World Hemophilia Day 2026 : चोट लगने पर रुकता नहीं है खून? तो हो सकती है यह लाइलाज बीमारी, जानें लक्षण और बचाव

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News India Live, Digital Desk: आज यानी 17 अप्रैल 2026 को पूरी दुनिया ‘विश्व हीमोफीलिया दिवस’ मना रही है। इस दिन को मनाने का मुख्य उद्देश्य लोगों को हीमोफीलिया जैसी दुर्लभ और गंभीर जेनेटिक बीमारी के प्रति जागरूक करना है। हीमोफीलिया एक ऐसा विकार है जिसमें शरीर में रक्त के थक्के (Blood Clotting) बनने की प्रक्रिया धीमी हो जाती है। सरल शब्दों में कहें तो, इस बीमारी से पीड़ित व्यक्ति को अगर छोटी सी भी चोट लग जाए, तो उसका खून बहना बंद नहीं होता, जो कई बार जानलेवा भी साबित हो सकता है।

हीमोफीलिया के पीछे का कारण: क्यों नहीं रुकता खून?

हीमोफीलिया एक आनुवंशिक (Genetic) बीमारी है, जो आमतौर पर माता-पिता से बच्चों में जाती है। हमारे रक्त में ‘क्लॉटिंग फैक्टर’ नामक प्रोटीन होते हैं जो खून को जमाने का काम करते हैं। हीमोफीलिया के मरीजों में इन कारकों (विशेषकर फैक्टर VIII या IX) की कमी होती है।

चौंकाने वाला तथ्य: यह बीमारी पुरुषों में अधिक पाई जाती है, जबकि महिलाएं आमतौर पर इसकी ‘कैरियर’ (वाहक) होती हैं।

इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज

हीमोफीलिया की पहचान समय रहते करना बेहद जरूरी है। इसके मुख्य लक्षण इस प्रकार हैं:

चोट लगने या सर्जरी के बाद बहुत अधिक और लंबे समय तक खून बहना।

बिना किसी स्पष्ट कारण के नाक से खून आना (नकसीर)।

शरीर पर नीले निशान (Bruises) पड़ जाना।

जोड़ों (घुटनों, कोहनियों) में सूजन और तेज दर्द होना।

पेशाब या मल में खून आना।

क्या हीमोफीलिया का स्थायी इलाज संभव है?

फिलहाल हीमोफीलिया का कोई स्थायी इलाज (Cure) उपलब्ध नहीं है, लेकिन सही प्रबंधन और थेरेपी से मरीज एक सामान्य जीवन जी सकता है।

रिप्लेसमेंट थेरेपी: इसमें मरीज के शरीर में कमी वाले क्लॉटिंग फैक्टर को इंजेक्शन के जरिए डाला जाता है।

जीन थेरेपी: चिकित्सा विज्ञान में प्रगति के साथ जीन थेरेपी को लेकर नए शोध हो रहे हैं, जो भविष्य में इसे जड़ से खत्म करने की उम्मीद जगाते हैं।

सावधानी: मरीजों को ऐसी गतिविधियों या खेलों से बचना चाहिए जिनमें चोट लगने का खतरा अधिक हो। साथ ही, एस्पिरिन जैसी दवाओं के सेवन से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लेनी चाहिए।

विश्व हीमोफीलिया दिवस 2026 की थीम

इस वर्ष की थीम “Equitable Access for All: Recognizing all Bleeding Disorders” रखी गई है। इसका अर्थ है कि दुनिया के हर कोने में हीमोफीलिया के मरीजों को इलाज और क्लॉटिंग फैक्टर की उपलब्धता समान रूप से सुनिश्चित की जा सके। भारत जैसे देश में जहाँ जागरूकता की कमी है, वहां समय पर डायग्नोसिस ही सबसे बड़ा बचाव है।

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