
समाज में जजों को न्याय का देवता और अदालत को न्याय का पवित्र मंदिर माना जाता है, लेकिन जब इसी मंदिर का रखवाला ही मर्यादाओं की सारी सीमाएं लांघ जाए, तो कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े होने लगते हैं। एक ऐसा ही सनसनीखेज और शर्मनाक स्कैंडल अमेरिका की एक फेडरल कोर्ट से सामने आया है, जिसने पूरी दुनिया को हैरान कर दिया है। यहां के एक नामी फेडरल डिस्ट्रिक्ट जज को अपनी आधिकारिक ड्यूटी के दौरान अपने ही सरकारी चैंबर के अंदर एक सीनियर महिला पुलिस अधिकारी के साथ शारीरिक संबंध बनाते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया है। मर्यादा को तार-तार करने वाला यह घिनौना खेल पिछले दो साल से कोर्ट के भीतर चल रहा था, जिसका पर्दाफाश अदालत के ही एक स्टाफ और लॉ क्लर्क की बहादुरी की वजह से हुआ है।
चैंबर को ही बना डाला था अय्याशी का अड्डा, 2 साल से चल रहा था सीक्रेट अफेयर
सीएनबीसी (CNBC) की एक खोजी रिपोर्ट के मुताबिक, यह पूरा मामला अमेरिकी संघीय अदालत का है। आरोपी डिस्ट्रिक्ट जज अपनी शादीशुदा जिंदगी के बाहर एक सीनियर महिला पुलिस अधिकारी के साथ पिछले दो वर्षों से एक्स्ट्रा-मैरिटल अफेयर (अवैध संबंध) में थे। हद तो तब हो गई जब जज साहब ने अपनी इस आशिकी को परवान चढ़ाने के लिए किसी सुरक्षित जगह के बजाय अदालत के भीतर मौजूद अपने सरकारी चैंबर को ही चुन लिया। वह अक्सर अदालती कार्यवाही और ड्यूटी के घंटों के बीच अपनी प्रेमिका को चैंबर में बुलाते थे और दरवाजा बंद कर आपत्तिजनक गतिविधियों में लिप्त हो जाते थे। न्याय की कुर्सी पर बैठकर किया जाने वाला यह कृत्य अदालत की गरिमा पर एक बड़ा धब्बा बन चुका था।
जब लॉ क्लर्क ने हिम्मत जुटाकर खोली पोल, कर्मचारियों के लिए काम करना हुआ था दूभर
इस बेहद गंभीर और अनैतिक स्कैंडल का खुलासा तब हुआ जब कोर्ट के ही एक लॉ क्लर्क ने अपनी आंखों के सामने कानून का मजाक उड़ते देख हिम्मत जुटाई। क्लर्क ने सीधे चीफ जज के पास जाकर इस पूरे मामले की एक लिखित और औपचारिक शिकायत दर्ज करा दी। इस शिकायत के बाद हड़कंप मच गया और मामले की गंभीरता को देखते हुए तुरंत 7 सीनियर जजों की एक हाई-लेवल जांच कमेटी का गठन किया गया। जांच कमेटी ने जब अदालत के कर्मचारियों और स्टाफ से पूछताछ की, तो चौंकाने वाले खुलासे हुए। कर्मचारियों ने बताया कि जब जज साहब और महिला पुलिस अधिकारी चैंबर के अंदर संबंध बना रहे होते थे, तब बाहर काम कर रहे स्टाफ को सब कुछ साफ-साफ सुनाई देता था। इस वजह से कोर्ट परिसर का माहौल बेहद गंदा हो चुका था और वहां मौजूद महिला और पुरुष कर्मचारियों के लिए काम करना असहज और मानसिक प्रताड़ना जैसा बन गया था।
शुरुआत में आरोपों को बताया बकवास, सबूत मिलते ही जज साहब ने टेके घुटने
जब जांच कमेटी ने शुरुआत में आरोपी जज को बुलाकर इन आरोपों पर उनका पक्ष जानना चाहा, तो उन्होंने बेहद तीखे तेवर दिखाए। जज साहब ने अपनी ऊंची साख का हवाला देते हुए इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया और इसे अपने खिलाफ एक बकवास साजिश करार दिया। हालांकि, जांच पैनल ने बिना किसी दबाव के अपनी तफ्तीश जारी रखी और डिजिटल साक्ष्यों व चश्मदीदों के बयानों के आधार पर पुख्ता और अकाट्य सबूत जुटा लिए। जब सारे सबूत जज के सामने रखे गए, तो उनके पास भागने का कोई रास्ता नहीं बचा और उन्होंने रोते हुए अपना गुनाह कबूल कर लिया।
हमेशा के लिए लगा प्रतिबंध और 6 क्लर्कों से लिखित में मांगनी होगी माफी
जांच पैनल ने अपनी अंतिम रिपोर्ट में जज को पद के दुरुपयोग और गंभीर दुराचार का दोषी पाया है। इसके बाद उन पर कई कड़े और ऐतिहासिक प्रतिबंध लगा दिए गए हैं। आरोपी जज के भविष्य में कभी भी फेडरल कोर्ट का चीफ जज बनने या किसी भी प्रकार की न्यायिक समितियों में शामिल होने पर हमेशा के लिए पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है। इसके अलावा, कोर्ट ने माना कि जज की इस गंदी हरकत के कारण उनके अधीन काम करने वाले लॉ क्लर्कों को भारी मानसिक और पेशेवर परेशानी का सामना करना पड़ा। इसलिए कमेटी ने आदेश दिया है कि जज साहब इस दूषित माहौल से प्रभावित हुए अपने सभी 6 क्लर्कों को व्यक्तिगत रूप से अपने हाथ से एक औपचारिक माफीनामा (Apology Letter) लिखकर भेजेंगे।
अंतरराष्ट्रीय मंच पर चीन और पाकिस्तान के पैंतरे नाकाम, जम्मू-कश्मीर पर भारत का दोटूक स्टैंड
इसी बीच अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के गलियारों से भी एक बड़ी खबर आ रही है, जहां भारत ने एक बार फिर चीन और पाकिस्तान के नापाक पैंतरों को पूरी तरह नाकाम कर दिया है। भारतीय खुफिया सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, चीन वैश्विक मंचों पर पुराने और अप्रासंगिक हो चुके संयुक्त राष्ट्र (UN) के प्रस्तावों का हवाला देकर साल 2019 में जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 के हटने के बाद की जमीनी हकीकत को जानबूझकर नजरअंदाज करने की कोशिश कर रहा है। इस पर भारत के एक बेहद वरिष्ठ रणनीतिक सूत्र ने कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट कर दिया है कि जम्मू-कश्मीर हमेशा से भारत का अटूट और अभिन्न हिस्सा रहा है और हमेशा रहेगा। साल 2019 में किए गए ऐतिहासिक संवैधानिक बदलावों के बाद अब इस मुद्दे पर किसी भी बाहरी देश, समूह या संगठन के साथ किसी भी तरह की चर्चा या मध्यस्थता की कोई गुंजाइश बाकी नहीं रह गई है।
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