Kidney Stones Symptoms and Causes: किडनी में पथरी बनने की असली वजह क्या है, क्या पुरुषों से ज्यादा महिलाओं में बढ़ रहा है स्टोन का खतरा?

गुर्दे की पथरी यानी रीनल कैलकुलाई (Kidney Stones) आधुनिक समय की एक आम लेकिन अत्यधिक पीड़ादायक स्वास्थ्य समस्या बन चुकी है। सामान्य भाषा में कहें तो किडनी हमारे शरीर का प्राकृतिक फिल्टर है, जो रक्त को साफ करके अपशिष्ट पदार्थों, अतिरिक्त मिनरल्स और विषाक्त तत्वों को पेशाब के माध्यम से बाहर निकालती है। जब किसी व्यक्ति के शरीर में पानी की कमी होती है या खान-पान की गलत आदतों के चलते पेशाब में कुछ रसायनों की सांद्रता बढ़ जाती है, तो ये मिनरल्स पूरी तरह घुल नहीं पाते। धीरे-धीरे ये सूक्ष्म क्रिस्टल के रूप में आपस में चिपकने लगते हैं और समय बीतने पर कंकड़ या पत्थर जैसा ठोस रूप धारण कर लेते हैं। वरिष्ठ नेफ्रोलॉजिस्ट और यूरोलॉजिस्ट्स के अनुसार, किडनी में बनने वाली अधिकांश पथरियां कैल्शियम ऑक्सलेट (Calcium Oxalate) की होती हैं। इसके अलावा शरीर में यूरिक एसिड का स्तर बढ़ने, यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन (UTI) के कारण बनने वाले स्ट्रूवाइट स्टोन और अनुवांशिक कारणों से होने वाले सिस्टीन स्टोन भी प्रमुख प्रकारों में शामिल हैं।

ऐतिहासिक और पारंपरिक मेडिकल आंकड़ों पर नजर डालें तो पुरुषों में किडनी की पथरी बनने का जोखिम महिलाओं की तुलना में लगभग दो से तीन गुना अधिक देखा गया है। पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन हार्मोन की मौजूदगी, अधिक मसल मास और गैर-शाकाहारी प्रोटीन के अधिक सेवन के कारण यूरिन में यूरिक एसिड और कैल्शियम का उत्सर्जन अधिक होता है, जिससे पुरुषों में पथरी तेजी से बनती है। हालांकि, पिछले एक दशक के क्लीनिकल अध्ययनों में डॉक्टरों ने एक बेहद चिंताजनक बदलाव दर्ज किया है। अब महिलाओं में भी किडनी स्टोन के मामलों में अप्रत्याशित तेजी देखी जा रही है और पुरुषों व महिलाओं के बीच का यह अंतर तेजी से कम हो रहा है। नेफ्रोलॉजिस्ट्स बताते हैं कि जीवनशैली में बदलाव, जंक फूड, पर्याप्त पानी न पीना और मोटापा महिलाओं में इस खतरे को बढ़ा रहे हैं। इसके अलावा महिलाओं में बार-बार होने वाला यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन (UTI) स्ट्रूवाइट स्टोन का मुख्य कारण बनता है। रजोनिवृत्ति (Menopause) के बाद एस्ट्रोजन हार्मोन का स्तर गिरने से भी महिलाओं के शरीर में कैल्शियम का मेटाबॉलिज्म बदल जाता है, जिससे 45 से 50 वर्ष की उम्र के बाद महिलाओं में भी पथरी बनने का खतरा पुरुषों के लगभग बराबर पहुंच जाता है।

