UP Panchayat Chunav : उत्तर प्रदेश में टल गए पंचायत चुनाव अब 10 जून को आएगी वोटर लिस्ट, प्रशासकों के हाथ में होगी कमान

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News India Live, Digital Desk: उत्तर प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में चुनावी सरगर्मी के बीच एक बड़ी खबर सामने आई है। प्रदेश में होने वाले त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों पर फिलहाल ‘ब्रेक’ लगता नजर आ रहा है। राज्य निर्वाचन आयोग ने मतदाता सूची (Voter List) के प्रकाशन की तारीख में बड़ा बदलाव कर दिया है। अब फाइनल वोटर लिस्ट 22 अप्रैल के बजाय 10 जून 2026 को जारी की जाएगी। इस फैसले के बाद यह साफ हो गया है कि ग्राम प्रधानों का कार्यकाल खत्म होने से पहले चुनाव कराना अब नामुमकिन है।

26 मई को खत्म हो रहा है ग्राम प्रधानों का कार्यकाल

उत्तर प्रदेश में मौजूदा ग्राम प्रधानों का कार्यकाल 26 मई 2026 को समाप्त हो रहा है। संवैधानिक नियमों के अनुसार, कार्यकाल खत्म होने से पहले नई पंचायतों का गठन जरूरी होता है, लेकिन वोटर लिस्ट की तारीख आगे बढ़ने से चुनावी प्रक्रिया पिछड़ गई है। अब जून के दूसरे सप्ताह के बाद ही अधिसूचना जारी होने, नामांकन, मतदान और फिर मतगणना की उम्मीद है। ऐसे में प्रदेश के गांवों की कमान अब निर्वाचित प्रतिनिधियों के बजाय प्रशासकों (Administrators) के हाथों में जा सकती है।

क्यों बढ़ी तारीख? डुप्लीकेट मतदाताओं पर आयोग की ‘सर्जिकल स्ट्राइक’

राज्य निर्वाचन आयुक्त राज प्रताप सिंह द्वारा जारी नई अधिसूचना के अनुसार, इस देरी की मुख्य वजह मतदाता सूची को त्रुटिहीन बनाना है। आयोग 21 अप्रैल से 28 मई तक ‘डिडुप्लीकेशन’ अभियान चलाएगा, जिसके तहत एक से ज्यादा जगह दर्ज नामों और फर्जी मतदाताओं को हटाया जाएगा। इसके बाद 29 मई से 9 जून तक मतदान केंद्रों की मैपिंग, वार्डों का निर्धारण और मतदाता सूचियों की डाउनलोडिंग का काम किया जाएगा।

सरकारी दफ्तरों में नहीं मिलेगी छुट्टी, अवकाश के दिन भी होगा काम

चुनाव प्रक्रिया को जल्द से जल्द पटरी पर लाने के लिए आयोग ने सख्त निर्देश जारी किए हैं। मतदाता सूची पुनरीक्षण के काम में जुटे जिला मजिस्ट्रेट, निर्वाचन अधिकारी और सहायक निर्वाचन अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि इस दौरान पड़ने वाले सार्वजनिक अवकाशों (Public Holidays) पर भी दफ्तर खुले रहेंगे। आयोग का लक्ष्य है कि 10 जून को हर हाल में मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन कर दिया जाए ताकि चुनाव कार्यक्रम की घोषणा की जा सके।

क्या होगा कार्यकाल खत्म होने के बाद?

चूंकि 26 मई को ग्राम प्रधानों का कार्यकाल खत्म हो जाएगा और जून के अंत या जुलाई तक चुनाव खिंच सकते हैं, इसलिए सरकार को वैकल्पिक व्यवस्था करनी होगी। जानकारों की मानें तो शासन स्तर पर एडीओ (पंचायत) या अन्य प्रशासनिक अधिकारियों को गांवों का जिम्मा सौंपा जा सकता है ताकि विकास कार्य और सरकारी योजनाएं प्रभावित न हों।

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