भोजपुरी फिल्मों के ये 5 अतरंगी नाम सुनकर पकड़ लेंगे माथा, हिंदी मतलब जानकर हंसी रोकना हो जाएगा मुश्किल

मनोरंजन डेस्क: भोजपुरी सिनेमा अपनी अनूठी शैली, दमदार डायलॉग्स और देसी तड़के के लिए दुनियाभर में मशहूर है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस इंडस्ट्री की कुछ फिल्मों के नाम इतने फनी और अतरंगी होते हैं कि उन्हें सुनते ही कोई भी अपनी हंसी नहीं रोक पाएगा? सोशल मीडिया पर अक्सर इन फिल्मों के टाइटल चर्चा का विषय बने रहते हैं। आज हम आपको भोजपुरी सिनेमा की ऐसी ही 5 चुनिंदा फिल्मों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिनके नाम और उनके हिंदी अर्थ जानकर आप भी कहेंगे— ‘भाई, ये क्या सोचकर रखा है!’

मिल्की व्हाइट मेहरारू की अनोखी डिमांड

इस लिस्ट में सबसे ऊपर जो नाम आता है, वह है ‘मेहरारू चाही मिल्की व्हाइट’। सुनने में यह नाम जितना मजाकिया लगता है, इसका मतलब भी उतना ही सीधा है। हिंदी में इसका अर्थ है ‘पत्नी चाहिए गोरी-गोरी’। इस टाइटल ने रिलीज के वक्त काफी सुर्खियां बटोरी थीं और आज भी लोग इसे सुनकर ठहाके लगाते हैं।

कुटिया में सैयां और गमछे वाला हीरो

फिल्मों के नामों में देसी जीवन की झलक दिखाने के चक्कर में कई बार शीर्षक बेहद दिलचस्प हो जाते हैं। ऐसी ही एक फिल्म है ‘सैयां के साथ मड़इया में’, जिसका सीधा सा हिंदी अनुवाद है ‘पति के साथ कुटिया में’। वहीं, एक और फिल्म ‘हीरो गमछा वाला’ ने भी लोगों का ध्यान खींचा। इसका मतलब है कि हमारा हीरो कोई सूट-बूट वाला नहीं, बल्कि ‘गमछा (तौलिया) रखने वाला देसी हीरो’ है।

पत्नी बिना रातें और ‘पीकर लेटने’ का स्वैग

भोजपुरी सिनेमा में भावनाओं को व्यक्त करने का अंदाज भी काफी अलग है। एक फिल्म का नाम है ‘मेहरारू बिना रतिया कइसे कटी’, जिसका अर्थ है ‘पत्नी के बिना रातें कैसे कटेंगी’। इसी तरह एक और मजेदार टाइटल है ‘पी के पटाईल बा’। अगर आप इसका हिंदी मतलब ढूंढेंगे तो हंसी नहीं रोक पाएंगे, क्योंकि इसका अर्थ होता है ‘पीकर लेटा हुआ’।

फैंस के बीच बना रहता है इन अतरंगी नामों का क्रेज

भोजपुरी फिल्मों के निर्माता अक्सर ऐसे टाइटल चुनते हैं जो आम जनता से सीधे जुड़ सकें और सुनने में थोड़े मसालेदार लगें। यही वजह है कि इन फिल्मों के पोस्टर्स और नाम इंटरनेट पर अक्सर वायरल होते रहते हैं। हालांकि ये नाम सुनने में अजीब लग सकते हैं, लेकिन ये भोजपुरी सिनेमा की उसी सादगी और मनोरंजन का हिस्सा हैं जिसे करोड़ों लोग पसंद करते हैं।