
पश्चिम बंगाल का सियासी पारा एक बार फिर अपने चरम पर पहुंच गया है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बीच चल रही राजनीतिक लड़ाई अब सड़कों पर उतर आई है। टीएमसी कार्यकर्ताओं और पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी पर हुए हालिया हमलों के विरोध में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कोलकाता में एक बड़े धरने का ऐलान किया था।
हालांकि, कोलकाता पुलिस ने इस प्रदर्शन को हरी झंडी देने से साफ इनकार कर दिया है। इसके बावजूद ममता बनर्जी अपने फैसले पर अडिग हैं और उन्होंने साफ कर दिया है कि वह हर हाल में रानी रासमणि रोड पर धरने पर बैठेंगी।
किन मुद्दों को लेकर आर-पार के मूड में हैं ममता बनर्जी?
ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि बंगाल का पूरा माहौल बदल दिया गया है और आम जनता के साथ-साथ छोटे व्यापारी इस समय डर के साए में जी रहे हैं। उन्होंने इस आंदोलन के लिए कई प्रमुख मुद्दों को आधार बनाया है:
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रेहड़ी-पटरी वालों का मुद्दा: रेलवे द्वारा बिना किसी उचित पुनर्वास योजना (Rehabilitation Scheme) के गरीब दुकानदारों और रेहड़ी-पटरी वालों को हटाया जा रहा है।
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कार्यकर्ताओं पर हमले: विधानसभा चुनावों के बाद से टीएमसी के 12 कार्यकर्ताओं की जान जा चुकी है और हजारों को जेल में डाल दिया गया है।
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NEET परीक्षा में धांधली: राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) में हुई कथित अनियमितताओं और गड़बड़ियों के खिलाफ भी वह आवाज उठाएंगी।
टीएमसी के भीतर का आंतरिक संकट और विधायकों की बगावत
बाहरी राजनीतिक लड़ाई के बीच ममता बनर्जी इस समय अपनी पार्टी के भीतर मचे बड़े घमासान से भी जूझ रही हैं। सोमवार को ममता बनर्जी के आवास पर टीएमसी विधायकों की एक बेहद महत्वपूर्ण बैठक बुलाई गई थी। लेकिन हैरान करने वाली बात यह रही कि पार्टी के कुल 80 विधायकों में से केवल 20 विधायक ही इस बैठक में हिस्सा लेने पहुंचे।
इस कम मौजूदगी ने उन चर्चाओं को हवा दे दी है कि टीएमसी के कई बड़े नेता इस समय पाला बदलने की तैयारी में हैं।
“बिना विचारधारा वाले लोग हमारे लिए शर्तें तय नहीं कर सकते”
ममता बनर्जी ने बीजेपी नेता और बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी का जिक्र करते हुए कहा कि वह उनके परिवार को बहुत लंबे समय से जानती थीं, इसलिए उन्होंने उन्हें राजनीति में आगे बढ़ाया था। उन्होंने एक बड़ा दावा करते हुए कहा कि उनके पास अंदरखाने से एक संदेश भिजवाया गया है। इस संदेश में कहा गया है कि अगर अभिषेक बनर्जी को टीएमसी के नेतृत्व से हटा दिया जाए, तो कुछ बागी नेता दोबारा पार्टी में वापस आ सकते हैं।
ममता बनर्जी की दो टूक सलाह:
“मैं इन लोगों की फितरत को बहुत अच्छी तरह से पहचानती हूं। जिन लोगों की अपनी कोई राजनीतिक विचारधारा या सिद्धांत नहीं होते, वे हमारे सामने किसी भी तरह की शर्तें नहीं रख सकते। जो लोग निजी स्वार्थ और मलाई खाने के लिए सालों तक पद पर रहने के बाद पाला बदल रहे हैं, उनके जाने से मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता। बल्कि अच्छा हुआ कि कचरा साफ हो गया, अब हम नए और वफादार चेहरों के साथ पार्टी का पुनर्गठन करेंगे।”
दलबदलू नेताओं पर तीखा तंज
हाल ही में पार्टी से निकाले गए विधायक रीताब्रता बनर्जी पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि साल 2017 में जब माकपा (CPM) ने उन्हें निकाला था, तब उन्होंने रीताब्रता को अपनी पार्टी में शामिल करके सबसे बड़ी गलती की थी। ममता ने कहा कि वह उनके पास आकर रोए थे और पैरों में गिर गए थे, जिसकी वजह से दूसरों का टिकट काटकर उन्हें मौका दिया गया। लेकिन आज उन्होंने उन मतदाताओं और पार्टी को धोखा दिया जिन्होंने उन्हें चुनकर भेजा था। टीएमसी प्रमुख ने साफ किया कि इस संकट से उबरकर उनकी पार्टी पहले से कहीं ज्यादा मजबूत होकर उभरेगी।
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