
Lucknow News: उत्तर प्रदेश में बिजली दरों में संभावित बढ़ोतरी को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के प्रवक्ता शादाब चौहान ने राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार प्रदेश की बढ़ती बिजली जरूरतों को पूरा करने में सफल नहीं हो पा रही है, लेकिन आम जनता पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालने की कोशिश लगातार की जा रही है।
बिजली संकट और महंगी दरों को लेकर सरकार पर सवाल
शादाब चौहान ने कहा कि प्रदेश के कई हिस्सों में उपभोक्ताओं को अभी भी बिजली कटौती और आपूर्ति संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे समय में बिजली दरों में वृद्धि की चर्चा आम लोगों की चिंता बढ़ाने वाली है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार पहले से मौजूद चुनौतियों का समाधान करने के बजाय बिजली महंगी कर उपभोक्ताओं से ही इसकी भरपाई करना चाहती है।
आम जनता पर बढ़ेगा आर्थिक दबाव
AIMIM प्रवक्ता ने कहा कि महंगाई के दौर में पहले ही आम आदमी की जेब पर लगातार बोझ बढ़ रहा है। खाद्य पदार्थों से लेकर रोजमर्रा की जरूरतों की वस्तुओं तक कीमतें बढ़ी हुई हैं। ऐसे में यदि बिजली दरों में बढ़ोतरी की जाती है तो इसका सीधा असर मध्यम वर्ग, गरीब परिवारों और छोटे कारोबारियों पर पड़ेगा।
सरकार से जवाबदेही की मांग
शादाब चौहान ने सरकार से मांग की कि बिजली व्यवस्था को मजबूत करने और उपभोक्ताओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने पर ध्यान दिया जाए। उन्होंने कहा कि जनता को राहत देने के बजाय उस पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालना किसी भी स्थिति में उचित नहीं माना जा सकता।
विपक्ष ने उठाए उपभोक्ताओं के हितों से जुड़े मुद्दे
बिजली दरों को लेकर प्रदेश की राजनीति में बहस तेज होती दिखाई दे रही है। विपक्षी दल लगातार सरकार से बिजली उत्पादन, आपूर्ति व्यवस्था और संभावित दर वृद्धि को लेकर सवाल पूछ रहे हैं। आने वाले दिनों में यह मुद्दा राजनीतिक रूप से और अधिक गर्मा सकता है।
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