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UP Mission 2027: चुनाव से पहले योगी सरकार का बड़ा दांव, मंत्रियों के प्रभार वाले जिलों में भारी फेरबदल; देखें किसे कहाँ की मिली कमान

उत्तर प्रदेश की राजनीति में साल 2027 में होने वाले विधानसभा चुनावों को लेकर सरगर्मियां अभी से तेज हो गई हैं। इसी सिलसिले में सूबे की योगी सरकार ने एक बड़ा प्रशासनिक और राजनीतिक कदम उठाते हुए मंत्रियों के प्रभार वाले जिलों में बड़ा फेरबदल (Reshuffle) कर दिया है। सरकार द्वारा जारी की गई नई सूची में कई वरिष्ठ मंत्रियों के कार्यक्षेत्र बदले गए हैं, वहीं हाल ही में मंत्रिमंडल विस्तार के दौरान टीम योगी का हिस्सा बने नए चेहरों को भी महत्वपूर्ण जिलों की कमान सौंपकर संगठन और सरकार को मजबूत करने की कोशिश की गई है।

माना जा रहा है कि इस फेरबदल का सीधा मकसद जमीनी स्तर पर सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन को तेज करना और जनता के बीच मंत्रियों की पहुंच को बढ़ाना है।

सीएम और डिप्टी सीएम के पास रहेंगे 25-25 जिले

नई व्यवस्था के तहत भी शीर्ष नेतृत्व की भूमिका में कोई बदलाव नहीं हुआ है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और दोनों उप-मुख्यमंत्रियों (केशव प्रसाद मौर्य और बृजेश पाठक) के पास पहले की तरह ही 25-25 जिलों का सुपरविजन और प्रभार बना रहेगा। मुख्य बदलाव कैबिनेट मंत्रियों और राज्य मंत्रियों के स्तर पर देखने को मिला है।

कैबिनेट मंत्रियों के प्रभार वाले जिले

वरिष्ठ कैबिनेट मंत्रियों में वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना को बेहद महत्वपूर्ण जिम्मेदारी देते हुए राजधानी लखनऊ और बाबा विश्वनाथ की नगरी वाराणसी का प्रभारी मंत्री बनाया गया है। वहीं जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह अब प्रयागराज और मुख्यमंत्री के गृह क्षेत्र गोरखपुर की कमान संभालेंगे।

कैबिनेट मंत्रियों की पूरी सूची और उनके आवंटित जिले नीचे दी गई तालिका में देख सकते हैं:

राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) की नई जिम्मेदारियां

राज्य मंत्रियों (स्वतंत्र प्रभार) को भी चुनावी समीकरणों को ध्यान में रखते हुए अहम जिलों में भेजा गया है। नितिन अग्रवाल को लखीमपुर खीरी तो असीम अरुण को हरदोई और मेरठ जैसे पश्चिमी यूपी के बड़े जिलों की कमान मिली है।

राज्य मंत्रियों को मिला इन जिलों का जिम्मा

राज्य मंत्रियों की सूची में मयंकेश्वर शरण सिंह के प्रभार में बदलाव कर उन्हें सीतापुर की जगह अब प्रतापगढ़ का प्रभारी मंत्री नियुक्त किया गया है। बाकी मंत्रियों को भी क्षेत्रीय संतुलन साधते हुए जिम्मेदारियां बांटी गई हैं:

 क्या है इस बड़े फेरबदल के मायने?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बार जिलों के प्रभार तय करते समय मंत्रियों के सामाजिक और क्षेत्रीय समीकरणों का खास ख्याल रखा गया है। मंत्रियों को उन जिलों की जिम्मेदारी दी गई है जहाँ वे पार्टी के जनाधार को मजबूत करने के साथ-साथ स्थानीय गुटबाजी को भी शांत कर सकें। आने वाले दिनों में उत्तर प्रदेश के सरकारी और सांगठनिक ढांचे में कुछ और चौंकाने वाले बदलाव भी देखने को मिल सकते हैं।