
उत्तर प्रदेश के बरेली जिले से सरकारी महकमे में लापरवाही और मनमर्जी का एक बेहद हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां स्कूलों को गाय और बेसहारा मवेशियों के लिए अनिवार्य रूप से चारा इकट्ठा करने का अजीबोगरीब लिखित निर्देश जारी करने वाले नवाबगंज ब्लॉक के खंड शिक्षा अधिकारी (BEO) सत्यदेव पर गाज गिर गई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन और बेसिक शिक्षा विभाग ने शुक्रवार को त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी शिक्षा अधिकारी का तबादला सीधे जिला मुख्यालय कर दिया है। इसके साथ ही बरेली की जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) डॉ. विनीता ने आरोपी अधिकारी को ‘कारण बताओ नोटिस’ (Show Cause Notice) जारी कर सख्त लहजे में स्पष्टीकरण मांगा है। अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि तय समय में संतोषजनक जवाब नहीं मिला, तो उनके खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक और विभागीय कार्रवाई शुरू की जाएगी।
जानिए क्या था पूरा मामला और क्यों जारी हुआ था चारे का ‘तुगलकी फरमान’
दरअसल, इन दिनों बरेली जिले में बेसहारा और आवारा मवेशियों के भरण-पोषण को सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन की तरफ से एक ‘चारा दान अभियान’ चलाया जा रहा है। इसी अभियान के तहत मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी (CVO) ने प्राथमिक शिक्षा विभाग को स्वैच्छिक प्रयासों से कुल 1,500 क्विंटल चारा एकत्र करने का एक सामूहिक लक्ष्य दिया था। इसी क्रम में बीती 20 मई को एक विभागीय पत्र जारी कर नवाबगंज के ब्लॉक शिक्षा अधिकारी सत्यदेव को अपने व्यक्तिगत और सामाजिक प्रयासों से 100 क्विंटल चारा जुटाने की जिम्मेदारी दी गई थी। उन्हें निर्देश था कि वे स्थानीय नागरिकों, किसानों और जागरूक लोगों को इस नेक कार्य में स्वेच्छा से योगदान देने के लिए प्रेरित करें। लेकिन, जनता को प्रेरित करने के बजाय अधिकारी ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए एक लिखित आदेश जारी कर ब्लॉक के सभी स्कूलों को अनिवार्य रूप से 46-46 किलोग्राम चारा विभाग को उपलब्ध कराने का ताकीदी हुक्म सुना दिया।
सोशल मीडिया पर पत्र वायरल होते ही भड़के शिक्षक, शुरू हुआ भारी विरोध
खंड शिक्षा अधिकारी सत्यदेव द्वारा जारी किया गया यह अजीबोगरीब सरकारी पत्र जैसे ही सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर वायरल हुआ, शिक्षा जगत में हड़कंप मच गया। प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों के शिक्षक संघों ने इस आदेश को ‘तुगलकी फरमान’ बताते हुए इसके खिलाफ तुरंत मोर्चा खोल दिया और तीखा विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। शिक्षकों का तर्क था कि उनका काम बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना है, न कि स्कूलों को चारे का गोदाम बनाना या मवेशियों के लिए चारे की व्यवस्था करना। मामला बढ़ता देख और शिक्षक संगठनों के भारी आक्रोश को भांपते हुए उच्च अधिकारियों ने तुरंत दखल दिया और इस पूरे आदेश को खारिज करने की कवायद शुरू की।
बीएसए डॉ. विनीता की सख्त हिदायत: यह नेक कार्य है, कोई अनिवार्य सरकारी आदेश नहीं
पूरे मामले पर उपजे विवाद और शिक्षकों के गुस्से को शांत करने के लिए जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) डॉ. विनीता ने खुद कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने साफ तौर पर स्पष्ट किया कि जिले के सभी 15 ब्लॉक शिक्षा अधिकारियों को यह अच्छी तरह समझा दिया गया था कि इस पूरी पहल को कोई अनिवार्य या दंडात्मक सरकारी आदेश न समझा जाए। यह पूरी कवायद केवल जन कल्याण और बेसहारा पशुओं की सहायता के लिए चलाया जा रहा एक सामाजिक अभियान है, जिसमें लोगों की मर्जी शामिल है। उन्होंने जोर देकर कहा कि प्राथमिक शिक्षा विभाग के शिक्षकों को इस तरह की कोई विशेष या जबरन जिम्मेदारी नहीं सौंपी गई है। बीएसए ने सभी अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे इस प्रयास को सफल बनाने के लिए शिक्षकों को परेशान करने के बजाय सामाजिक कार्यकर्ताओं, स्थानीय युवाओं, जागरूक किसानों, ग्राम प्रधानों और समुदाय के अन्य प्रबुद्ध सदस्यों से स्वैच्छिक सहयोग लें।
आरोपी अधिकारी लाइन हाजिर, विवेक शर्मा को मिला नवाबगंज का अतिरिक्त प्रभार
विवादित पत्र जारी करने वाले खंड शिक्षा अधिकारी सत्यदेव को तत्काल प्रभाव से नवाबगंज ब्लॉक से हटाकर जिला मुख्यालय से संबद्ध (लाइन हाजिर) कर दिया गया है। बीएसए डॉ. विनीता ने बताया कि उनके कृत्य से विभाग की छवि धूमिल हुई है, इसलिए उनसे लिखित स्पष्टीकरण मांगा गया है। इसके साथ ही नवाबगंज ब्लॉक में कामकाज प्रभावित न हो, इसके लिए विभाग ने देर शाम एक वैकल्पिक व्यवस्था भी लागू कर दी है। बीएसए के आदेश के अनुसार, भोजीपुरा ब्लॉक के खंड शिक्षा अधिकारी (BEO) विवेक शर्मा को नवाबगंज ब्लॉक का भी अतिरिक्त कार्यभार सौंप दिया गया है, ताकि क्षेत्र की शैक्षणिक और प्रशासनिक व्यवस्था सुचारू रूप से चलती रहे।
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