News India Live, Digital Desk: कांग्रेस और असम सरकार के बीच चल रही कानूनी और सियासी जंग अब अपने चरम पर पहुंच गई है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पवन खेड़ा को मिली अग्रिम जमानत के खिलाफ असम सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है, जिससे राजनीति गरमा गई है। इस पूरे मामले पर अब लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने मोर्चा संभाल लिया है। राहुल गांधी ने असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा पर सीधा प्रहार करते हुए उन्हें देश का ‘सबसे भ्रष्ट मुख्यमंत्री’ करार दिया है। राहुल गांधी का यह बयान ऐसे समय आया है जब पवन खेड़ा पर लगे आरोपों और असम पुलिस की कार्रवाई ने देशव्यापी ध्यान खींचा है।
राहुल गांधी का ‘X’ पर वार: सत्ता के दुरुपयोग का लगाया आरोप
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ (पूर्व में ट्विटर) पर अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए लिखा कि असम के मुख्यमंत्री अपनी सत्ता का दुरुपयोग कर राजनीतिक विरोधियों को निशाना बना रहे हैं। उन्होंने सख्त लहजे में कहा, “असम के वर्तमान मुख्यमंत्री देश के सबसे भ्रष्ट मुख्यमंत्री हैं और वे कानून की जद से भाग नहीं पाएंगे।” राहुल ने आगे कहा कि अपने आलोचकों को परेशान करना संविधान के खिलाफ है और पूरी कांग्रेस पार्टी मजबूती के साथ पवन खेड़ा के साथ खड़ी है। उन्होंने पारदर्शिता और कानून के शासन को बनाए रखने की वकालत की।
52,000 करोड़ का साम्राज्य और तीन देशों के पासपोर्ट: क्या है पूरा विवाद?
इस पूरे विवाद की जड़ पवन खेड़ा द्वारा 5 अप्रैल को लगाए गए सनसनीखेज आरोप हैं। खेड़ा ने दावा किया था कि मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी रिनिकी भुइयां सरमा के पास संयुक्त अरब अमीरात (UAE), मिस्र और एंटीगुआ के पासपोर्ट हैं। इतना ही नहीं, उन्होंने आरोप लगाया कि इस दंपति का अमेरिका में 52,000 करोड़ रुपये का विशाल कारोबार है, जिसका जिक्र चुनावी हलफनामे में नहीं किया गया। इन आरोपों के बाद रिनिकी भुइयां सरमा ने खेड़ा के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई, जिसके बाद असम पुलिस ने दिल्ली में उनके आवास पर छापेमारी भी की थी।
हाई कोर्ट से मिली राहत और सुप्रीम कोर्ट में असम सरकार की चुनौती
असम पुलिस की संभावित गिरफ्तारी से बचने के लिए पवन खेड़ा ने अदालत का रुख किया था। तेलंगाना हाई कोर्ट ने 10 अप्रैल को उन्हें राहत देते हुए एक हफ्ते की ट्रांजिट अग्रिम जमानत दे दी थी। कोर्ट ने उन्हें असम की सक्षम अदालत में नियमित जमानत के लिए जाने का निर्देश दिया था। हालांकि, असम सरकार इस फैसले से संतुष्ट नहीं है और उसने इस जमानत को रद्द करने के लिए सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दायर की है। अब सबकी नजरें देश की सबसे बड़ी अदालत पर टिकी हैं।
विपक्ष का तंज: ‘घबराहट में हैं मुख्यमंत्री’
असम कांग्रेस के अध्यक्ष गौरव गोगोई ने भी इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री को आड़े हाथों लिया है। गोगोई ने कहा कि मुख्यमंत्री इस वक्त भारी घबराहट और हताशा में हैं। उन्हें उम्मीद नहीं थी कि ये खबरें इतनी जल्दी पूरे देश में फैल जाएंगी। गोगोई के अनुसार, पिछले कुछ दिनों से मुख्यमंत्री की बेचैनी उनके चेहरे और उनके शब्दों में साफ दिखाई दे रही है। उन्होंने जोर देकर कहा कि सिर्फ शोर मचाने या पुलिसिया कार्रवाई करने से सच को छिपाया नहीं जा सकता।
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