CBSE 12वीं के छात्रों को मिली बड़ी राहत! री-इवैल्युएशन की फीस में की गई भारी कटौती

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने 12वीं कक्षा के लाखों छात्र-छात्राओं और उनके अभिभावकों को एक बहुत बड़ा और ऐतिहासिक तोहफा दिया है। रिजल्ट आने के बाद अक्सर छात्र अपने नंबरों से संतुष्ट नहीं होते हैं और कॉपियों की दोबारा जांच करवाना चाहते हैं, लेकिन भारी-भरकम फीस के डर से वे पीछे हट जाते थे। बोर्ड ने छात्रों की इसी परेशानी को समझते हुए री-इवैल्युएशन (पुनर्मूल्यांकन) की फीस में भारी कटौती करने का एक बेहद सराहनीय निर्णय लिया है। इतना ही नहीं, सीबीएसई ने एक ऐसा क्रांतिकारी नियम भी लागू किया है जिसके तहत यदि स्क्रूटनी के बाद छात्र के नंबर बढ़ते हैं, तो उसकी जमा की गई पूरी फीस बोर्ड द्वारा वापस (रिफंड) कर दी जाएगी।

अभिभावकों के जेब का बोझ होगा कम, बोर्ड का बड़ा फैसला

सीबीएसई के इस नए कदम से उन मध्यमवर्गीय परिवारों को सबसे ज्यादा राहत मिलेगी, जिनके बच्चे एक या एक से अधिक विषयों में री-चेकिंग करवाना चाहते थे। पहले प्रति विषय के हिसाब से लगने वाला भारी शुल्क कई बार छात्रों के आड़े आ जाता था। बोर्ड का मानना है कि इस कटौती के बाद अब कोई भी होनहार छात्र पैसों की तंगी की वजह से अपने हक के नंबरों से वंचित नहीं रहेगा। इस फैसले की घोषणा होते ही सोशल मीडिया से लेकर स्कूल परिसरों तक छात्रों और अभिभावकों के बीच खुशी की लहर दौड़ गई है और वे इसे एक बड़ी राहत मान रहे हैं।

नंबर बढ़े तो पूरी फीस वापस, जानिए क्या है नया नियम

इस पूरे ऐलान में सबसे ज्यादा ध्यान खींचने वाली बात फीस वापसी (Fee Refund) की नीति है। नए नियमों के मुताबिक, अगर कोई छात्र री-इवैल्युएशन के लिए आवेदन करता है और जांच के बाद उसकी उत्तर पुस्तिका में अंकों का इजाफा (नंबर बढ़ते हैं) होता है, तो बोर्ड यह मान लेगा कि कॉपियों के मूल्यांकन में शुरुआती स्तर पर गलती हुई थी। इस स्थिति में छात्र द्वारा री-इवैल्युएशन के लिए चुकाई गई पूरी की पूरी राशि उसके बैंक खाते में सीधे वापस भेज दी जाएगी। हालांकि, यदि नंबरों में कोई बदलाव नहीं होता है या नंबर कम होते हैं, तो फीस वापस नहीं की जाएगी।

पूरी प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी बनाने की कोशिश

विशेषज्ञों का कहना है कि सीबीएसई का यह फैसला न सिर्फ छात्र हित में है, बल्कि यह बोर्ड की मूल्यांकन प्रणाली को और अधिक जवाबदेह और पारदर्शी बनाएगा। फीस रिफंड के डर से अब कॉपियां जांचने वाले शिक्षकों पर भी सही और सटीक मूल्यांकन करने का एक नैतिक दबाव रहेगा, जिससे कॉपियों को चेक करने में होने वाली मानवीय गलतियों में भारी कमी आने की उम्मीद है। बोर्ड ने साफ किया है कि इस बदले हुए नियम और घटी हुई फीस का लाभ इसी सत्र से छात्रों को मिलना शुरू हो जाएगा, जिसके लिए ऑनलाइन पोर्टल पर जरूरी अपडेट्स कर दिए गए हैं।