
उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले से शुक्रवार तड़के सामने आए दर्दनाक पुल हादसे के बाद अब शासन और प्रशासन पूरी तरह से एक्शन मोड में आ गया है। तेज आंधी-तूफान के दौरान बेतवा नदी पर बन रहे एक पुल का भारी-भरकम स्लैब अचानक भरभराकर गिर गया, जिसकी चपेट में आने से छह असहाय श्रमिकों की मौके पर ही मौत हो गई। इस भीषण लापरवाही और दर्दनाक हादसे को गंभीरता से लेते हुए सरकार के निर्देश पर जिम्मेदार कार्यदायी संस्था के खिलाफ बड़ी कार्रवाई शुरू कर दी गई है। हादसे के लिए जिम्मेदार कंपनी के मालिक और ठेकेदार के खिलाफ पुलिस ने गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है। वहीं, सरकारी स्तर पर भी गाज गिरनी शुरू हो गई है और विभाग के एक सहायक अभियंता (Assistant Engineer) को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। इस घटना के बाद से निर्माण कार्य की गुणवत्ता और सरकारी तंत्र की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
‘दि शेल्टर’ कंपनी के मालिक पवन प्रताप सिंह और ठेकेदार पर केस दर्ज
हमीरपुर के लालपुरा थाना क्षेत्र के अंतर्गत परसानी और कंदौर गांवों के बीच बेतवा नदी पर इस पुल का निर्माण कार्य चल रहा था। पुलिस सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, इस पुल को बनाने का ठेका ‘दि शेल्टर’ नाम की कंपनी के पास था। शुक्रवार को हुए इस भयावह हादसे के बाद राज्य सेतु निगम के उप परियोजना प्रबंधक दिलीप कुमार की तहरीर पर देर रात कुरारा थाने में कार्यदायी संस्था के मालिक पवन प्रताप सिंह और मुख्य ठेकेदार नितीश कुमार के खिलाफ नामजद मुकदमा दर्ज किया गया है। इन दोनों पर सरकारी काम में घोर लापरवाही बरतने, सुरक्षा मानकों की अनदेखी करने और ढिलाई बरतने का संगीन आरोप है। थाना प्रभारी प्रिन्स दीक्षित ने बताया कि केस दर्ज कर मामले की गहराई से विवेचना शुरू कर दी गई है और दोषियों की गिरफ्तारी के प्रयास किए जा रहे हैं।
कानपुर के कई वीआईपी पुल बना चुकी है आरोपी कंपनी, गुणवत्ता पर उठे सवाल
इस हादसे ने ‘दि शेल्टर’ कंपनी के पुराने ट्रैक रिकॉर्ड और उसकी निर्माण गुणवत्ता को भी कटघरे में खड़ा कर दिया है। बताया जा रहा है कि यह कंपनी उत्तर प्रदेश के कई महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स पर काम कर चुकी है। इसने कानपुर के कैंट इलाके में स्थित प्रसिद्ध जयपुरिया पुल, पनकी धाम पुल और पनकी पावर प्लांट क्षेत्र के महत्वपूर्ण पुलों का निर्माण भी किया है। हमीरपुर में महज एक आंधी के झोंके से निर्माणाधीन पुल का स्लैब ताश के पत्तों की तरह ढह जाने के बाद, कानपुर में इस कंपनी द्वारा बनाए गए अन्य पुलों की मजबूती और सुरक्षा को लेकर भी जनता और विशेषज्ञों के बीच गंभीर संशय पैदा हो गया है। लोग अब इस पूरे प्रोजेक्ट में बड़े भ्रष्टाचार की आशंका जता रहे हैं।
मलबे में दबने से इन 6 बेगुनाह श्रमिकों ने गंवाई अपनी जान
यह हृदय विदारक हादसा शुक्रवार तड़के करीब तीन बजे के आस-पास हुआ, जब सभी मजदूर साइट पर ही सो रहे थे या काम में व्यस्त थे। अचानक तेज आंधी आई और निर्माणाधीन पुल का एक बड़ा हिस्सा ढह गया। इस दर्दनाक हादसे में जान गंवाने वाले छह मृतकों की शिनाख्त हो चुकी है, जिनकी पहचान लोकेन्द्र (22 वर्ष), कुलदीप निषाद (19 वर्ष), सावंत यादव (28 वर्ष), सभाजीत (30 वर्ष), पुष्पेंद्र चौहान (34 वर्ष) और राजेश पाल (42 वर्ष) के रूप में हुई है। इस हादसे में तीन अन्य श्रमिक अवधेश निषाद, कल्लू यादव और राजेश निषाद गंभीर रूप से घायल हुए हैं, जिन्हें स्थानीय प्रशासन और पुलिस ने मलबे से निकालकर तुरंत जिला अस्पताल में भर्ती कराया है, जहां उनका इलाज जारी है।
सीएम योगी आदित्यनाथ ने जताया दुख, आश्रितों को 5-5 लाख के मुआवजे का ऐलान
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हमीरपुर में हुई इस दर्दनाक दुर्घटना पर गहरा शोक प्रकट किया है। उन्होंने इस घटना को अत्यंत दुःखद एवं हृदय विदारक बताते हुए दिवंगत आत्माओं की शांति की कामना की है। मुख्यमंत्री ने पीड़ित परिवारों को ढांढस बंधाते हुए मृतकों के आश्रितों को 5-5 लाख रुपये और हादसे में घायल हुए प्रत्येक श्रमिक को 50-50 हजार रुपये की तत्काल आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने के कड़े निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही सीएम ने जिला प्रशासन को निर्देश दिया है कि घायलों के समुचित और उच्च स्तरीय इलाज की मुफ्त व्यवस्था की जाए।
आंधी-तूफान से मची तबाही को लेकर यूपी के सभी जिलाधिकारियों को विशेष निर्देश
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश के कई अन्य जिलों में भी गुरुवार और शुक्रवार को आए तेज आंधी-तूफान, मूसलाधार बारिश और आकाशीय बिजली (Lightning) के कारण हुई भारी तबाही का तत्काल संज्ञान लिया है। उन्होंने राज्य के सभी जिलाधिकारियों (DMs) को अपने-अपने क्षेत्रों में राहत और बचाव कार्य युद्धस्तर पर तेज करने के निर्देश दिए हैं। सीएम ने कहा कि फसलों और मकानों को हुए नुकसान का तुरंत सटीक आकलन किया जाए और प्रभावित लोगों या मृतकों के परिवारों को सरकारी राहत राशि बिना किसी देरी के जल्द से जल्द जारी की जाए। हमीरपुर हादसे की खबर मिलते ही मुख्यमंत्री ने खुद कमान संभाली थी और एसडीआरएफ (SDRF) तथा स्थानीय प्रशासन को मौके पर भेजकर रेस्क्यू ऑपरेशन को तेज करवाया था।
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