
दिल्ली-एनसीआर के रियल एस्टेट और इंडस्ट्रियल सेक्टर में ‘न्यू नोएडा’ को लेकर हलचलें काफी तेज हो चुकी हैं। दादरी-नोएडा-गाजियाबाद विशेष निवेश क्षेत्र (DNGIR) के तहत बसाए जा रहे इस नए शहर को भविष्य की जरूरतों के हिसाब से बेहद हाईटेक बनाया जा रहा है। इसी कड़ी में न्यू नोएडा को उत्तर प्रदेश के ड्रीम प्रोजेक्ट ‘गंगा एक्सप्रेसवे’ और जेवर में बन रहे ‘नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट’ से सीधे जोड़ने की एक बेहद महत्वाकांक्षी योजना सामने आई है।
नोएडा प्राधिकरण की आगामी बोर्ड बैठक में इस पूरे कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट को रोटरी (गोलचक्कर) व्यवस्था के जरिए जोड़ने का एक खास प्रस्ताव रखा जाएगा। न्यू नोएडा का एक बड़ा हिस्सा बुलंदशहर के उन गांवों से होकर गुजर रहा है जो गंगा एक्सप्रेसवे के बेहद नजदीक हैं। ऐसे में इस कनेक्टिविटी के बाद पूरे क्षेत्र में उद्योगों और व्यापार को एक नई रफ्तार मिलना तय माना जा रहा है।
क्या है 72 किलोमीटर लंबा लिंक एक्सप्रेसवे और रोटरी प्लान?
यमुना एक्सप्रेसवे की तरफ से सीधे गंगा एक्सप्रेसवे को आपस में कनेक्ट करने के लिए एक 72 किलोमीटर लंबा लिंक एक्सप्रेसवे प्रस्तावित किया गया है। यह लिंक एक्सप्रेसवे बुलंदशहर के रास्ते गुजरेगा, जिसका एक बड़ा हिस्सा न्यू नोएडा के गांवों और प्रस्तावित सेक्टर्स के बीच से होकर जाएगा।
कनेक्टिविटी का नया रोटरी मॉडल
नोएडा प्राधिकरण के एसीईओ सतीश पाल के अनुसार, इस लिंक एक्सप्रेसवे का फायदा न्यू नोएडा के आंतरिक हिस्सों को दिलाने के लिए एक विशेष ‘रोटरी’ (Rotary Hub) बनाने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। इस रोटरी के बनने से न्यू नोएडा के अधिकांश गांव और नए इंडस्ट्रियल सेक्टर्स सीधे लिंक एक्सप्रेसवे से जुड़ जाएंगे। इसके बाद यहां के लोग बिना किसी ट्रैफिक जाम के सीधे जेवर एयरपोर्ट और गंगा एक्सप्रेसवे पर आ-जा सकेंगे। इसके साथ ही नोएडा और न्यू नोएडा के बीच भी एक नया सीधा सड़क लिंक बनाने पर विचार चल रहा है।
चार चरणों में लागू होगा मास्टर प्लान 2041
न्यू नोएडा का पूरा विस्तार 209.11 वर्ग किलोमीटर (यानी लगभग 20,911.29 हेक्टेयर) के विशाल क्षेत्र में होना है। इस पूरे महा-परियोजना को योजनाबद्ध तरीके से साल 2041 तक कुल चार चरणों में जमीन पर उतारा जाएगा:
किसानों की सहमति से लैंड एक्विजिशन और मुआवजे की दरें
न्यू नोएडा को बसाने के लिए जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी तरह से पारदर्शिता और किसानों की आपसी सहमति के आधार पर की जाएगी। नोएडा प्राधिकरण के ओएसडी क्रांति शेखर ने बताया कि ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे के पास स्थित क्षेत्र से किसानों की मर्जी से जमीन ली जाएगी और इसी स्थान पर न्यू नोएडा का पहला ‘साइट ऑफिस’ भी बनाया जाएगा। इसके अलावा मास्टर प्लान के तहत जिन गांवों की मौजूदा सड़कें 18 मीटर चौड़ी हैं, उन्हें बढ़ाकर 24 मीटर करने के लिए आसपास की जमीन का विस्तार किया जाएगा।
यमुना विकास प्राधिकरण (YEIDA) की तर्ज पर ही न्यू नोएडा के लिए भी मुआवजे का एक स्पष्ट फॉर्मूला तय कर दिया गया है:
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सामान्य मुआवजा दर: यदि किसान सीधे तौर पर अपनी जमीन प्राधिकरण को बेचते हैं, तो उन्हें ₹4,300 प्रति वर्गमीटर के हिसाब से एकमुश्त मुआवजा दिया जाएगा।
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7% विकसित प्लॉट का विकल्प: जो किसान मुआवजे के साथ-साथ भविष्य के विकास में हिस्सेदारी चाहते हैं और 7% विकसित प्लॉट (Developed Plots) का विकल्प चुनते हैं, उन्हें ₹3,800 प्रति वर्गमीटर की दर से मुआवजा राशि का भुगतान किया जा रहा है।
इस मुआवजे और सीधी कनेक्टिविटी के कारण आने वाले कुछ ही समय में न्यू नोएडा दिल्ली-एनसीआर का सबसे बड़ा निवेश और रोजगार का केंद्र बनकर उभरने वाला है।
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