अलीगढ़। उत्तर प्रदेश की अलीगढ़ पुलिस ने नकली नोटों के काले कारोबार के खिलाफ एक बड़ी कामयाबी हासिल की है। थाना गोरई पुलिस और क्रिमिनल इंटेलिजेंस विंग (देहात) की संयुक्त टीम ने बुधवार को एक अंतरराज्यीय गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए चार तस्करों को गिरफ्तार किया। इनके पास से 7 लाख 70 हजार रुपये की जाली भारतीय मुद्रा बरामद की गई है।
बांग्लादेश सीमा से जुड़े हैं तस्करी के तार
एसपी देहात मनीष कुमार मिश्र ने प्रेस वार्ता में बताया कि यह गिरोह बेहद शातिर तरीके से काम कर रहा था:
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सप्लाई रूट: ये लोग पश्चिम बंगाल के मालदा के रास्ते बांग्लादेश से नकली नोट भारत लाते थे।
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मुनाफे का गणित: तस्कर 3 लाख रुपये के असली नोटों के बदले 10 लाख रुपये के नकली नोट लाते थे। यानी उन्हें करीब 70 प्रतिशत का सीधा मुनाफा हो रहा था।
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ठिकाने: अलीगढ़ पुलिस की सख्ती के बाद आरोपियों ने यहां नोट खपाना बंद कर दिया था और अब दिल्ली की मंडियों, पेट्रोल पंपों और बाजारों में इन नोटों को चला रहे थे।
गिरफ्तार आरोपियों का प्रोफाइल
पुलिस ने गिरोह के सरगना समेत चार लोगों को दबोचा है:
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जिकरुल हसन (सरगना): निवासी कासगंज (वर्तमान पता- अलीगढ़)। जिकरुल पर अलीगढ़ और उत्तराखंड के पिथौरागढ़ में कई मुकदमे दर्ज हैं। वह पिछले साल दो बार जेल जा चुका है।
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वसीम: निवासी रघुवीर नगर, नई दिल्ली।
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आसिफ: निवासी कासगंज।
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फरमान: निवासी विष्णुपुरा, नई दिल्ली।
हूबहू असली जैसे दिखते हैं नोट
बरामद किए गए सभी नोट 500-500 रुपये के हैं। पुलिस के अनुसार, ये नोट ‘हाई क्वालिटी फेक करेंसी’ हैं:
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इन नोटों को आम दुकानदार आसानी से नहीं पहचान सकता।
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नोटों पर गवर्नर के हस्ताक्षर और अन्य सुरक्षा मानक असली नोटों के समान ही नजर आते हैं।
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जांच में पाया गया कि कई नोट एक ही सीरीज के थे, जिससे इनके जाली होने की पुष्टि हुई।
पुराना आपराधिक इतिहास
सरगना जिकरुल हसन एक पेशेवर अपराधी है। अक्टूबर 2025 में उसे अलीगढ़ के देहलीगेट क्षेत्र में एक जनसेवा केंद्र पर नकली नोट चलाते हुए पकड़ा गया था। इसके बाद 23 मार्च 2026 को भी वह जेल गया था, लेकिन बाहर आते ही उसने फिर से तस्करी शुरू कर दी।
पुलिस की अगली कार्रवाई: पुलिस अब उन मुख्य सप्लायरों की तलाश कर रही है जो मालदा और बांग्लादेश सीमा के पास इन आरोपियों को नोट उपलब्ध कराते थे। चारों आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर उन्हें जेल भेज दिया गया है
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