यूपी के 3 करोड़ बिजली उपभोक्ताओं को बड़ा झटका, जून से 10% महंगा होगा बिजली का बिल

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ईरान और इजराइल के बीच जारी तनाव का असर अब सीधे आम जनता के घरों तक पहुंच गया है। पेट्रोल और डीजल की आसमान छूती कीमतों के बाद, अब महंगाई की मार बिजली पर भी पड़ चुकी है। उत्तर प्रदेश के तीन करोड़ से ज्यादा बिजली उपभोक्ताओं के लिए एक बेहद बुरी खबर सामने आई है। प्रदेश में बिजली महंगी करने की पूरी तैयारी हो चुकी है, जिससे आम जनता की जेब पर बोझ बढ़ना तय है। उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (UPPCL) ने बिजली के बिलों में 10 प्रतिशत एक्स्ट्रा चार्ज लगाने का एक बड़ा और चौंकाने वाला फैसला किया है। राहत की बात सिर्फ इतनी है कि यह बढ़ी हुई दरें हमेशा के लिए नहीं, बल्कि जून महीने में आने वाले बिजली बिल में जुड़कर आएंगी। यानी सीधे शब्दों में कहें तो अगर आपका सामान्य बिजली बिल 100 रुपये आता था, तो अब आपको इसके लिए 110 रुपये का भुगतान करना होगा।

जानिए क्यों लगाया जा रहा है यह 10% अतिरिक्त फ्यूल सरचार्ज

यूपी पावर कॉरपोरेशन के इस औचक फैसले से प्रदेश के करोड़ों उपभोक्ताओं के मासिक बजट पर खासा असर पड़ने वाला है। इस बढ़े हुए चार्ज के दायरे में सिर्फ घरेलू उपभोक्ता ही नहीं, बल्कि व्यावसायिक (Commercial) और अन्य सभी श्रेणियों के उपभोक्ता भी शामिल किए गए हैं। बिजली विभाग के अधिकारियों का तर्क है कि वैश्विक हालातों के चलते बिजली उत्पादन की लागत में अप्रत्याशित बढ़ोतरी हुई है। बिजली उत्पादन और बाहरी स्रोतों से बिजली खरीद (Power Purchase) में आने वाली अतिरिक्त लागत की भरपाई करने के लिए ही इस ‘फ्यूल सरचार्ज’ (Fuel Surcharge) को लागू किया जा रहा है, जिसे जून के बिजली बिलों में एक्स्ट्रा चार्ज के रूप में वसूला जाएगा।

अब जनता के पैसों से जनता के खिलाफ ही मुकदमा नहीं लड़ पाएगा पावर कॉरपोरेशन

इस बड़ी महंगाई के बीच उपभोक्ताओं के हक में एक बहुत बड़ी और राहत भरी खबर भी सामने आई है। अब पावर कॉरपोरेशन जनता के गाढ़े खून-पसीने की कमाई का पैसा जनता के ही खिलाफ अदालती मुकदमों में पानी की तरह नहीं बहा सकेगा। अब तक कॉरपोरेशन मुकदमों में होने वाले भारी-भरकम खर्च को अपने कुल घाटे और खर्चों में दिखा देता था, और फिर इसकी आड़ में विद्युत नियामक आयोग के सामने बिजली दरों को बढ़ाने का प्रस्ताव रख देता था। लेकिन अब व्यवस्था बदलने जा रही है। कॉरपोरेशन को अब भविष्य में होने वाले तमाम मुकदमों का खर्च अपने खुद के लाभ (Profit) में से उठाना होगा। राज्य विद्युत नियामक आयोग (UPERC) अपने नए टैरिफ आदेश में इसकी पुख्ता व्यवस्था करने जा रहा है।

46 करोड़ रुपये मुकदमों में फूंक कर जनता को दिखाया घाटा, 6 साल से नहीं बढ़ी दरें

हैरान करने वाली बात यह है कि पावर कॉरपोरेशन और नोएडा पावर कंपनी लिमिटेड (NPCL) ने मिलकर अब तक कुल 46 करोड़ रुपये सिर्फ अदालती मुकदमों पर खर्च कर दिए हैं। इस मोटी रकम का बोझ जनता पर डालने के मकसद से इसे कंपनियों के खातों में ‘घाटे’ के मद में जोड़ दिया गया था। आपको बता दें कि उत्तर प्रदेश में पिछले छह साल से बिजली की मूल दरों में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है। फिलहाल नोएडा पावर कंपनी का लाइसेंस सरेंडर करने के मामले में भी कोर्ट में मुकदमा चल रहा है, जिसमें पावर कॉरपोरेशन और एनपीसीएल दोनों ही वादी बने हुए हैं। इसके अलावा कई ऐसे मामले भी हैं, जिनमें उपभोक्ता अदालतों या फोरम से केस जीत चुके हैं, लेकिन बिजली कंपनियां उनके अधिकार के खिलाफ ऊपरी अदालतों में मुकदमे लड़ रही हैं।

मुकदमों पर खर्च हुए 21 करोड़, नियामक आयोग ने बिजली कंपनियों की मांग को नकारा

अगर सिर्फ बीते एक साल के आंकड़ों पर नजर डालें, तो अकेले पावर कॉरपोरेशन ने मुकदमों पर 21 करोड़ रुपये और एनपीसीएल ने 25 करोड़ रुपये उड़ा दिए हैं। यह पूरी रकम उन उपभोक्ताओं से बिजली बिल के रूप में ली गई थी, जो ईमानदारी से अपना बिल भरते हैं। इस बार जब बिजली की नई दरों (New Tariff Rates) को लेकर बैठक में चर्चा हो रही थी, तब मुकदमों के इस खर्च को घाटा दिखाने पर पुरजोर आपत्ति दर्ज की गई। समीक्षा में साफ कहा गया कि बिजली कंपनियां जनता के खिलाफ ही केस लड़कर उसे घाटा बताती हैं और फिर बिजली महंगी करने का प्रस्ताव लाती हैं, जो कि पूरी तरह गलत है। सूत्रों के मुताबिक, नियामक आयोग ने सख्त रुख अपनाते हुए साफ कर दिया है कि मुकदमों के खर्च के एवज में बिजली की दरें बढ़ाने की मांग किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं की जाएगी। मुकदमा लड़ना कॉरपोरेशन का अपना फैसला है, इसलिए इसका खर्च वह अपने स्वयं के आंतरिक स्रोतों से ही वहन करे।