Medicine Facts : टैबलेट के बीच की लाइन कोई डिजाइन नहीं, बल्कि है स्कोर लाइन, जानें इसे तोड़ने का सही नियम

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News India Live, Digital Desk: अक्सर आपने देखा होगा कि कुछ दवाइयों की गोलियों (Tablets) के ठीक बीच में एक सीधी लाइन बनी होती है। बहुत से लोग इसे महज एक डिजाइन समझते हैं, लेकिन मेडिकल विज्ञान में इसका एक विशेष उद्देश्य है। इस लाइन को तकनीकी भाषा में ‘स्कोर लाइन’ (Score Line) कहा जाता है। एशियन हॉस्पिटल के एक्सपर्ट डॉ. सुनील राणा के अनुसार, यह लाइन मरीज की सुरक्षा और सटीक डोज़ (Dose) से जुड़ी होती है। आइए जानते हैं इसके पीछे का पूरा विज्ञान।

क्यों बनाई जाती है ‘स्कोर लाइन’?

टैबलेट पर बनी यह लाइन मुख्य रूप से दवाई को बराबर दो हिस्सों में तोड़ने के लिए होती है। इसके पीछे के प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं:

सटीक डोज़ (Accurate Dosage): कई बार डॉक्टर मरीज को पूरी गोली के बजाय आधी गोली लेने की सलाह देते हैं (जैसे 500mg की जगह 250mg)। स्कोर लाइन की मदद से गोली को बिना चूरा किए ठीक बीच से बराबर बांटा जा सकता है।

मरीज की सुविधा: बुजुर्गों या बच्चों के लिए कई बार पूरी गोली निगलना मुश्किल होता है, ऐसे में लाइन की मदद से इसे आधा कर डोज़ को मैनेज किया जा सकता है।

सावधान! जिन गोलियों पर लाइन नहीं है, उन्हें न तोड़ें

डॉक्टरों के अनुसार, हर टैबलेट को तोड़कर खाना खतरनाक हो सकता है। यदि किसी गोली पर स्कोर लाइन नहीं बनी है, तो उसका सीधा मतलब है कि उसे साबुत ही निगलना है। इसके पीछे दो मुख्य तकनीकी कारण होते हैं:

सस्टेन्ड रिलीज (Sustained Release): कुछ दवाइयाँ शरीर में धीरे-धीरे घुलने के लिए बनाई जाती हैं। इन्हें तोड़ने से पूरी दवा एक साथ रिलीज हो सकती है, जो शरीर के लिए घातक हो सकता है।

एंटेरिक कोटेड (Enteric Coated): कुछ गोलियों पर एक खास कोटिंग होती है ताकि वे पेट के बजाय सीधे आंतों में जाकर घुलें। तोड़ने पर यह कोटिंग खराब हो जाती है और दवा का असर खत्म या बदल सकता है।

एक्सपर्ट की चेतावनी: साइड इफेक्ट्स का खतरा

बिना स्कोर लाइन वाली गोली को जबरदस्ती तोड़कर खाने से उसका रासायनिक संतुलन बिगड़ सकता है। इससे न केवल दवा का असर कम हो जाता है, बल्कि साइड इफेक्ट्स (Side Effects) का जोखिम भी बढ़ जाता है। सही मात्रा में दवा न मिलने पर मरीज को बीमारी से पूरा लाभ नहीं मिल पाता है

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