
वित्तीय वर्ष (Financial Year) खत्म होने के बाद इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। टैक्सपेयर्स के बीच जल्दी रिफंड पाने की होड़ मची रहती है, जिसके चक्कर में कई लोग शुरुआती दिनों में ही अपना रिटर्न फाइल कर देते हैं या उसकी तैयारी में जुट जाते हैं। लेकिन अगर आप भी इस महीने (31 मई से पहले) ITR फाइल करने की सोच रहे हैं, तो जरा ठहरिए!
देश के जाने-माने चार्टर्ड एकाउंटेंट्स (CAs) ने टैक्सपेयर्स को 31 मई से पहले ITR फाइल न करने की सलाह दी है। आइए एक्सपर्ट्स से ही समझते हैं कि आखिर इतनी जल्दी रिटर्न भरने से क्यों मना किया जा रहा है और इसके पीछे क्या तकनीकी व व्यावहारिक कारण हैं।
क्यों जरूरी है 31 मई तक का इंतजार? (Why waiting is essential?)
जल्दबाजी में ITR भरना बाद में आपके लिए बड़ी परेशानी का सबब बन सकता है। इसके पीछे मुख्य कारण टैक्स से जुड़े अहम दस्तावेजों का पूरी तरह अपडेट न होना है।
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TDS फाइलिंग की आखिरी तारीख: सीए संतोष मिश्रा के अनुसार, ITR फाइल करने के लिए सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेजों में Form 16, AIS (Annual Information Statement) और Form 26AS शामिल होते हैं। नियोक्ताओं (Companies) और बैंकों के लिए टीडीएस (TDS) रिटर्न फाइल करने की आखिरी तारीख 31 मई होती है।
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दस्तावेजों का अपडेट होना: कंपनियों को टीडीएस फाइल करने के बाद फॉर्म 16 जारी करने के लिए 15 दिनों का अतिरिक्त समय मिलता है। हालांकि, 31 मई के बाद ही ये सभी जानकारियां आपके ‘पैन’ (PAN) कार्ड से लिंक होकर आपके इनकम टैक्स अकाउंट में पूरी तरह दिखनी शुरू होती हैं। 31 मई के बाद ही आपका AIS, TIS और Form 26AS पूरी तरह से सिंक और अपडेट होता है।
31 मई से पहले ITR फाइल करने के नुकसान (Risks of Early Filing)
सीए अजय बगड़िया का कहना है कि अगर आप इन सभी दस्तावेजों के पूरी तरह अपडेट होने से पहले ही अपना रिटर्न दाखिल कर देते हैं, तो विभाग के आंकड़ों और आपके दावों में अंतर (Mismatch) आ सकता है:
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इनकम टैक्स का नोटिस: यदि आपके द्वारा घोषित आय और विभाग के पास दर्ज रिकॉर्ड में कोई भी अंतर पाया जाता है, तो आपको आयकर विभाग की तरफ से नोटिस आ सकता है।
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रिवाइज्ड रिटर्न का झंझट: गलती सुधारने के लिए आपको दोबारा रिवाइज्ड रिटर्न (Revised ITR) फाइल करना पड़ेगा, जिससे आपका समय और खर्च दोनों बढ़ेंगे।
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रिफंड में देरी या कम रिफंड: चूंकि शुरुआती दिनों में आपका पूरा टीडीएस (TDS) डेटा अपडेट नहीं होता, इसलिए जल्दबाजी में रिटर्न भरने से आपका रिफंड अटक सकता है या आपको कम रिफंड मिल सकता है। कई बार तो बिना वजह अतिरिक्त टैक्स देनदारी भी निकल आती है।
जल्दबाजी में टैक्सपेयर्स अक्सर करते हैं ये गलतियां
सीए अभिनंदन पांडेय ने बताया कि कई टैक्सपेयर्स केवल अपनी मुख्य सैलरी (सैलरी स्लिप) के आधार पर ही फटाफट ITR भर देते हैं। वे अन्य स्रोतों से होने वाली आय को नजरअंदाज कर देते हैं, जैसे:
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बचत खाते (Savings Account) पर मिलने वाला बैंक ब्याज।
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फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) से होने वाली कमाई।
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शेयर बाजार (Share Market) या म्यूचुअल फंड से मिला मुनाफा या डिविडेंड।
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अन्य कोई गुप्त या छोटा निवेश।
ये सभी जानकारियां 31 मई के बाद आपके AIS (Annual Information Statement) में ऑटोमैटिकली दिखने लगती हैं। यदि आयकर विभाग के रिकॉर्ड में ये कमाई मौजूद है और आपने इसे अपने रिटर्न में नहीं दिखाया, तो इसे टैक्स चोरी या जानकारी छिपाना माना जाता है, जिसके बाद विभाग की ओर से कार्रवाई की जा सकती है।
सलाह: सुरक्षित और सटीक टैक्स फाइलिंग के लिए 31 मई तक का इंतजार करें, अपने AIS और 26AS को फॉर्म 16 से क्रॉस-चेक करें और उसके बाद ही अपना ITR दाखिल करें।
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