यूपी में मौसम ने ली करवट,आंधी-बारिश और ओलावृष्टि के अलर्ट से गर्मी से मिली बड़ी राहत

उत्तर प्रदेश के कई जिलों में पिछले कुछ दिनों से रिकॉर्ड तोड़ भीषण गर्मी और जानलेवा लू (Heatwave) का प्रकोप झेल रहे लोगों के लिए राहत भरी खबर आई है। उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में अचानक मौसम का मिजाज पूरी तरह बदल गया है। गुरुवार रात से ही राज्य के विभिन्न इलाकों में धूल भरी तेज हवाएं और आंधी चलने के साथ आसमान में बादलों की आवाजाही शुरू हो गई है, जिससे तापमान में भारी गिरावट दर्ज की गई है। मौसम विभाग (IMD) की मानें तो यह राहत अभी जारी रहने वाली है। मौसम वैज्ञानिकों ने अगले दो दिनों के लिए राज्य के कई हिस्सों में तेज आंधी-तूफान, मूसलाधार बारिश और कुछ विशिष्ट इलाकों में भारी ओलावृष्टि (Hailstorm) की चेतावनी जारी की है। इस बदलते मौसम से जहां आम जनता ने चैन की सांस ली है, वहीं किसानों को फसलों की सुरक्षा के प्रति सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

प्रॉपर्टी खरीदारों को बड़ा झटका: लखनऊ के ग्रामीण इलाकों में सर्किल रेट दोगुना से ज्यादा बढ़े

एक तरफ जहां मौसम के बदलने से लोगों को सुकून मिला है, वहीं दूसरी तरफ राजधानी लखनऊ में प्रॉपर्टी या जमीन खरीदने का सपना देख रहे लोगों को तगड़ा झटका लगा है। लखनऊ के ग्रामीण क्षेत्रों में अब कृषि योग्य जमीन (Agricultural Land) खरीदना काफी ज्यादा महंगा हो गया है। जिला प्रशासन ने एक बड़ा फैसला लेते हुए शुक्रवार को लखनऊ के ग्रामीण अंचलों के सर्किल रेट (Circle Rates) में सीधे दोगुना से भी ज्यादा की ऐतिहासिक बढ़ोतरी कर दी है। प्रशासन द्वारा जारी की गई यह संशोधित और बढ़ी हुई दरें आगामी 4 जून 2026 से पूरे जिले में अनिवार्य रूप से लागू हो जाएंगी।

जानिए किन इलाकों पर पड़ेगा असर और क्यों बढ़ाई गईं दरें

प्रशासन के इस फैसले का सीधा असर लखनऊ के बाहरी और ग्रामीण इलाकों जैसे मोहनलालगंज, मलिहाबाद, बख्शी का तालाब (बीकेटी) और सदर तहसील के अंतर्गत आने वाले ग्रामीण क्षेत्रों पर पड़ेगा। पिछले कुछ समय में इन इलाकों में बड़े पैमाने पर हुए इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट, आउटर रिंग रोड और नए हाईवे के निर्माण के चलते जमीनों की खरीद-फरोख्त काफी तेजी से बढ़ी है। इसी के मद्देनजर बाजार दर और सरकारी दर के अंतर को पाटने के लिए जिला प्रशासन ने सर्किल रेट में यह बंपर बढ़ोतरी की है। 4 जून के बाद से इन इलाकों में जमीन की रजिस्ट्री कराने के लिए उपभोक्ताओं को स्टांप ड्यूटी (Stamp Duty) के रूप में पहले के मुकाबले दोगुनी से ज्यादा रकम चुकानी होगी, जिससे बजट बढ़ना तय है।