चिकित्सकों के अनुसार किडनी स्टोन अचानक एक दिन में नहीं बनता, बल्कि इसके पीछे लंबे समय से चली आ रही लापरवाहियां जिम्मेदार होती हैं। सबसे पहला और मुख्य कारण है क्रोनिक डिहाइड्रेशन यानी दिनभर में पर्याप्त पानी न पीना। जब शरीर में पानी कम होता है, तो पेशाब गाढ़ा और गहरे पीले रंग का हो जाता है, जिससे मिनरल्स आसानी से क्रिस्टलाइज हो जाते हैं। दूसरा बड़ा कारण अधिक नमक (सोडियम) और प्रोसेस्ड फूड्स का अत्यधिक सेवन है, क्योंकि अधिक सोडियम किडनी को पेशाब में अधिक कैल्शियम उत्सर्जित करने के लिए मजबूर करता है। तीसरा कारण पालक, टमाटर, चुकंदर, ड्राई फ्रूट्स, चॉकलेट और चाय जैसे ऑक्सलेट से भरपूर खाद्य पदार्थों का अनियंत्रित मात्रा में सेवन करना है। चौथा कारण है एनिमल प्रोटीन जैसे रेड मीट और सीफूड की अधिकता, जिससे शरीर में प्यूरीन टूटकर यूरिक एसिड बढ़ाता है। इसके अतिरिक्त गतिहीन जीवनशैली, मोटापा, डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और बिना डॉक्टर की सलाह के मनमाने ढंग से कैल्शियम व विटामिन डी सप्लीमेंट्स का अधिक सेवन भी पथरी को सीधा न्योता देता है।

शुरुआती अवस्था में जब पथरी किडनी के अंदर स्थिर और छोटी (2 से 3 मिलीमीटर) होती है, तब अक्सर कोई दर्द या लक्षण महसूस नहीं होता। लेकिन जैसे ही यह पथरी हिलकर यूरिनरी ट्यूब यानी यूरेटर (Ureter) में फंसती है या पेशाब के बहाव में रुकावट डालती है, तो मरीज को असहनीय दर्द का सामना करना पड़ता है। इसका सबसे स्पष्ट लक्षण पीठ के निचले हिस्से या पसलियों के नीचे अचानक तेज, ऐंठन भरा दर्द शुरू होना है, जो पेट के निचले हिस्से और जांघों की तरफ फैलता है। इस दर्द के साथ मरीज को तेज मतली, उल्टी और पसीना आने की शिकायत हो सकती है। पेशाब करते समय गंभीर जलन, बार-बार पेशाब आने का अहसास होना लेकिन कुछ ही बूंदें निकलना, पेशाब में गुलाबी, लाल या भूरे रंग का खून आना (Hematuria), और पेशाब से तेज दुर्गंध आना पथरी के स्पष्ट संकेत हैं। यदि पथरी के साथ यूरिन में इन्फेक्शन भी हो जाए, तो मरीज को कंपकंपी के साथ तेज बुखार भी आ सकता है, जिसे मेडिकल इमरजेंसी माना जाता है।

किडनी को जीवनभर निरोगी रखने और स्टोन के निर्माण को रोकने के लिए विशेषज्ञ कुछ आसान लेकिन प्रभावी आदतों को अपनाने की सलाह देते हैं। सबसे पहले हर दिन कम से कम 2.5 से 3 लीटर (लगभग 10 से 12 गिलास) पानी और तरल पदार्थों का सेवन सुनिश्चित करें, ताकि पेशाब का रंग हमेशा हल्का पारदर्शी बना रहे। दूसरा, अपने दैनिक आहार में नींबू पानी, संतरे का जूस और मौसमी का सेवन बढ़ाएं, क्योंकि इनमें मौजूद प्राकृतिक साइट्रेट (Citrate) कैल्शियम क्रिस्टल्स को आपस में जुड़ने से रोकता है। तीसरा, आहार में नमक की मात्रा को सीमित करें और पैकेज्ड चिप्स, नमकीन व डिब्बाबंद सूप से परहेज करें। चौथा, आहार में प्राकृतिक कैल्शियम (जैसे दूध, दही, पनीर) को पूरी तरह बंद न करें, क्योंकि जब आप भोजन में पर्याप्त कैल्शियम लेते हैं, तो वह पेट में ही ऑक्सलेट से बंध जाता है और किडनी तक पहुंचे बिना मल के जरिए बाहर निकल जाता है। पांचवां, यदि आपको पीठ के निचले हिस्से में लगातार चुभन या पेशाब में जलन की समस्या रहती है, तो खुद से दर्द निवारक दवाएं खाने के बजाय तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें और एक साधारण अल्ट्रासाउंड व रूटीन यूरिन टेस्ट करवाकर समय रहते सही उपचार लें।