
नौकरीपेशा (Salaried) कर्मचारियों के वेतन से हर महीने बेसिक सैलरी और डीए का 12% अनिवार्य रूप से कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) खाते में कटता है, और इतनी ही राशि नियोक्ता (कंपनी) द्वारा भी जमा की जाती है। लेकिन यदि कोई कर्मचारी रिटायरमेंट के लिए अपने भविष्य निधि खाते में इस अनिवार्य 12% से अधिक राशि जमा करना चाहता है, तो उसके पास वॉलंटरी प्रॉविडेंट फंड (VPF) का बेहतरीन विकल्प होता है।
वीपीएफ के तहत आप अपनी बेसिक सैलरी और डीए का 100% तक स्वेच्छा से पीएफ खाते में योगदान कर सकते हैं। इसके लिए कोई नया खाता खोलने की आवश्यकता नहीं होती; यह सीधे आपके मौजूदा यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (UAN) और ईपीएफ खाते से ही लिंक रहता है। सबसे खास बात यह है कि इस पर भी ईपीएफओ (EPFO) द्वारा घोषित वही 8.25% प्रति वर्ष का आधिकारिक और गारंटीड ब्याज मिलता है, जो किसी भी बैंक एफडी, आरडी या पीपीएफ (7.1%) की तुलना में कहीं अधिक है।
यदि आप अपनी नियमित सैलरी से ईपीएफ की सामान्य कटौती के अलावा हर महीने केवल ₹5,000 की अतिरिक्त बचत वीपीएफ में डालते हैं, तो 8.25% की वर्तमान ब्याज दर पर 20 साल का पूरा हिसाब इस प्रकार बनता है:
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मासिक अतिरिक्त बचत: ₹5,000 प्रति माह
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सालाना अतिरिक्त बचत: ₹60,000 प्रति वर्ष
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20 वर्षों में आपकी जेब से जमा कुल मूलधन: ₹5,000 $\times$ 12 $\times$ 20 = ₹12,00,000 (12 लाख रुपये)
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20 वर्षों में अर्जित कुल चक्रवृद्धि ब्याज: ₹19,77,064 (लगभग ₹19.77 लाख)
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20 साल बाद कुल अतिरिक्त रिटायरमेंट फंड: ₹12,00,000 + ₹19,77,064 = ₹31,77,064 (लगभग ₹31.77 लाख)
यानी केवल ₹5,000 की छोटी सी मासिक आदत से 20 साल में आपका मूलधन ₹12 लाख रहेगा, लेकिन कंपाउंडिंग के चमत्कार से ब्याज के रूप में लगभग ₹19.77 लाख अतिरिक्त जुड़कर कुल फंड ₹31.77 लाख तैयार हो जाएगा।
यदि आप अलग-अलग समयावधि के लिए ₹5,000 प्रति माह वीपीएफ में जमा रखते हैं, तो फंड की वृद्धि इस प्रकार होगी:
| अवधि (Tenure) | कुल जमा मूलधन (Invested Amount) | अनुमानित ब्याज (Interest Earned at 8.25%) | कुल मैच्योरिटी राशि (Total Corpus) |
| 5 साल बाद | ₹3,00,000 | ₹74,510 | ₹3,74,510 |
| 10 साल बाद | ₹6,00,000 | ₹3,41,643 | ₹9,41,643 |
| 15 साल बाद | ₹9,00,000 | ₹9,21,794 | ₹18,21,794 |
| 20 साल बाद | ₹12,00,000 | ₹19,77,064 | ₹31,77,064 (लगभग ₹31.8 लाख) |
| 25 साल बाद | ₹15,00,000 | ₹37,64,307 | ₹52,64,307 (लगभग ₹52.6 लाख) |
(नोट: यह गणना 8.25% की स्थिर ब्याज दर और मासिक चक्रवृद्धि आधार पर की गई है। ईपीएफओ हर वित्तीय वर्ष के लिए ब्याज दर की समीक्षा करता है।)
आयकर नियमों के अनुसार वीपीएफ में मिलने वाली टैक्स छूट काफी आकर्षक है, लेकिन इसमें एक महत्वपूर्ण सीमा तय की गई है:
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धारा 80C के तहत छूट: पुरानी टैक्स व्यवस्था (Old Tax Regime) में वीपीएफ में किया गया योगदान धारा 80C की वार्षिक ₹1.5 लाख की सीमा के तहत टैक्स छूट के लिए पात्र होता है।
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₹2.5 लाख वार्षिक ब्याज सीमा (Tax on Interest): केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) के नियमों के अनुसार, यदि एक वित्तीय वर्ष में कर्मचारी का कुल पीएफ योगदान (अनिवार्य EPF + स्वैच्छिक VPF मिलाकर) ₹2,50,000 (ढाई लाख रुपये) से अधिक हो जाता है, तो ₹2.5 लाख से ऊपर की अतिरिक्त जमा राशि पर अर्जित ब्याज कर-योग्य (Taxable) होता है। यदि आप हर महीने ₹5,000 (सालाना ₹60,000) जमा करते हैं और आपका सामान्य ईपीएफ ₹1.9 लाख से कम है, तो आपका पूरा ब्याज शत-प्रतिशत टैक्स-फ्री रहेगा।
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5 साल की सेवा के बाद निकासी टैक्स-फ्री: यदि आप लगातार 5 वर्ष की सेवा पूरी करने के बाद वीपीएफ या ईपीएफ का पैसा निकालते हैं, तो मूलधन और ब्याज दोनों पर कोई आयकर नहीं लगता।
वीपीएफ शुरू करना बेहद आसान है और इसके लिए किसी सरकारी दफ्तर के चक्कर नहीं काटने पड़ते:
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कंपनी के HR / Finance विभाग से संपर्क करें: अपने नियोक्ता (HR या पेरोल टीम) से वीपीएफ फॉर्म मांगें।
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योगदान राशि तय करें: फॉर्म में उल्लेख करें कि आप अपनी बेसिक सैलरी और डीए से प्रति माह कितनी निश्चित राशि (जैसे ₹5,000) या कितने प्रतिशत अतिरिक्त कटवाना चाहते हैं।
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वित्तीय वर्ष की शुरुआत में बदलाव: अधिकांश कंपनियां वित्तीय वर्ष की शुरुआत (अप्रैल) या छमाही चक्र में वीपीएफ अनुरोध स्वीकार करती हैं।
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सैलरी स्लिप और पासबुक में ट्रैकिंग: आवेदन स्वीकृत होते ही आपकी मासिक सैलरी स्लिप में वीपीएफ की अलग कटौती दिखने लगेगी और ईपीएफओ के उमंग ऐप (UMANG App) या मेंबर पासबुक पोर्टल पर यह राशि आपके पीएफ बैलेंस में स्वतः जुड़ती जाएगी।
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