आनंदीबेन पटेल का रिकॉर्ड कार्यकाल: जानिए राज्यपालों की नियुक्ति, कार्यकाल और संविधान के प्रावधान

भारतीय राजनीति में इन दिनों उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल का कार्यकाल चर्चा का केंद्र बना हुआ है। वे 7 साल से भी अधिक समय से उत्तर प्रदेश के राज्यपाल पद पर बनी हुई हैं, जो राज्य के इतिहास में किसी भी राज्यपाल का सबसे लंबा कार्यकाल है। हाल ही में उनके कुछ दिनों के लिए गुजरात जाने को लेकर राजनीतिक गलियारों में अटकलों का बाजार गर्म है, जिससे यह सवाल फिर से उठ खड़ा हुआ है कि आखिर राज्यपालों के कार्यकाल और उनके पद से हटने को लेकर भारतीय संविधान क्या कहता है।

राज्यपाल के कार्यकाल पर क्या कहता है संविधान?

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 156 में राज्यपाल के कार्यकाल से जुड़े स्पष्ट प्रावधान किए गए हैं। इसके अनुसार:

  • राज्यपाल, राष्ट्रपति के ‘प्रसाद पर्यंत’ (During the pleasure of the President) अपने पद पर बने रहते हैं।

  • राज्यपाल का सामान्य कार्यकाल 5 वर्ष का होता है।

  • संविधान के अनुच्छेद 156(3) के मुताबिक, 5 साल की अवधि पूरी होने के बाद भी राज्यपाल तब तक अपने पद पर बने रह सकते हैं, जब तक कि उनका उत्तराधिकारी नया पदभार ग्रहण नहीं कर लेता।

संवैधानिक विशेषज्ञों का मानना है कि संविधान में ऐसी कोई बाध्यता नहीं है कि 5 साल पूरे होने पर राज्यपाल को अलग से कार्यकाल विस्तार (Extension) का आदेश देना ही पड़े। यही वजह है कि देश में कई ऐसे उदाहरण मिलते हैं जहां राज्यपाल अपने निर्धारित पांच साल से अधिक समय तक पद पर आसीन रहे हैं। मेघालय के पूर्व राज्यपाल एमएम जैकब लगभग 12 साल तक इस पद पर रहे थे, जो देश में सबसे लंबे समय तक लगातार राज्यपाल रहने का एक बड़ा रिकॉर्ड है।

राजभवन और सरकार के बीच समन्वय और चर्चाएं

भले ही संवैधानिक रूप से राज्यपाल का लंबे समय तक पद पर बने रहना वैध है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसे लेकर अक्सर चर्चाएं होती रहती हैं। उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री और राज्यपाल दोनों एक ही राजनीतिक दल से ताल्लुक रखते हैं, इसके बावजूद कई मौकों पर नीतिगत और प्रशासनिक मुद्दों पर मतभेद सामने आते रहे हैं।

हाल ही में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल के गोरखपुर दौरे के दौरान विश्वविद्यालय की व्यवस्थाओं को लेकर सार्वजनिक नाराजगी जताना और प्रशासनिक कमियों पर अधिकारियों को निर्देश देना काफी सुर्खियों में रहा था। इसके अलावा विश्वविद्यालयों में कुलपतियों की नियुक्तियों और प्रशासनिक कार्यों को लेकर भी राजभवन और सरकार के बीच चर्चाएं होती रही हैं।

क्या आनंदीबेन पटेल का कार्यकाल संवैधानिक रूप से सही है?

कानूनी और संवैधानिक नजरिए से देखें तो आनंदीबेन पटेल का 7 साल से अधिक समय तक उत्तर प्रदेश में राज्यपाल बने रहना पूरी तरह से संविधान के दायरे में है, क्योंकि जब तक नया राज्यपाल नियुक्त नहीं होता, तब तक मौजूदा राज्यपाल अपने पद पर बने रह सकते हैं। हालांकि, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस संवैधानिक व्यवस्था के तहत किसी व्यक्ति का इतने लंबे समय तक पद पर बने रहना संस्थागत परंपराओं और राजनीतिक शुचिता के लिहाज से बहस का विषय जरूर बन जाता है।