इजरायल के जानी दुश्मनों का कड़ा पहरा, फिर भी ईरान क्यों नहीं बंद कर सकता बाब अल मंदेब

वैश्विक व्यापार और समुद्री सुरक्षा के लिहाज से इस वक्त लाल सागर और बाब अल मंदेब जलडमरू मध्य (Strait of Bab al-Mandeb) दुनिया का सबसे संवेदनशील इलाका बना हुआ है। इस रूट पर इजरायल के जानी दुश्मन कहे जाने वाले ईरान समर्थित हुती विद्रोहियों का कड़ा पहरा है, जो लगातार मालवाहक जहाजों को निशाना बना रहे हैं। इस तनाव के बीच एक बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या ईरान इस रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते को पूरी तरह बंद कर सकता है? कूटनीतिक और सैन्य जानकारों की मानें तो ईरान चाहकर भी बाब अल मंदेब को ब्लॉक नहीं कर सकता, भले ही हुती लड़ाके वहां कितनी भी बड़ी ताकत क्यों न बन जाएं।

आखिर क्यों ईरान के लिए नामुमकिन है इसे बंद करना

बाब अल मंदेब को पूरी तरह बंद न कर पाने के पीछे कई बेहद मजबूत वजहें हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि यह अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग दुनिया की लाइफलाइन है, जहां से वैश्विक व्यापार का एक बहुत बड़ा हिस्सा गुजरता है। अगर ईरान या उसके समर्थित गुट इसे पूरी तरह ब्लॉक करने की हिमाकत करते हैं, तो यह सिर्फ इजरायल या अमेरिका के खिलाफ नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के खिलाफ युद्ध की घोषणा जैसा होगा। इसके अलावा, इस इलाके में अमेरिकी नौसेना के साथ-साथ कई अंतरराष्ट्रीय टास्क फोर्स चौबीसों घंटे गश्त कर रही हैं। किसी भी तरह की पूर्ण नाकाबंदी का मतलब होगा ईरान के लिए सीधे तौर पर विनाशकारी सैन्य कार्रवाई को न्योता देना, जिससे खुद ईरान का बचा-कुचा व्यापार भी पूरी तरह तबाह हो जाएगा।

भारत आ रहा जहाज भी इस चक्रव्यूह में चुका है फंस

इस पूरे समुद्री विवाद की तपिश से भारत भी अछूता नहीं रहा है। कुछ समय पहले एक बेहद डराने वाली घटना सामने आई थी, जब भारत की तरफ आ रहा एक कमर्शियल कार्गो जहाज इसी इलाके के आसपास हुती विद्रोहियों के ड्रोन और मिसाइल हमले का शिकार होते-होते बचा था और लंबे समय तक वहां फंसा रह गया था। इस घटना के बाद भारतीय नौसेना को अरब सागर और अदन की खाड़ी में अपनी युद्धपोतों की तैनाती बढ़ानी पड़ी थी। भारत के लिए यह रूट इसलिए बेहद जरूरी है क्योंकि हमारा कच्चा तेल और यूरोपीय देशों के साथ होने वाला व्यापार इसी रास्ते से होकर गुजरता है।

दुश्मनों के पहरे के बीच ग्लोबल ट्रेड का संकट

फिलहाल स्थिति यह है कि यमन के तट पर बैठे हुती विद्रोही चुन-चुनकर उन जहाजों को निशाना बना रहे हैं जिनका संबंध इजरायल, अमेरिका या ब्रिटेन से है। उनके इस खौफ की वजह से कई बड़ी शिपिंग कंपनियों ने इस छोटे रास्ते को छोड़कर अफ्रीका का पूरा चक्कर लगाकर (केप ऑफ गुड होप के रास्ते) जाने का फैसला किया है। इससे न सिर्फ सामान पहुंचने में हफ्तों की देरी हो रही है, बल्कि माल ढुलाई का किराया भी आसमान छूने लगा है। इजरायल के दुश्मनों की इस घेराबंदी ने वैश्विक अर्थव्यवस्था के सामने एक नया संकट खड़ा कर दिया है, लेकिन ईरान इस बात को अच्छी तरह जानता है कि इस रूट को पूरी तरह लॉक करना उसके अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मारने जैसा होगा।