रुपये में ऐतिहासिक गिरावट: डॉलर के मुकाबले 95.06 के स्तर पर खुला; कच्चे तेल की महंगाई और निवेशकों के डर से बाजार में हलचल

भारतीय अर्थव्यवस्था और बाजार के लिए आज सुबह की शुरुआत थोड़ी चिंताजनक रही। 2 जून को शुरुआती कारोबार में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया 7 पैसे और कमजोर होकर 95.06 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर खुला। इससे पिछले ट्रेडिंग सेशन में रुपया 94.99 पर बंद हुआ था। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की लगातार बढ़ती कीमतों और भारतीय शेयर बाजार से विदेशी फंड्स की लगातार हो रही निकासी ने निवेशकों के सेंटिमेंट पर काफी बुरा असर डाला है।

क्यों टूट रही है भारतीय करेंसी? समझिए मुख्य वजहें

रुपये की इस कमजोरी के पीछे ग्लोबल मार्केट और जियोपॉलिटिकल (भू-राजनीतिक) तनाव की एक बड़ी भूमिका है:

  • यूएस-ईरान बातचीत में अनिश्चितता: अमेरिका और ईरान के बीच चल रही कूटनीतिक बातचीत को लेकर बने संशय के कारण वैश्विक तेल बाजार में लगातार उतार-चढ़ाव बना हुआ है। पिछले सत्र में आई भारी तेजी के बाद ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) अभी भी 95 डॉलर प्रति बैरल के करीब मंडरा रहा है। भारत अपनी जरूरत का करीब 80% तेल आयात करता है, ऐसे में कच्चा तेल महंगा होने से भारत का खर्च बढ़ता है और रुपये पर दबाव आता है।

  • विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) की बिकवाली: भारतीय शेयर बाजार से विदेशी निवेशक लगातार अपना पैसा निकाल रहे हैं। एक्सचेंज डेटा के मुताबिक, पिछले महज दो ट्रेडिंग सेशन में विदेशी निवेशकों ने करीब 2.5 अरब डॉलर (approx. ₹20,000 करोड़ से ज्यादा) मूल्य के भारतीय शेयर बेचे हैं।

  • ईरान संकट का बड़ा असर: इसी साल फरवरी के आखिर में शुरू हुए ईरान संघर्ष के बाद से अब तक भारतीय शेयर बाजार से कुल विदेशी फंड्स की निकासी लगभग 25 अरब डॉलर के करीब पहुंच चुकी है।

डॉलर बनाम रुपया: आज के बाजार के प्रमुख आंकड़े

फॉरेन एक्सचेंज मार्केट और वैश्विक संकेतों की मौजूदा स्थिति को आप नीचे दी गई तालिका से आसानी से समझ सकते हैं:

 एक्सपर्ट्स की चेतावनी: क्या डॉलर छू सकता है 100 का आंकड़ा?

बाजार के जानकारों और ट्रेडर्स का कहना है कि कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और लगातार हो रही विदेशी बिकवाली के बावजूद भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) लगातार बाजार में दखल दे रहा है। आरबीआई के इसी हस्तक्षेप की वजह से रुपया एक बड़ी गिरावट से बच पाया है।

हालांकि, बैंकिंग ग्रुप MUFG के विश्लेषकों ने एक बड़ी चेतावनी जारी की है। उनका मानना है कि यदि पश्चिम एशिया (West Asia) में तनाव और ज्यादा गहराता है, तो रुपये में कमजोरी का यह सिलसिला आगे भी जारी रहेगा। अगर होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के आसपास जहाजों की आवाजाही में कोई दिक्कत आती है, तो डॉलर के मुकाबले रुपये का भाव 98 और आने वाले समय में 100 के मनोवैज्ञानिक स्तर तक भी फिसल सकता है।

निवेशकों के बीच सतर्कता का माहौल

फिलहाल डॉलर इंडेक्स के 99.19 के मजबूत स्तर पर पहुंचने से एशिया की अन्य करेंसी भी एक सीमित दायरे में ही कारोबार कर रही हैं। भारतीय शेयर बाजार के इक्विटी फ्यूचर्स भी आज एक सुस्त और नरम शुरुआत का संकेत दे रहे हैं, जो यह दिखाता है कि इस समय घरेलू और विदेशी निवेशक बाजार में कोई भी बड़ा जोखिम लेने से बच रहे हैं और बेहद सतर्क रुख अपना रहे हैं।