मुनाफे में चल रही थी IMPCL !, किसे फायदा पहुंचाने के लिए उत्तराखंड की इस कंपनी को बेचा गया?

Uttarakhand IMPCL Sold Off to Private Hands: उत्तराखंड की IMPCL कंपनी जिसकी नेट वर्थ 150 करोड़ की थी। जिससे हर साल करोड़ों का मुनाफा आता था। राज्य में हजारों लोगों के परिवार इससे चलते थे। लेकिन बावजूद इसके सरकार ने उसे बेच दिया। ना सिर्फ बेचा बल्कि उसकी वर्थ से कम 121 करोड़ में नीलाम कर दिया। उत्तराखंड के पूर्व सीएम, सांसद, कैबिनेट मंत्रीयों के साथ ही विपक्ष के नेता राहुल गांधी तक ने इसे ना बेचने की गुहार लगाई।

लेकिन सरकार ने किसी की नहीं सुनी। तो आखिर किसे फायदा पहुंचाने के लिए उत्तराखंड की इतनी बड़ी कंपनी को नीलाम कर दिया गया। आखिर कैसे मुनाफे वाली सरकारी कंपनी impcl को सरकार ने ही नीजी हाथों में बेच दिया। चलिए इस आर्टिकल में IMPCL को बेचने और बाकी सभी चीजों के बारे में जान लेते है।

बिक गई उत्तराखंड की IMPCL कंपनी Uttarakhand IMPCL Sold Off to Private Hands

IMPCL भारत सरकार के आयुष मंत्रालय के अधीन देश की एकमात्र केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी थी। जो आयुर्वेदिक और यूनानी दवाइयां बनाती थी। इस कंपनी की शुरुआत उन्नीस सौ अठहतर में की गई। IMPCL के पास 1200 से ज्यादा दवाओं के लाइसेंस है। मॉर्डन मशीनें और साथ ही जिम कॉर्बेट के पास 40 एकड़ की प्राइम लोकेशन वाली जमीन है। जानकारों की मानें तो सिर्फ जमीन और मशीनों की कीमत ही 150 करोड़ से ज्यादा है। IMPCL कंपनी काफी मुनाफे में भी चल रही थी।

फायदे में चल रही थी IMPCL

2022-23 में IMPCL ने 20.81 करोड़ रुपये का लाभ कमाया। 2023-24 में लाभ घटकर लमसम 12.80 करोड़ रहा पर कंपनी इसके बावजूद फायदे में थी । 2024-25 में IMPCL का मुनाफा बढ़कर 17.65 करोड़ हो गया। इस कंपनी में सीधे तौर पर एम्प्लॉई काम कर रहे थे। वहीं एक मोटे अनुमान के मुताबिक अप्रत्यक्ष तौर पर 5000 लोग इस कंपनी से जुड़े हुए थे। अल्मोड़ा और आसपास के इलाके के लोगों के लिए ये कंपनी रोजगार का एक बड़ा जरिया थी।

  • 2022-23 ₹20.81 करोड़ लाभ
  • 2023-24 ₹12.80 करोड़ लाभ
  • 2024-25 ₹17.65 करोड़ लाभ

फिर क्यों बेच दी सरकार ने?

अब आप भी सोच रहे होंगे कि सार्वजनीक क्षेत्र की जो कंपनी लगातार मुनाफे में चल रही थी। जिस कंपनी से प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष तौर पर हजारों लोग जुड़े हुए थे। जिस कंपनी में रोजगार की बदौलत कई घरों में चुल्हा जल रहा था। तो आखिर उस कंपनी को सरकार ने बेचा क्यों। तो आपको बता दें कि सरकार इसे विनिवेश का नाम दे रही है। यानी सरकार खुद कारोबार चलाने के बजाय उसे निजी हाथों में देकर अपनी भूमिका नियामक तक सीमित करना चाहती है।

सरकार का कहना है कि उसका काम उद्योग चलाना नहीं बल्कि शासन चलाना है। ऐसा कर कंपनी का विस्तार होगा। नई तकनीक आएगी, काम बेहतर होगा।

किसे फायदा पहुंचाने के लिए IMPCL कंपनी की हुई निलामी?

लोगों की मानें तो ये पूरा खेल प्राइवेट कंपनियों की चांदी करवाने का है। तभी मुनाफे में चल रही कंपनी को अंडरवैल्यू करके उसे कौड़ियों के भाव एक प्राइवेट कंपनी को सौंप दिया गया। यहां आपको ये भी बता दें कि इस कंपनी को घाटे में दिखाने की भी बड़ी बड़ी साजिशें रची गईं। ताकी इसे बेचने का बहाना मिल सके पर बावजूद इसके कंपनी मुनाफा कमाती रही। लेकिन फिर भी सरकार ने इसे नीलाम कर दिया।

कई बीजेपी नेताओं समेत राहुल गांधी ने भी इसको लेकर उठाई आवाज

हालांकि IMPCL को बचाने के लिए खुद बीजेपी के कई बड़े नेताओं ने प्रधानमंत्री को तक चिट्ठियां लिखी। यहां तक की विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने भी इसके लिए आवाज उठाई। लेकिन फिर भी किसी की सुनवाई नहीं हुई। सरकार के इस फैसले से कंपनी ही नहीं बल्कि उत्तराखंड के हजारों परिवारों की रोजी रोटी भी खतरे में पड़ गई है।

उत्तराखंड के हजारों परिवारों की रोज़ी‑रोटी थी कंपनी

IMPCL उत्तराखंड के हजारों परिवारों की रोज़ी‑रोटी का जरिया भी थी। 40 एकड़ जमीन, मॉडर्न मशीनें, 1200 से ज्यादा दवाओं के लाइसेंस और हर साल करोड़ों का मुनाफा। लिहाज़ा ये कोई बीमार या डूबती हुई कंपनी नहीं थी जिसे बचाने के लिए बेचना जरूरी हो।

IDPL, ऋषिकेश और HMT रानीबाग आदि कंपनियों को बीमार घोषित

वैसे ये पहली बार नहीं है जब किसी सरकारी कंपनी का भविष्य सवालों में घिरा हो। बीमार या डूबती हुई कंपनीयों को सरकार कितना रिवाइव कर पाती है। इसके उदाहरण IDPL, ऋषिकेश और HMT रानीबाग जैसे बड़े नाम हैं। जो उत्तराखंड में रोजगार देते थे। लेकिन सरकार ने इन्हें रिवाइव करने के बजाए बीमार कंपनी घोषित कर दिया। फिर धीरे‑धीरे यहां उत्पादन घटने लगा, निवेश रुका, और आखिरकार ये कंपनीयां अपने पैरों पर ज्यादा वक्त तक खड़ी नहीं रह पाईं और बंद हो गई