पाकिस्तान में वार्ता विफल होते ही एक्शन में ट्रंप हॉर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिकी हलचल तेज, क्या है महाशक्ति का प्लान?

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News India Live, Digital Desk: पश्चिम एशिया और दक्षिण एशिया के संगम पर इस वक्त तनाव अपने चरम पर है। पाकिस्तान में जारी महत्वपूर्ण कूटनीतिक बातचीत के बेनतीजा खत्म होने के तुरंत बाद अमेरिका ने एक बड़ा सैन्य कदम उठाया है। दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री रास्ते, हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में अमेरिकी नौसेना की गतिविधियों में अचानक जबरदस्त इजाफा देखा जा रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के इस कदम ने वैश्विक राजनीति में हलचल पैदा कर दी है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप प्रशासन अब किसी बड़े और निर्णायक एक्शन की तैयारी में है, जो सीधे तौर पर वैश्विक तेल आपूर्ति और क्षेत्रीय सुरक्षा को प्रभावित कर सकता है।

पाकिस्तान में कूटनीति फेल, बढ़ी युद्ध की आशंका

सूत्रों के अनुसार, पाकिस्तान में चल रही उच्च स्तरीय वार्ता का मुख्य उद्देश्य क्षेत्रीय तनाव को कम करना और मध्यस्थता के रास्ते तलाशना था। हालांकि, वार्ता की मेज पर किसी भी ठोस सहमति पर न पहुंच पाना अमेरिका के लिए खतरे की घंटी साबित हुआ। इसके तुरंत बाद ट्रंप प्रशासन ने अपनी रणनीति बदलते हुए कूटनीति के बजाय सैन्य दबाव बढ़ाने का फैसला लिया है। हॉर्मुज जलडमरूमध्य, जहां से दुनिया का एक बड़ा हिस्सा कच्चे तेल का आयात करता है, वहां अमेरिकी जंगी जहाजों की मौजूदगी सीधे तौर पर ईरान और उसके सहयोगियों को एक कड़ा संदेश माना जा रहा है।

क्या हॉर्मुज की घेराबंदी करेंगे ट्रंप?

हॉर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिकी नौसेना की ‘फॉरवर्ड मूवमेंट’ के पीछे ट्रंप की सोची-समझी प्लानिंग नजर आ रही है। व्हाइट हाउस के सूत्रों का संकेत है कि अमेरिका अब इस महत्वपूर्ण जलमार्ग पर अपनी पकड़ ढीली नहीं होने देना चाहता। ट्रंप का मानना है कि यदि वार्ता से समाधान नहीं निकलता, तो अमेरिकी हितों की रक्षा के लिए शक्ति का प्रदर्शन अनिवार्य है। हॉर्मुज में सैन्य तैनाती बढ़ने का मतलब है कि अमेरिका अब समुद्र में किसी भी तरह की बाधा या ईरान के आक्रामक रुख को बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है।

दुनिया भर में तेल की कीमतों पर संकट के बादल

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते इस तनाव का सीधा असर वैश्विक बाजार पर पड़ना तय है। यदि हॉर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव युद्ध की स्थिति में बदलता है, तो कच्चे तेल की कीमतों में रिकॉर्ड तोड़ बढ़ोत्तरी हो सकती है। भारत जैसे देशों के लिए यह स्थिति बेहद चिंताजनक है, क्योंकि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से पूरा करता है। फिलहाल, पूरी दुनिया इस बात का इंतजार कर रही है कि ट्रंप का अगला कदम क्या होगा और क्या पश्चिम एशिया एक और बड़े युद्ध की ओर बढ़ रहा है।

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