संभल में 40 साल पुराने अवैध कब्जे पर चला योगी सरकार का बुलडोजर, वाग्भारती तीर्थ मुक्त

उत्तर प्रदेश के संभल जिले में एक बार फिर प्रशासन का पीला पंजा (बुलडोजर) पूरी ताकत से गरजा है। इस बार प्रशासन ने भू-माफियाओं और अवैध कब्जाधारियों के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई करते हुए करीब 40 साल पुराने अवैध साम्राज्य को जमींदोज कर दिया है। संभल में श्मशान, कब्रिस्तान, सरकारी तालाब और चकरोड की कीमती भूमि पर किए गए अवैध निर्माणों को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया गया है। इस ऐतिहासिक कार्रवाई के जरिए स्कंद पुराण में विशेष रूप से वर्णित और पूजनीय ‘वाग्भारती तीर्थ’ को भू-माफियाओं के चंगुल से पूरी तरह मुक्त करा लिया गया है। दूसरी तरफ, प्रदेश के बाहुबलियों को मिले शस्त्र लाइसेंसों के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अख्तियार करते हुए सरकार को अंतिम चेतावनी जारी की है।

40 साल पुराना अवैध कब्जा जमींदोज, स्कंद पुराण का पौराणिक तीर्थ हुआ मुक्त

संभल जिला प्रशासन लंबे समय से सरकारी जमीनों पर अवैध रूप से कुंडली मारकर बैठे रसूखदारों की लिस्ट तैयार कर रहा था। इसी क्रम में राजस्व और पुलिस विभाग की संयुक्त टीम ने भारी सुरक्षा बल और बुलडोजरों के साथ मौके पर पहुंचकर ध्वस्तीकरण की बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया। अधिकारियों के मुताबिक, इस जमीन पर पिछले 4 दशक (40 साल) से अवैध निर्माण कर कब्जा किया गया था, जिसमें सरकारी चकरोड, श्मशान घाट, कब्रिस्तान और जल संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण तालाब की भूमि शामिल थी।

इस कार्रवाई की सबसे खास बात यह रही कि अतिक्रमण हटने से सदियों पुराने ‘वाग्भारती तीर्थ’ के पुनरुद्धार का रास्ता साफ हो गया है। सनातन धर्म के पवित्र ग्रंथ स्कंद पुराण में इस तीर्थ स्थल का विशेष उल्लेख मिलता है। पौराणिक और ऐतिहासिक महत्व के इस स्थान के मुक्त होने पर स्थानीय नागरिकों और श्रद्धालुओं में भारी उत्साह है। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि मुक्त कराई गई सरकारी जमीन पर दोबारा कब्जा करने की कोशिश करने वालों पर सीधे गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई की जाएगी।

बाहुबलियों के शस्त्र लाइसेंस पर हाईकोर्ट का चाबुक: सरकार को सिर्फ 3 दिन की मोहलत

उत्तर प्रदेश के रसूखदार बाहुबलियों और माफियाओं को बांटे गए सरकारी शस्त्र लाइसेंस (Arms Licenses) के गंभीर मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बेहद तल्ख टिप्पणी की है। दरअसल, कोर्ट ने सरकार से प्रदेश के चिन्हित 83 बड़े बाहुबलियों को जारी किए गए हथियारों के लाइसेंस की पूरी कुंडली और स्टेटस रिपोर्ट मांगी थी। लेकिन सरकार की तरफ से कोर्ट में जो आधी-अधूरी जानकारी पेश की गई, उस पर माननीय न्यायाधीश भड़क गए।

सरकारी वकीलों द्वारा कोर्ट में कुल 83 बाहुबलियों में से केवल आधे, यानी 42 की ही जानकारी जमा की जा सकी। इस लापरवाही और ढुलमुल रवैये पर सख्त रुख अपनाते हुए हाईकोर्ट ने कड़ी नाराजगी व्यक्त की है। अदालत ने बचे हुए 41 रसूखदार बाहुबलियों के शस्त्र लाइसेंस की पूरी रिपोर्ट दाखिल करने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार और संबंधित गृह विभाग के अधिकारियों को केवल तीन दिन का ‘आखिरी मौका’ (लास्ट अल्टीमेटम) दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यदि तय समय सीमा के भीतर सभी बाहुबलियों के लाइसेंस का ब्यौरा नहीं मिला, तो जिम्मेदार उच्च अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से अदालत में तलब होना पड़ेगा।