यूपी में नौतपा के बीच मौसम हुआ सुहाना; जून की शुरुआत में ही आंधी-बारिश का दौर, जानें कब तक मिलेगी लू से राहत

उत्तर प्रदेश में अमूमन जून के शुरुआती दिन भीषण गर्मी, चिलचिलाती धूप और जानलेवा लू (Heatwave) के लिए जाने जाते हैं। लेकिन इस बार साल 2026 में मौसम का मिजाज पूरी तरह बदला हुआ नजर आ रहा है। झुलसाने वाली गर्मी के बजाय यूपी के अधिकांश हिस्सों में बादलों की आवाजाही और ठंडी हवाओं ने मौसम को बेहद खुशनुमा बना दिया है।

बंगाल की खाड़ी और अरब सागर से आ रही लगातार नमी के साथ-साथ एक बेहद सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) के चलते प्रदेश के तापमान में भारी गिरावट दर्ज की गई है। आगरा में तो रात के दो बजे से ही शुरू हुई झमाझम बारिश ने सुबह होते-होते मौसम को पूरी तरह ठंडा कर दिया, हालांकि कुछ निचले इलाकों में जलभराव की समस्या भी देखने को मिली।

तापमान सामान्य से 5.4°C नीचे, 5 जून तक राहत के आसार

मौसम विभाग के अनुसार, उत्तर प्रदेश के ऊपर इस समय जो पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय है, उसका असर आने वाली 5 जून तक लगातार बना रह सकता है। इस दौरान धूप और बादलों के बीच आंख-मिचौली का खेल चलता रहेगा और राज्य के अलग-अलग हिस्सों में धूलभरी आंधी के साथ हल्की से मध्यम बारिश होने की पूरी संभावना है। राहत की बात यह है कि इस बदलाव के कारण प्रदेश का औसत अधिकतम तापमान सामान्य से 5.4°C नीचे गिर गया है, जिससे लोगों को इस सीजन की सबसे बड़ी राहत मिली है।

आज यूपी के इन जिलों में बारिश की संभावना

मौसम वैज्ञानिकों ने मंगलवार को उत्तर प्रदेश के कई प्रमुख जिलों के लिए आंधी-बारिश का येलो अलर्ट जारी किया है। प्रभावित क्षेत्रों की सूची को आप नीचे दी गई तालिका से आसानी से समझ सकते हैं:

आखिर क्यों नहीं बढ़ रहा है पारा? समझिए इसके पीछे की वजह

मौसम विशेषज्ञ मोहम्मद दानिश के मुताबिक, इस समय उत्तर प्रदेश में पूरब की तरफ से लगातार नम हवाएं आ रही हैं, जो वायुमंडल में नमी का स्तर बनाए हुए हैं। इसी वजह से तापमान को 40 डिग्री सेल्सियस के पार जाने का मौका नहीं मिल रहा है।

वही, कानपुर मौसम विभाग के विशेषज्ञ डॉ. एसएन सुनील पांडेय ने इसके पीछे की एक और बेहद दिलचस्प भौगोलिक वजह बताई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस समय उत्तर प्रदेश और राजस्थान के ऊपरी वायुमंडल में सब-ट्रॉपिकल वेस्टरली जेट स्ट्रीम (SWJ) बेहद सक्रिय है।

क्या होती है जेट स्ट्रीम और कैसे बदला इसने मौसम?

जेट स्ट्रीम असल में ऊपरी वायुमंडल में बहने वाली तेज हवा की एक धारा है। इन दिनों यह जेट स्ट्रीम कैस्पियन सागर और फारस की खाड़ी (Persian Gulf) के क्षेत्र से भारी मात्रा में नमी खींचकर सीधे उत्तर भारत के मैदानी इलाकों तक ला रही है। जब यह ठंडी और नम हवा नीचे मौजूद गर्म मैदानी क्षेत्रों से टकराती है, तो प्री-मानसून गतिविधियां बहुत ज्यादा तेज हो जाती हैं। यही कारण है कि अचानक आंधी, बिजली कड़कने और ओलावृष्टि जैसी घटनाएं बढ़ गई हैं।

10 जून तक हीटवेव नहीं, लेकिन मानसून की राह में बाधा

मौसम विभाग के ताजा अनुमान के मुताबिक, इस सुहाने बदलाव के कारण 10 जून तक पूरे उत्तर प्रदेश में हीटवेव (लू) चलने की कोई संभावना नहीं है। हालांकि, सिक्के का दूसरा पहलू यह भी है कि यही जेट स्ट्रीम इस समय दक्षिण-पश्चिम मानसून के आगे बढ़ने की राह में सबसे बड़ा रोड़ा बनी हुई है।

पूर्वानुमान के मुताबिक मानसून को 26 मई को ही केरल पहुंच जाना था, लेकिन ऊपरी वायुमंडल में इन तेज हवाओं के अवरोध के कारण अब इसके 3 जून के बाद ही केरल के तट पर पहुंचने की उम्मीद है। जब तक यह जेट स्ट्रीम उत्तर भारत के ऊपर पूरी तरह शांत नहीं होती, तब तक मानसूनी हवाओं की रफ्तार थोड़ी धीमी बनी रह सकती है, लेकिन तब तक यूपी वालों को गर्मी से राहत मिलती रहेगी।