US-Israel Relations 2026: बंद कमरे में दोस्त बने दुश्मन! ट्रंप ने नेतन्याहू को सरेआम कहा ‘पागल’, जानिए क्यों आई दोनों के रिश्तों में खटास

अमेरिका और इजरायल के बीच के कूटनीतिक और रणनीतिक रिश्तों में इस समय इतिहास की सबसे बड़ी दरार देखने को मिल रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच हाल ही में हुई एक फोन कॉल के दौरान हुई तीखी गर्मागर्मी और बदजुबानी की खबरों ने पूरी दुनिया को चौंका दिया है।

अमेरिकी न्यूज वेबसाइट ‘एक्सियोस’ (Axios) की एक सनसनीखेज रिपोर्ट के मुताबिक, डोनाल्ड ट्रंप लेबनान में इजरायल द्वारा लगातार बढ़ाए जा रहे सैन्य हमलों और भारी बमबारी को लेकर बेहद गुस्से में थे। इसी नाराजगी के चलते उन्होंने नेतन्याहू को न सिर्फ कड़ी फटकार लगाई, बल्कि बेहद सख्त और अपमानजनक शब्दों का भी इस्तेमाल किया।

“अगर मैं न होता तो तुम जेल में होते…”

खुफिया सूत्रों और अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से लीक हुई इस बातचीत के अंश किसी फिल्मी ड्रामे से कम नहीं हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप ने फोन पर बातचीत के दौरान इजरायली प्रधानमंत्री को सरेआम ‘पागल’ तक कह दिया। ट्रंप ने नेतन्याहू को याद दिलाया कि उन्हें राजनीतिक और कानूनी संकटों (भ्रष्टाचार के मुकदमों) से बचाने में अमेरिका और खुद ट्रंप ने कितनी बड़ी भूमिका निभाई है।

लीक हुई बातचीत के सीधे और तीखे बोल

एक अमेरिकी अधिकारी ने फोन कॉल की डिटेल्स साझा करते हुए बताया कि ट्रंप ने चिल्लाते हुए नेतन्याहू से कहा—

“तुम तो बिल्कुल ही पागल हो गए हो। अगर मैं राष्ट्रपति के रूप में तुम्हारे पीछे न खड़ा होता, तो तुम अब तक भ्रष्टाचार के मामलों में जेल की सलाखों के पीछे सड़ रहे होते। मैं यहां तुम्हारी जान और तुम्हारी राजनीतिक साख बचा रहा हूँ, और तुम खेल बिगाड़ रहे हो। आज तुम्हारी हरकतों की वजह से पूरी दुनिया में हर कोई तुमसे नफ़रत करता है, और इसी कारण लोग अब इज़राइल से भी नफ़रत करने लगे हैं।”

कूटनीतिक मतभेद: दोनों नेताओं के बीच क्यों टकराव हुआ?

इस पूरी तकरार के पीछे केवल व्यक्तिगत नाराजगी नहीं थी, बल्कि इसके पीछे कूटनीति के दो अलग-अलग रास्ते थे, जिन्हें आप नीचे दी गई तालिका से आसानी से समझ सकते हैं:

तुलना का आधार डोनाल्ड ट्रंप का रुख (US Perspective) बेंजामिन नेतन्याहू का रुख (Israel Stance)
लेबनान में सैन्य कार्रवाई तत्काल युद्धविराम (Ceasefire) चाहते हैं, ताकि क्षेत्र में शांति बहाल हो सके। बेरूत और दक्षिणी लेबनान में हिजबुल्लाह के खिलाफ लगातार मूसलाधार हमले जारी रखना।
ईरान के साथ बातचीत ईरान के साथ चल रही शांति वार्ता को तेजी से अंजाम तक पहुंचाना चाहते हैं। ईरान और उसके समर्थित गुटों को पूरी तरह सैन्य रूप से कुचलना पहली प्राथमिकता है।
वैश्विक छवि और नुकसान भारी नागरिक हताहतों के कारण इजरायल और अमेरिका की अंतरराष्ट्रीय बदनामी से चिंतित। देश की सुरक्षा के लिए किसी भी अंतरराष्ट्रीय दबाव या आलोचना को नजरअंदाज करने की जिद।

ईरान डील और कूटनीति पर पानी फिरने का डर

इस भीषण लड़ाई के पीछे की सबसे बड़ी वजह है ईरान के साथ अमेरिका की चल रही बातचीत। दरअसल, ट्रंप प्रशासन इस समय ईरान के साथ एक बड़ा और ऐतिहासिक समझौता करने के बेहद करीब है, जिसमें लेबनान में युद्धविराम होना एक अनिवार्य शर्त माना जा रहा है। ईरान ने पहले ही चेतावनी दे दी थी कि अगर इजरायल ने लेबनान और बेरूत में अपनी बमबारी नहीं रोकी, तो वह अमेरिका के साथ चल रही सभी वार्ताओं को तुरंत सस्पेंड (रद्द) कर देगा।

यही वजह है कि ट्रंप साफ़ तौर पर गुस्से से तमतमाए हुए थे और उन्होंने एक समय तो फोन पर चिल्लाते हुए सीधे पूछा— “तुम आखिर कर क्या रहे हो? क्या तुम मेरा पूरा प्लान चौपट करना चाहते हो?”

क्या रहा इस फटकार का जमीनी असर?

एक्सियोस की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप की इस भारी-भरकम और आक्रामक फटकार का असर जमीन पर भी दिखने लगा है। सूत्रों का दावा है कि इस बातचीत के बाद इजरायल ने बेरूत में बड़े हवाई हमले करने के अपने प्लान को फिलहाल टाल दिया है। हालांकि, इस फोन कॉल के बाद नेतन्याहू ने एक सार्वजनिक बयान जारी कर यह दिखाने की कोशिश की कि वे अपनी शर्तों पर अडिग हैं, लेकिन अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि असलियत में ट्रंप ने नेतन्याहू को पूरी तरह ‘स्टीमरोल’ (दबाव में) कर दिया, जिसके बाद इजरायली प्रधानमंत्री को पीछे हटने के लिए मजबूर होना पड़ा। मध्य-पूर्व में चल रही इस कूटनीतिक जंग में आने वाले दिन बेहद नाजुक होने वाले हैं।