बिहार उपचुनाव में जीत के बाद तेजस्वी यादव का बड़ा हमला,बोले-बैलेट पेपर से चुनाव हो तो नहीं टिकेगी BJP

Tejashwi Yadav on EVM vs Ballot: बिहार विधान परिषद के उपचुनाव में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) की शानदार जीत ने सियासी हलकों में हलचल पैदा कर दी है। भोजपुर-बक्सर स्थानीय प्राधिकार सीट पर मिली इस सफलता से गदगद नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव का जोश हाई है। जीत के तुरंत बाद तेजस्वी ने एक बार फिर ईवीएम (EVM) पर सवाल उठाते हुए बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग छेड़ दी है। उन्होंने साफ लहजे में कहा कि अगर वोटिंग बैलेट पेपर से हो, तो भारतीय जनता पार्टी और एनडीए गठबंधन का सूपड़ा साफ होना तय है।

RJD ने JDU से छीनी सीट, सोनू राय बने विजेता भोजपुर-बक्सर स्थानीय प्राधिकार एमएलसी सीट पर हुए उपचुनाव के नतीजे गुरुवार को घोषित किए गए, जिसमें आरजेडी के सोनू राय ने जनता दल यूनाइटेड (JDU) के प्रत्याशी कन्हैया प्रसाद को 350 से अधिक मतों के अंतर से शिकस्त दी। बता दें कि यह सीट पहले जेडीयू के राधाचरण साह के पास थी। उनके विधायक बनने के बाद यह खाली हुई थी, जिसे अब आरजेडी ने अपने नाम कर लिया है।

बैलेट पेपर पर तेजस्वी का बड़ा दावा उपचुनाव में मिली जीत पर कार्यकर्ताओं को बधाई देते हुए तेजस्वी यादव ने कहा, “भोजपुर-बक्सर में एनडीए को करारी हार का सामना करना पड़ा है। यह चुनाव बैलेट पेपर के जरिए हुआ और नतीजे सबके सामने हैं। मेरा दावा है कि अगर देश में सभी चुनाव बैलेट पेपर से कराए जाएं, तो भाजपा और एनडीए कहीं टिकने वाले नहीं हैं।” तेजस्वी ने आरोप लगाया कि जब भी ईवीएम से वोटिंग होती है, तो सत्ता में बैठे लोग छल-कपट का सहारा लेते हैं।

ईवीएम की मतगणना पर भी उठाए सवाल तेजस्वी यादव ने ईवीएम और बैलेट पेपर की तुलना करते हुए कहा कि मशीन से वोटिंग का कोई विशेष लाभ नहीं दिख रहा है। उन्होंने कहा, “आज भी मशीन से गिनती होने पर पूरा दिन बीत जाता है और नतीजे रात के एक-दो बजे तक आते हैं। जब समय उतना ही लग रहा है, तो बैलेट पेपर पर लौटने में क्या हर्ज है? कम से कम इसमें जनता के भरोसे के साथ खिलवाड़ तो नहीं होगा।”

2020 विधानसभा चुनाव का किया जिक्र आरजेडी के कार्यकारी अध्यक्ष ने पिछले विधानसभा चुनाव की याद दिलाते हुए कहा कि अगर उस समय भी बैलेट पेपर का इस्तेमाल होता, तो महागठबंधन को 150 से ज्यादा सीटें मिलतीं। उन्होंने सीधे तौर पर आरोप लगाया कि तकनीकी हेरफेर की वजह से उन्हें सत्ता से दूर रखा गया। उन्होंने जोर देकर कहा कि स्थानीय निकाय चुनावों के नतीजे साबित करते हैं कि जमीनी स्तर पर जनता का झुकाव आरजेडी की तरफ है।

पिता नहीं दिला सके बेटे को जीत इस चुनाव में जेडीयू ने पूर्व एमएलसी राधाचरण साह के बेटे कन्हैया प्रसाद को मैदान में उतारा था। पिता के रसूख के बावजूद कन्हैया अपनी सीट बचाने में नाकाम रहे। आरजेडी की इस जीत को बिहार की भावी राजनीति के संकेत के रूप में देखा जा रहा है, जहां विपक्षी खेमा अब और भी अधिक हमलावर नजर आ रहा है।