ट्रेन लेट होने से छूटी फ्लाइट तो रेलवे पर ठुका ₹69,000 का जुर्माना; कंज्यूमर कोर्ट ने कहा— बहानों से नहीं चलेगा काम

अगर भारतीय रेलवे की सबसे वीआईपी और प्रीमियम ट्रेनों में गिनी जाने वाली राजधानी एक्सप्रेस भी घंटों लेट होने लगे और उसकी वजह से आपका हजारों का नुकसान हो जाए, तो आम मुसाफिर का परेशान होना स्वाभाविक है। ज्यादातर लोग इसे अपनी फूटी किस्मत मानकर बैठ जाते हैं, लेकिन कोटा के एक दंपत्ति ने ऐसा नहीं किया। उन्होंने अपनी ट्रेन लेट होने और उसके कारण अगली फ्लाइट छूटने के नुकसान के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ी। नतीजा यह हुआ कि जिला उपभोक्ता फोरम के बाद अब राज्य उपभोक्ता फोरम (State Consumer Forum) ने भी रेलवे की दलीलों को खारिज करते हुए मुसाफिरों के हक में बड़ा फैसला सुनाया है।

क्या था पूरा मामला?

यह वाकया 17 दिसंबर 2017 का है। राजस्थान के कोटा में रहने वाले अनिल कुमार राना और उनकी पत्नी अनीता राना ने केरल (त्रिवेंद्रम) जाने का एक प्लान बनाया था। उन्होंने करीब एक महीने पहले (9 नवंबर 2017) ही एयर इंडिया की दिल्ली से त्रिवेंद्रम की फ्लाइट टिकट बुक करा ली थी, जो समय से पहले बुक होने के कारण उन्हें ₹33,929 में मिल गई थी।

फ्लाइट पकड़ने के लिए उन्हें कोटा से दिल्ली पहुंचना था। इसके लिए उन्होंने सबसे भरोसेमंद मानी जाने वाली प्रीमियम ट्रेन राजधानी एक्सप्रेस (ट्रेन नंबर 12431) में टिकट बुक कराया।

  • ट्रेन का शेड्यूल: राजधानी एक्सप्रेस को कोटा से सुबह 6:55 बजे रवाना होकर दोपहर 12:40 बजे दिल्ली के हजरत निजामुद्दीन स्टेशन पहुंचना था।

  • फ्लाइट का शेड्यूल: उसी दिन शाम को 6:05 बजे दिल्ली एयरपोर्ट से उनकी फ्लाइट थी।

यानी दंपत्ति के पास दिल्ली पहुंचने और वहां से एयरपोर्ट जाने के लिए 5 घंटे से भी ज्यादा का पर्याप्त समय था।

4 घंटे की देरी और चुकाना पड़ा भारी हर्जाना

सफर के दिन राजधानी एक्सप्रेस अचानक लेट हो गई और दोपहर 12:40 के बजाय शाम को 4:50 बजे निजामुद्दीन स्टेशन पहुंची। ट्रेन से उतरकर यह कपल जब तक भागते-भागते दिल्ली एयरपोर्ट पहुंचा, तब तक उनकी फ्लाइट उड़ान भर चुकी थी।

फ्लाइट मिस होने के कारण इस दंपत्ति को पूरी रात एयरपोर्ट पर ही गुजारनी पड़ी। अगले दिन केरल पहुंचने के लिए उन्हें मजबूरी में भारी-भरकम कीमत देकर ₹72,930 का नया हवाई टिकट खरीदना पड़ा। इसके अलावा होटल और मानसिक परेशानी का खर्च अलग से हुआ।

रेलवे को कोर्ट में घसीटा: मुआवजे का पूरा ब्योरा

कोटा लौटने के बाद अनिल कुमार ने साल 2018 में रेलवे को कई बार लिखित शिकायतें भेजीं और नुकसान की भरपाई की मांग की, लेकिन रेलवे ने उनकी एक न सुनी। इसके बाद दिसंबर 2018 में कानूनी नोटिस भेजने के बाद उन्होंने कोटा के जिला उपभोक्ता फोरम में केस दर्ज करा दिया।

रेलवे ने कोर्ट में दलील दी कि ट्रेनें अक्सर ऑपरेशनल, टेक्निकल और सेफ्टी (सुरक्षा) कारणों से लेट होती हैं, इसलिए इसे ‘सेवा में कमी’ (Deficiency in Service) नहीं माना जा सकता। लेकिन कोर्ट ने रेलवे के इन घिसे-पिटे बहानों को सिरे से खारिज कर दिया। कोर्ट ने अगस्त 2023 में रेलवे को दोषी मानते हुए निम्नलिखित हर्जाना भरने का आदेश दिया:

 स्टेट फोरम में भी रेलवे की हुई हार

जिला उपभोक्ता फोरम के इस फैसले के खिलाफ रेलवे ने हार न मानते हुए राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (State Consumer Disputes Redressal Commission) में अपील दायर की थी। लेकिन राज्य फोरम ने भी निचली अदालत के फैसले को पूरी तरह सही ठहराया है। कोर्ट ने साफ किया कि अगर कोई यात्री प्रीमियम ट्रेन का टिकट ले रहा है, तो वह समय पर पहुंचने की उम्मीद रखता है। बिना किसी ठोस और आपातकालीन वजह के ट्रेन को घंटों लेट करना और यात्रियों का नुकसान करना सेवा में भारी लापरवाही है।

यह ऐतिहासिक फैसला देश के उन करोड़ों रेल यात्रियों के लिए एक बड़ी मिसाल है जो अक्सर ट्रेनों की लेट-लतीफी के कारण अपना कीमती समय और पैसा गंवा बैठते हैं।