8th Pay Commission: रेलवे के ‘टेक्नोक्रेट्स’ की बड़ी मांग, फिटमेंट फैक्टर से लेकर पेंशन तक IRTSA ने रखा भारी-भरकम प्रस्ताव

इंडियन रेलवेज टेक्निकल सुपरवाइजर्स एसोसिएशन (IRTSA) ने 8वें वेतन आयोग (8th CPC) के गठन से पहले केंद्र सरकार को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा है। रेलवे के तकनीकी कर्मचारियों का प्रतिनिधित्व करने वाले इस संगठन ने न केवल वेतन वृद्धि, बल्कि काम की प्रकृति और जोखिम के आधार पर एक अलग सैलरी स्ट्रक्चर की वकालत की है। IRTSA की मांग है कि रेलवे के टेक्नोक्रेट्स को नॉन-टेक्निकल कर्मचारियों से अलग और बेहतर सुविधाएं मिलनी चाहिए।

5 अलग-अलग फिटमेंट फैक्टर का नया फॉर्मूला

IRTSA ने मांग की है कि सभी स्तरों के लिए एक समान फिटमेंट फैक्टर के बजाय, सैलरी लेवल के हिसाब से इसे वर्गीकृत किया जाए। संगठन का मानना है कि उच्च पदों पर जवाबदेही अधिक होती है, इसलिए वहां गुणांक भी अधिक होना चाहिए।

सैलरी लेवल प्रस्तावित फिटमेंट फैक्टर
L-1 से L-5 2.92
L-6 से L-8 3.50 (2.92 × 1.2)
L-9 से L-12 3.80 (2.92 × 1.3)
L-13 से L-16 4.09 (2.92 × 1.4)
L-17 और L-18 4.38 (2.92 × 1.5)

टेक्निकल सुपरवाइजर्स के लिए प्रस्तावित ‘कैडर स्ट्रक्चर’

संगठन ने जूनियर इंजीनियर (JE) से लेकर प्रिंसिपल सीनियर सेक्शन इंजीनियर तक के लिए भारी वेतन वृद्धि का प्रस्ताव दिया है। इसमें मौजूदा वेतन के मुकाबले करीब 3.7 से 4.4 गुना तक की बढ़त का सुझाव है।

  • जूनियर इंजीनियर (JE): लेवल-7 के तहत ₹1,57,400 (मौजूदा ₹35,400 का 4.45 गुना)।

  • सीनियर सेक्शन इंजीनियर (SSE): लेवल-8 के तहत ₹1,66,800 (मौजूदा ₹44,900 का 3.71 गुना)।

  • प्रिंसिपल SSE (सीनियर मैनेजर): लेवल-11 के तहत ₹2,57,000 का शुरुआती वेतन।

भत्ते और महंगाई भत्ते (DA) पर नई सोच

IRTSA ने महंगाई भत्ते की गणना के लिए एक अलग ‘कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स’ (CPI) की मांग की है, जिसमें आधुनिक जरूरतें जैसे इंटरनेट खर्च, बोतलबंद पानी और हेल्थ इंश्योरेंस को भी शामिल किया जाए।

  • HRA: शहरों को 4 श्रेणियों (A, B, C, D) में बांटकर 40% तक हाउस रेंट अलाउंस की मांग की गई है।

  • नाइट ड्यूटी अलाउंस: ₹43,600 की ऊपरी सीमा (Ceiling) हटाने और वास्तविक वेतन पर गणना करने का प्रस्ताव है।

  • चाइल्ड एजुकेशन: पोस्ट-ग्रेजुएशन तक की पढ़ाई के लिए ₹10,000 प्रति माह का भत्ता देने का सुझाव दिया गया है।

करियर प्रोग्रेशन और लीव इनकैशमेंट

कर्मचारियों के मनोबल को बढ़ाने के लिए संगठन ने करियर और छुट्टियों के नियमों में ढील की मांग की है:

  • MACP: 30 साल की सेवा में 4 के बजाय 5 वित्तीय अपग्रेडेशन (हर 6 साल पर)।

  • लीव इनकैशमेंट: रिटायरमेंट के समय छुट्टियों को भुनाने की सीमा 300 से बढ़ाकर 600 दिन की जाए। साथ ही सेवा के दौरान 50% छुट्टियां भुनाने की अनुमति मिले।

रिटायरमेंट बेनिफिट्स: पेंशन और ग्रेच्युटी

IRTSA ने 2004 के बाद भर्ती हुए कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना (OPS) को बहाल करने पर जोर दिया है। इसके अलावा, ग्रेच्युटी की अधिकतम सीमा को ₹20 लाख से बढ़ाकर ₹50 लाख करने का प्रस्ताव दिया गया है। संगठन का यह भी कहना है कि डेथ ग्रेच्युटी की राशि भी ₹50 लाख होनी चाहिए ताकि पीड़ित परिवार को पर्याप्त वित्तीय सुरक्षा मिल सके।

ग्रुप इंश्योरेंस (CGEGIS)

संगठन ने इस बात पर चिंता जताई कि बीमा की दरें 1990 के बाद से नहीं बदली गई हैं। उन्होंने सरकारी खर्च पर ₹50 लाख तक के बीमा कवर और प्रीमियम की दरों को कम करने की मांग रखी है, ताकि जोखिम भरे काम करने वाले रेलवे टेक्नीशियनों को उचित सुरक्षा कवच मिल सके।