ट्रंप की 8 बजे वाली धमकी से दहला ईरान, लोगों से पावर प्लांट्स को घेरने की अपील, क्या शुरू होने वाला है महायुद्ध?

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News India Live, Digital Desk: पश्चिम एशिया में युद्ध की ज्वाला अब भयावह मोड़ लेती दिख रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की कथित ‘रात 8 बजे’ वाली चेतावनी ने ईरान के भीतर हड़कंप मचा दिया है। ट्रंप के सख्त रुख और संभावित हवाई हमलों की आहट के बीच ईरान की सरकार ने अपने नागरिकों से एक भावुक और रणनीतिक अपील की है। तेहरान ने लोगों से आग्रह किया है कि वे देश के महत्वपूर्ण बिजली घरों (Power Plants) और ऊर्जा ठिकानों के चारों ओर ‘मानवीय ढाल’ (Human Shield) बनकर खड़े हो जाएं। इस घटनाक्रम ने संकेत दे दिए हैं कि दुनिया एक बड़े सैन्य टकराव की दहलीज पर खड़ी है।

आखिर क्या है ट्रंप की ‘8 PM’ वाली धमकी?

व्हाइट हाउस की ओर से आए कड़े बयानों के बाद सोशल मीडिया और अंतरराष्ट्रीय गलियारों में ट्रंप की उस चेतावनी की चर्चा तेज है, जिसमें उन्होंने ईरान को गंभीर अंजाम भुगतने की बात कही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका ने ईरान के परमाणु ठिकानों और बुनियादी ढांचों को निशाना बनाने का पूरा खाका तैयार कर लिया है। ट्रंप के ‘8 बजे’ वाले अल्टीमेटम को ईरान पर संभावित हमले के समय से जोड़कर देखा जा रहा है, जिसने तेहरान के हुक्मरानों की रातों की नींद उड़ा दी है।

बिजली घरों की सुरक्षा के लिए ‘जनता’ का सहारा

ईरान सरकार की ओर से जारी अपील में नागरिकों से एकजुट होने और देश की संपत्ति की रक्षा करने को कहा गया है। ईरानी प्रशासन का मानना है कि यदि लोग बड़ी संख्या में पावर प्लांट्स और सरकारी ठिकानों के पास मौजूद रहेंगे, तो अमेरिका के लिए बमबारी करना अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मुश्किल होगा। सोशल मीडिया पर भी ऐसे कई संदेश प्रसारित किए जा रहे हैं जिनमें आम लोगों को अपने घरों से निकलकर रणनीतिक ठिकानों पर जमा होने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।

क्या ब्लैकआउट कर अमेरिका तोड़ेगा ईरान की कमर?

युद्ध विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका की पहली रणनीति ईरान की ऊर्जा व्यवस्था को पंगु बनाने की है। यदि ईरान के पावर प्लांट्स पर हमला होता है, तो पूरा देश अंधेरे में डूब सकता है, जिससे न केवल संचार व्यवस्था ठप होगी बल्कि सैन्य अभियान भी प्रभावित होंगे। इसी खतरे को भांपते हुए ईरान अब अपने नागरिकों को ढाल के तौर पर इस्तेमाल करने की कोशिश कर रहा है। तेहरान की सड़कों पर बढ़ती हलचल इस बात का गवाह है कि स्थिति कभी भी हाथ से निकल सकती है।

दुनिया पर मंडरा रहा है मंदी और महंगाई का साया

ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते इस तनाव का असर केवल मिडिल ईस्ट तक सीमित नहीं रहेगा। अगर ट्रंप अपनी धमकी को हकीकत में बदलते हैं, तो वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू सकती हैं। भारत जैसे देशों के लिए यह स्थिति चिंताजनक है क्योंकि खाड़ी देशों से तेल की सप्लाई बाधित होने का सीधा असर पेट्रोल-डीजल के दामों पर पड़ेगा। फिलहाल, पूरी दुनिया सांसें थामकर वाशिंगटन और तेहरान के अगले कदम का इंतजार कर रही है।

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