दक्षिण क्षेत्रीय परिषद की बैठक: अंतरराज्यीय जल विवादों को जल्द सुलझाने पर बनी सहमति, परिसीमन को लेकर उठी चिंताएं

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में आयोजित दक्षिण क्षेत्रीय परिषद की 31वीं बैठक में देश के दक्षिणी राज्यों के विकास और आपसी सहयोग से जुड़े कई अहम मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई। इस बैठक में मुख्य रूप से अंतरराज्यीय जल विवादों को आपसी बातचीत के जरिए जल्द सुलझाने पर जोर दिया गया, जिस पर सभी राज्यों ने सकारात्मक रुख दिखाया है।

जल विवादों के जल्द समाधान पर जोर

बैठक को संबोधित करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि राज्यों को अपने हितों की रक्षा करने का पूरा अधिकार है, लेकिन यदि जल विवादों के चलते लंबे समय तक पानी का उपयोग न हो सके और वह समुद्र में बह जाए, तो इससे किसी का वास्तविक हित पूरा नहीं होता। उन्होंने ब्रह्मपुत्र से लेकर कावेरी और गोदावरी तक की प्रमुख नदियों को आपस में जोड़ने की दिशा में काम करने का सुझाव दिया, जिससे देश को आने वाले दशकों में पानी की कमी से बचाया जा सके।

इसके साथ ही, आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और तमिलनाडु को जोड़ने वाले बुलेट ट्रेन कॉरिडोर का प्रस्ताव रखा, जिससे क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को और बढ़ावा मिल सके।

लोकसभा सीटों के परिसीमन पर दक्षिणी राज्यों की चिंता

इस उच्चस्तरीय बैठक के दौरान जनसंख्या के आधार पर लोकसभा सीटों के संभावित पुनर्वितरण यानी परिसीमन (Delimitation) का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। दक्षिणी राज्यों का यह मानना है कि यदि जनसंख्या के आधार पर सीटों का निर्धारण हुआ, तो उन्हें राजनीतिक प्रतिनिधित्व में भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।

इस सिलसिले में कर्नाटक और तमिलनाडु के प्रतिनिधियों ने मांग की कि लोकसभा की मौजूदा 543 सीटों की संख्या को आगामी 25 वर्षों तक सुरक्षित रखा जाए। इसके अलावा, कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने केंद्र सरकार से यह अपील की कि 1971 की जनगणना को ही परिसीमन का मुख्य आधार बनाया जाना चाहिए।

विभिन्न राज्यों द्वारा रखे गए अन्य अहम प्रस्ताव

  • केरल: केरल के मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन ने बैठक के दौरान मुल्लापेरियार बांध के मुद्दे को उठाया और स्वास्थ्य, पर्यावरण संरक्षण तथा क्षेत्रीय सुरक्षा के क्षेत्र में सहकारी संघवाद को मजबूत करने पर बल दिया।

  • तेलंगाना: तेलंगाना के उपमुख्यमंत्री मल्लू भट्टी विक्रमरका ने कृष्णा नदी के पानी पर अपने राज्य के अधिकारों की रक्षा करने की मांग उठाई और प्रमुख सिंचाई परियोजनाओं के लिए केंद्र से सहयोग मांगा।

  • पुडुचेरी: पुडुचेरी की ओर से वर्षभर पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए एकीकृत सतही जल व्यवस्था विकसित करने और पड़ोसी राज्यों के साथ मिलकर काम करने की बात कही गई।