
ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे कूटनीतिक तनाव में एक नया मोड़ आ गया है। ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामेनेई के वरिष्ठ सलाहकार मोहसिन रजाई ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों पर कड़ा प्रहार किया है। रजाई ने ट्रंप पर आरोप लगाया है कि वे न केवल कूटनीतिक विश्वासघात कर रहे हैं, बल्कि ईरान की अर्थव्यवस्था को कमजोर करने के लिए अनुचित दबाव बना रहे हैं।
मोहसिन रजाई ने ट्रंप पर उठाए सवाल
मोहसिन रजाई ने शनिवार को एक सार्वजनिक बयान में ट्रंप प्रशासन की कार्यशैली को ‘बेतुका’ और ‘अविश्वसनीय’ करार दिया है। उनके मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
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नौसैनिक नाकाबंदी (Naval Blockade): रजाई ने जोर देकर कहा कि ईरान के खिलाफ नौसैनिक नाकाबंदी को जारी रखना अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन है और यह तनाव कम करने के किसी भी प्रयास को विफल कर रहा है।
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अतार्किक मांगें: उन्होंने आरोप लगाया कि ट्रंप प्रशासन बातचीत की मेज पर ऐसी मांगें रख रहा है जो न केवल अतार्किक हैं, बल्कि ईरान की संप्रभुता को चुनौती देने वाली हैं।
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तीसरी बार विश्वासघात: रजाई ने अपने बयान में इसे कूटनीति के साथ ‘तीसरी बार किया गया विश्वासघात’ बताया है, जो यह संकेत देता है कि ईरान को अब अमेरिका के शांति प्रयासों पर भरोसा नहीं है।
क्या है तनाव का मुख्य कारण?
ईरान और अमेरिका के बीच यह तनातनी पुरानी है, लेकिन हालिया बयानबाजी ने माहौल को और अधिक गर्म कर दिया है। ट्रंप प्रशासन ईरान की परमाणु गतिविधियों और क्षेत्रीय प्रभाव को सीमित करने के लिए ‘अधिकतम दबाव’ (Maximum Pressure) की नीति अपना रहा है। वहीं, ईरान का मानना है कि अमेरिका की ये कार्रवाई कूटनीति के बहाने ईरान को अलग-थलग करने की एक सोची-समझी साजिश है।
क्षेत्रीय और वैश्विक प्रभाव
ईरान के इस सख्त रुख का असर सीधे तौर पर मध्य-पूर्व की राजनीति और वैश्विक तेल बाजार पर पड़ सकता है। नौसैनिक नाकाबंदी और कूटनीतिक गतिरोध के कारण खाड़ी क्षेत्र (Persian Gulf) में सुरक्षा चुनौतियां बढ़ गई हैं। अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों का मानना है कि यदि बातचीत का रास्ता जल्द नहीं खुलता है, तो यह स्थिति क्षेत्र में किसी अनपेक्षित संघर्ष को जन्म दे सकती है।
फिलहाल, ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि वह दबाव में आकर अपनी नीतियों में कोई बदलाव नहीं करेगा। देखना यह होगा कि क्या अमेरिका अपने रुख में नरमी लाता है या यह कूटनीतिक तनातनी और अधिक गहराती है।
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