
पूरी दुनिया में ग्लोबल वार्मिंग और क्लाइमेट चेंज का ऐसा खौफनाक असर देखने को मिल रहा है जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी। जिन यूरोपीय देशों को हमेशा अपनी कड़ाके की ठंड और सुहावने मौसम के लिए जाना जाता था, आज वहां आसमान से आग बरस रही है। पश्चिमी यूरोप इस समय बेमौसम भीषण गर्मी और जानलेवा ‘हीट डोम’ की चपेट में है। हालात इस कदर बेकाबू हो चुके हैं कि ब्रिटेन में महज 24 घंटे के भीतर दो बार सदी पुराना तापमान का रिकॉर्ड टूट गया है। सरकारों को आपातकालीन चेतावनी जारी करनी पड़ी है। इस जानलेवा हीटवेव से राहत पाने के लिए नदियों और तालाबों का रुख कर रहे लोगों के लिए पानी काल बन गया है, जहां ब्रिटेन और फ्रांस में डूबने से कई लोगों की दर्दनाक मौत हो चुकी है।
ब्रिटेन और फ्रांस में पारा 35 पार, लंदन में दर्ज की गई दुर्लभ ‘ट्रॉपिकल नाइट’
ब्रिटेन के मौसम विभाग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, लंदन के मशहूर क्यू गार्डन्स में तापमान रिकॉर्ड 35.1 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। चौंकाने वाली बात यह है कि इससे ठीक एक दिन पहले ही यहां 34.8 डिग्री सेल्सियस का रिकॉर्ड बना था, जो अगले ही दिन टूट गया। इन नए आंकड़ों ने साल 1922 में बने और 1944 में दोहराए गए 32.8 डिग्री सेल्सियस के करीब सदी पुराने रिकॉर्ड को इतिहास के पन्नों में दफन कर दिया है। सिर्फ दिन ही नहीं, बल्कि लंदन की रातें भी अब उबल रही हैं। यहां एक दुर्लभ “ट्रॉपिकल नाइट” (उष्णकटिबंधीय रात) दर्ज की गई है, जिसका मतलब है कि रात के वक्त भी तापमान 20 डिग्री सेल्सियस से नीचे नहीं उतरा। उधर फ्रांस के दक्षिण-पश्चिमी इलाकों में भी पारा 36 डिग्री सेल्सियस को पार कर गया है। फ्रांस के राष्ट्रीय मौसम विभाग ‘मेटियो-फ्रांस’ के मुताबिक, एक बेहद मजबूत हाई-प्रेशर सिस्टम की वजह से आसमान में ‘हीट डोम’ बन गया है, जिसने गर्म हवाओं को एक जगह कैद कर दिया है और तापमान सामान्य से 10 डिग्री सेल्सियस ऊपर चला गया है।
बिना AC वाले देशों में मचा हाहाकार, क्लाइमेट चेंज ने पैदा किया महासंकट
विशेषज्ञों का मानना है कि धरती के लगातार बढ़ते तापमान के कारण मौसम का मिजाज पूरी तरह से अप्रत्याशित और हिंसक हो चुका है। ठंडे देशों में इस तरह की बेमौसम आपदाएं इंसानी वजूद के लिए बड़ा खतरा हैं। आयरलैंड की मेनुथ यूनिवर्सिटी में स्थित ICARUS क्लाइमेट रिसर्च सेंटर के निदेशक पीटर थॉर्न ने इस पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि इसमें अब कोई संदेह नहीं रह गया है कि ग्रीनहाउस गैसों के बेलगाम उत्सर्जन और जलवायु परिवर्तन के कारण ही ऐसी विनाशकारी हीटवेव आ रही हैं। उन्होंने साफ कहा कि ब्रिटेन और फ्रांस जैसे देशों में जिस रफ्तार से रिकॉर्ड टूट रहे हैं, वह बेहद डरावना और वैज्ञानिकों को हैरान करने वाला है।
मेट्रो में पसीने से तर-बतर हुए यात्री, रेलवे पटरियों से उठा धुआं और पहाड़ों में लगी आग
भीषण गर्मी के इस दौर में ब्रिटेन का पूरा इंफ्रास्ट्रक्चर चरमरा गया है। चूंकि ब्रिटेन एक ठंडा देश है, इसलिए यहां के ज्यादातर घरों, स्कूलों, दफ्तरों और सार्वजनिक परिवहन में एयर कंडीशनिंग (AC) की व्यवस्था नहीं होती। मंगलवार को लंदन के सबवे (भूमिगत मेट्रो) में सफर करने वाले लाखों यात्री बिना एसी के पसीने से पूरी तरह तर-बतर नजर आए। गर्मी का असर यातायात पर भी पड़ा, जब रेलवे पटरियों पर अत्यधिक तापमान के कारण धुआं उठने की खबर आई और व्यस्त वाटरलू स्टेशन से आने-जाने वाली ट्रेनों के पहिए थम गए। स्थिति कितनी गंभीर है इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि स्कॉटलैंड के एडिनबर्ग में ‘आर्थर्स सीट’ नाम की पहाड़ी पर सूखी घास में अचानक भीषण आग लग गई, जिसे बुझाने के लिए दमकलकर्मियों को पूरी रात युद्धस्तर पर काम करना पड़ा।
बुजुर्गों के लिए बड़ा खतरा, यूके हेल्थ सिक्योरिटी एजेंसी ने जारी किया ‘एम्बर अलर्ट’
इस जानलेवा मौसम को देखते हुए यूके हेल्थ सिक्योरिटी एजेंसी ने देश के एक बहुत बड़े हिस्से के लिए गुरुवार तक का ‘एम्बर हेल्थ अलर्ट’ (Amber Health Alert) जारी कर दिया है। सरकार की तरफ से लोगों को दिन के सबसे गर्म समय में घरों के अंदर रहने की सलाह दी गई है। विशेष रूप से बुजुर्गों, बच्चों और पहले से बीमार लोगों के लिए यह मौसम अत्यधिक जोखिम भरा साबित हो रहा है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे बिना सुरक्षा इंतजामों के गर्मी से राहत पाने के लिए गहरे पानी के स्रोतों में न उतरें, ताकि डूबने की घटनाओं पर लगाम लगाई जा सके।
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