मां के कैंसर के लक्षणों को न समझ पाने का राजीव खंडेलवाल को आज भी है मलाल

मुंबई। टीवी और बॉलीवुड के मशहूर अभिनेता राजीव खंडेलवाल अपनी संजीदा अदाकारी और साफगोई के लिए जाने जाते हैं। लेकिन हाल ही में एक इंटरव्यू के दौरान राजीव का एक ऐसा दर्द छलक उठा, जिसने उनके प्रशंसकों को भी भावुक कर दिया। राजीव ने अपनी मां को खोने के गम और उस दौरान हुई एक बड़ी चूक के बारे में खुलकर बात की। उन्होंने बताया कि कैसे वह अपनी मां के कैंसर के शुरुआती लक्षणों को समय रहते नहीं पहचान पाए, जिसका पछतावा उन्हें आज भी है।

लक्षणों को पहचानने में हुई देरी

राजीव खंडेलवाल ने साझा किया कि जब उनकी मां की तबीयत बिगड़ने लगी थी, तब उन्हें अंदाजा भी नहीं था कि यह कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी हो सकती है। उन्होंने बताया, “शुरुआत में हमें लगा कि यह उम्र से संबंधित सामान्य समस्याएं हैं। मां ने कभी अपनी तकलीफ को चेहरे पर नहीं आने दिया।” राजीव के मुताबिक, जब तक बीमारी का सही पता चला, तब तक काफी समय बीत चुका था। उनका मानना है कि अगर वह और उनका परिवार उन संकेतों को पहले समझ लेते, तो शायद आज स्थिति कुछ और होती।

‘अज्ञानता के कारण खोया कीमती वक्त’

अभिनेता ने अपनी आपबीती सुनाते हुए कहा कि कई बार हम अपने माता-पिता की छोटी-छोटी शिकायतों को नजरअंदाज कर देते हैं। उन्होंने कहा, “कैंसर एक ऐसी बीमारी है जो दबे पांव आती है। मुझे इस बात का बेहद मलाल है कि एक जागरूक इंसान होने के बावजूद मैं उन लक्षणों को डिकोड नहीं कर सका।” राजीव ने बताया कि मां के जाने के बाद उन्हें यह अहसास हुआ कि स्वास्थ्य के प्रति लापरवाही कितनी भारी पड़ सकती है।

फैंस और लोगों के लिए खास संदेश

अपने इस व्यक्तिगत दर्द को साझा करने के पीछे राजीव का उद्देश्य दूसरों को जागरूक करना है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे अपने घर के बड़ों की सेहत पर बारीकी से नजर रखें। अगर उन्हें भूख न लगना, लगातार थकान या शरीर में किसी भी तरह का असामान्य बदलाव दिखे, तो उसे मामूली समझकर टालें नहीं। समय पर जांच ही कैंसर जैसी बीमारी से लड़ने का सबसे प्रभावी तरीका है।

काम और निजी जिंदगी का संतुलन

राजीव खंडेलवाल हमेशा से ही अपने परिवार के काफी करीब रहे हैं। मां के निधन ने उन्हें अंदर से झकझोर दिया था, लेकिन उन्होंने खुद को संभाला और अपने काम के जरिए मां को गौरवान्वित करने की कोशिश की। आज भी जब वह पीछे मुड़कर देखते हैं, तो वह टीस उनके मन में कहीं न कहीं बनी रहती है।