
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के मलिहाबाद में एक धार्मिक स्थल को लेकर नया विवाद गरमा गया है. पासी समाज ने ऐतिहासिक दावा ठोंकते हुए कहा है कि मलिहाबाद स्थित वर्तमान मस्जिद का स्थल प्राचीन काल में उनके पूर्वज ‘महाराजा कंसा पासी’ के भव्य किले का हिस्सा था. समाज का कहना है कि यह पूरी जगह उनकी गहरी आस्था, गौरवशाली इतिहास और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ी हुई है, जहां सदियों पहले उनके पूर्वजों द्वारा पारंपरिक पूजा-अर्चना की जाती थी. इस मुद्दे को लेकर पासी समाज के युवा नेता और लाखन आर्मी के चीफ सूरज पासी ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को एक आधिकारिक पत्र भेजा है, जिसमें इस स्थल की ऐतिहासिक जांच कराने और इसके पुनर्जीवन की मांग उठाई गई है.
सीएम योगी को लिखा पत्र: एएसआई सर्वे और पुराने राजस्व अभिलेखों की जांच की मांग
लाखन आर्मी के मुखिया सूरज पासी ने मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में स्थानीय बुजुर्गों और जनश्रुतियों का हवाला दिया है. उन्होंने कहा कि स्थानीय लोगों के अनुसार, यह स्थान वर्षों पहले एक प्राचीन किले और एक बड़े धार्मिक स्थल के रूप में विख्यात था. समाज ने राज्य प्रशासन और सरकार से मांग की है कि इस विवादित स्थल का भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा वैज्ञानिक सर्वे कराया जाए और साथ ही पुराने सरकारी राजस्व अभिलेखों (Land Revenue Records) की गहनता से जांच की जाए, ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके. मलिहाबाद का यह विवाद अब केवल एक जमीन या धार्मिक स्थल तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसके जरिए पासी समाज के भीतर एक नई सामाजिक और राजनीतिक चेतना भी उभर कर सामने आ रही है.
कौन हैं आंदोलन की अगुवाई कर रहे लाखन आर्मी के चीफ सूरज पासी?
इस पूरे आंदोलन की कमान संभालने वाले सूरज पासी खुद को केवल एक सामाजिक कार्यकर्ता नहीं, बल्कि नई पीढ़ी की सामाजिक चेतना का डिजिटल चेहरा मानते हैं.
साधारण पृष्ठभूमि और संघर्ष: सूरज पासी का जन्म साल 1998 में लखनऊ के बख्शी का तालाब (BKT) क्षेत्र के भोलापुर गांव में एक बेहद साधारण परिवार में हुआ था. महज 17 साल की उम्र में पिता के आकस्मिक निधन के बाद परिवार की पूरी जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई.
इतिहास की खोज: आर्थिक तंगहाली और संघर्षों के बीच सूरज ने अपने समाज के इतिहास को पढ़ना और खंगालना शुरू किया. उन्होंने पाया कि पासी राजवंशों का अतीत बेहद गौरवशाली रहा है और कई क्षेत्रों पर उनके पूर्वजों का शासन था, जो समय के साथ सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़ते चले गए.
‘Gen Z’ युवाओं का संगठन ‘लाखन आर्मी’ और इसकी अनोखी शर्त
अपने समाज को एकजुट करने और युवाओं को नई दिशा देने के लिए सूरज पासी ने 27 फरवरी 2023 को ‘लाखन एकता मिशन’ की शुरुआत की, जिसे आज जमीन पर ‘लाखन आर्मी’ के नाम से जाना जाता है. यह मुख्य रूप से ‘Gen Z’ यानी आज के आधुनिक युवाओं का एक बड़ा सामाजिक संगठन है. इस संगठन का उद्देश्य केवल जातीय एकजुटता दिखाना नहीं, बल्कि समाज के भीतर आत्मगौरव, उच्च शिक्षा, आर्थिक मजबूती और सामाजिक सुधारों को लागू करना है. इस संगठन की सबसे बड़ी यूएसपी (USP) इसकी नशा मुक्ति मुहिम है. लाखन आर्मी से जुड़ने की पहली और अनिवार्य शर्त ही ‘पूर्ण नशा मुक्त’ होना है. यह संगठन युवाओं को शराब, ड्रग्स और हर तरह के अपराध से दूर रहने की कड़ी शपथ दिलाता है.
यूपी, बिहार से लेकर उत्तराखंड तक फैल रहा है डिजिटल नेटवर्क
बहुत ही कम समय में लाखन आर्मी सोशल मीडिया और जमीनी स्तर पर युवाओं के बीच तेजी से लोकप्रिय हुई है. फिलहाल इसका सबसे ज्यादा प्रभाव उत्तर प्रदेश में देखा जा रहा है, जहां करीब 30 जिलों में इसका एक सक्रिय और मजबूत नेटवर्क तैयार हो चुका है. हरदोई, उन्नाव, लखीमपुर खीरी, सीतापुर, गोरखपुर, आजमगढ़, शाहजहांपुर और पीलीभीत जैसे जिलों में संगठन का तेजी से विस्तार हो रहा है. उत्तर प्रदेश के अलावा पड़ोसी राज्यों जैसे बिहार और उत्तराखंड में भी लाखन आर्मी अपनी मौजूदगी दर्ज करा रही है. यह संगठन खुद को केवल पासी समाज तक सीमित न रखकर आदिवासी और अन्य पिछड़ी जनजातीय समुदायों के अधिकारों, उनकी शिक्षा और उन्हें मुख्यधारा से जोड़ने के लिए भी लगातार अभियान चला रहा है.
यूपी की सियासत का बड़ा गेमचेंजर: क्यों अहम है पासी समाज?
उत्तर प्रदेश की चुनावी राजनीति में पासी समाज को एक बहुत बड़ा और निर्णायक चुनावी फैक्टर माना जाता है. आंकड़ों के लिहाज से देखें तो राज्य में कुल दलित (SC) आबादी करीब 21 फीसदी है. उत्तर प्रदेश के दलित समाज में जाटव समुदाय के बाद पासी समाज दूसरी सबसे बड़ी आबादी है. अनुमान के मुताबिक, कुल दलित आबादी में पासी समाज की हिस्सेदारी लगभग 16 फीसदी है, जो उत्तर प्रदेश की कुल आबादी का करीब 3 से 4 प्रतिशत हिस्सा बनाती है. अवध और पूर्वांचल के कई वीवीआईपी जिलों जैसे अयोध्या, रायबरेली, मिर्जापुर, महाराजगंज, गोरखपुर, हरदोई, भदोही, गोंडा और प्रतापगढ़ में पासी वोटर्स की तादाद इतनी अच्छी है कि ये किसी भी राजनीतिक दल के चुनावी नतीजों को पलटने का माद्दा रखते हैं.
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