News India Live, Digital Desk: रूस-यूक्रेन युद्ध और पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) में जारी भारी तनाव के बीच दक्षिण एशिया से एक राहत भरी और सकारात्मक खबर सामने आई है। रूस में पाकिस्तान के राजदूत फैसल नियाज तिर्मिज़ी ने भारत और पाकिस्तान के बीच परमाणु सुरक्षा को लेकर बने ऐतिहासिक तालमेल की जमकर तारीफ की है। एक अंतरराष्ट्रीय न्यूज़ पोर्टल को दिए साक्षात्कार में तिर्मिज़ी ने कहा कि भारत और पाकिस्तान का परमाणु सुरक्षा रिकॉर्ड बेहद शानदार रहा है और दोनों देशों के बीच एक-दूसरे के परमाणु ठिकानों पर हमला न करने की जो ‘गारंटी’ है, वह आज पूरी दुनिया के लिए एक मिसाल है।
“मिडल ईस्ट के युद्ध से सबक ले दुनिया”
राजदूत तिर्मिज़ी ने यह बयान ऐसे समय में दिया है जब पश्चिम एशिया में इजरायल और ईरान के बीच संघर्ष चरम पर है। उन्होंने ईरान के बुशहर परमाणु ऊर्जा संयंत्र पर हुए हालिया हमलों (इजरायल द्वारा कथित हमले) का जिक्र करते हुए कहा कि अगर परमाणु संयंत्रों को निशाना बनाया गया तो इसके परिणाम केवल उस देश के लिए नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए विनाशकारी होंगे। उन्होंने कहा, “भारत और पाकिस्तान का इतिहास गवाह है कि हमने कठिन से कठिन समय में भी अपने परमाणु प्रतिष्ठानों की पवित्रता बनाए रखी है। इजरायल को इससे सबक लेना चाहिए कि परमाणु केंद्र कभी भी हमले का निशाना नहीं होने चाहिए।”
ऐतिहासिक समझौता: जब तनाव के बीच भी बनी रही मर्यादा
गौरतलब है कि भारत और पाकिस्तान के बीच 1988 में एक द्विपक्षीय समझौता हुआ था, जिसके तहत दोनों देश हर साल 1 जनवरी को अपने-अपने परमाणु ठिकानों की सूची एक-दूसरे के साथ साझा करते हैं। इस समझौते का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि युद्ध जैसी स्थिति में भी कोई भी पक्ष दूसरे के परमाणु केंद्रों पर हमला नहीं करेगा। तिर्मिज़ी ने इसी समझौते को ‘म्यूचुअल गारंटी’ (पारस्परिक गारंटी) बताते हुए कहा कि यही वह भरोसा है जिसने दक्षिण एशिया को परमाणु आपदा से बचाकर रखा है।
क्या रूस बनेगा भारत-पाक के बीच ‘ईमानदार ब्रोकर’?
साक्षात्कार के दौरान पाकिस्तानी राजदूत ने भारत और पाकिस्तान के रिश्तों में जमी बर्फ को पिघलाने के लिए रूस की भूमिका पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि रूस के भारत के साथ बहुत करीबी और पुराने रिश्ते हैं, साथ ही पाकिस्तान भी अब रूस के साथ सहयोग बढ़ा रहा है और ब्रिक्स (BRICS) में शामिल होने का इच्छुक है। तिर्मिज़ी ने उम्मीद जताई कि रूस दोनों देशों के बीच एक ‘ईमानदार ब्रोकर’ (Fair Broker) की भूमिका निभा सकता है ताकि आपसी संबंधों में सुधार हो सके और क्षेत्रीय सुरक्षा और अधिक मजबूत हो।
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