नवादा में गजराज का तांडव, कौआकोल में हाथी ने मजदूर को कुचला

बिहार के नवादा जिले में जंगली हाथियों का आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा है। कौआकोल प्रखंड में एक बार फिर हाथियों ने अपना रौद्र रूप दिखाते हुए एक मजदूर को कुचलकर मौत के घाट उतार दिया। इस दर्दनाक घटना के बाद पूरे इलाके में दहशत का माहौल है और वन विभाग के खिलाफ लोगों का गुस्सा फूट पड़ा है। पिछले दो महीनों के भीतर हाथियों के हमले में जान गंवाने वालों की संख्या अब चार हो गई है, जिससे प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

आक्रोशित ग्रामीणों ने किया सड़क जाम, प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी

मजदूर की मौत की खबर फैलते ही ग्रामीण उग्र हो गए। गुस्साए लोगों ने सड़क जाम कर वन विभाग और जिला प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। ग्रामीणों का आरोप है कि हाथियों के लगातार हमले के बावजूद प्रशासन कोई ठोस कदम नहीं उठा रहा है। मंगलवार को हाथियों के नए सिरे से तांडव के कारण लोग इतने डरे हुए हैं कि कई परिवारों ने अपना घर छोड़ दिया है और शरण लेने के लिए सेखोदेवरा गांव की ओर पलायन कर गए हैं।

आधी रात को मचाया उत्पात, घर को किया तहस-नहस

सोमवार की रात हाथियों का झुंड सेखोदेवरा पंचायत के बंगवाटांड़ गांव में घुसा। यहां हाथियों ने पारो देवी (पति स्व. विदेशी भुइयां) के करकटनुमा घर को पूरी तरह से तहस-नहस कर दिया। गनीमत यह रही कि घटना के समय परिवार के सदस्य घर के बाहर बैठे हुए थे, जिससे एक बड़ी जनहानि टल गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, दो हाथियों ने गांव में घुसकर काफी देर तक कोहराम मचाया, जिससे ग्रामीण पूरी रात जागकर गुजारने को मजबूर हुए।

वन विभाग की टीम और ग्रामीण मोर्चे पर तैनात

घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम बंगवाटांड़ पहुंची और हाथियों को जंगल की ओर खदेड़ने की प्रक्रिया शुरू की। विभाग की मदद के लिए ग्रामीण भी ढोल-नगाड़े और आग की लुकाठी (मशाल) लेकर मैदान में उतर आए हैं। फिलहाल, अधिकारियों ने लोगों को जंगल में जाने से सख्ती से मना किया है और रात के समय सतर्क रहने की हिदायत दी है।

पांचवीं बार हाथियों का हमला, कृषि क्षेत्र को भारी नुकसान

कौआकोल प्रखंड में हाथियों के पहुंचने की यह इस सीजन की पांचवीं घटना है। इससे पहले भी जंगली हाथियों ने स्थानीय कृषि विज्ञान केंद्र की बाउंड्री वॉल तोड़ने के साथ-साथ दर्जनों किसानों की फसल को बर्बाद कर दिया था। बार-बार हो रहे इन हमलों ने न केवल जान-माल का नुकसान किया है, बल्कि किसानों की साल भर की मेहनत पर भी पानी फेर दिया है।