैस लेकर आ रहे करीब 17 और एलपीजी टैंकर अभी भी समुद्र में अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं या बेहद धीमी गति से आगे बढ़ रहे हैं। सुरक्षा कारणों से इन जहाजों की लोकेशन और रूट को लेकर बेहद सावधानी बरती जा रही है। अगर इन टैंकरों की आवाजाही में अधिक देरी होती है, तो आने वाले समय में घरेलू बाजार में एलपीजी की कीमतों और उपलब्धता पर इसका असर पड़ सकता है।
हूती विद्रोहियों का डर और समुद्री सुरक्षा का पहरा
लाल सागर और अदन की खाड़ी में जहाजों पर हो रहे हमलों ने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है। भारतीय नौसेना ने भी अपने युद्धपोतों को इन समुद्री रास्तों पर तैनात किया है ताकि भारतीय व्यापारिक जहाजों को सुरक्षा कवच प्रदान किया जा सके। ‘ग्रीन सांवरी’ जैसे बड़े टैंकरों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए उपग्रहों और रडार के जरिए लगातार निगरानी की जा रही है। भारत सरकार और पेट्रोलियम मंत्रालय वैश्विक ऊर्जा संकट की हर स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं ताकि आम जनता को रसोई गैस की कमी का सामना न करना पड़े।
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