
कौन है शुभम खैरनार? नासिक का रहने वाला मेडिकल छात्र बना ‘कूरियर’
करीब 30 वर्षीय शुभम खैरनार नासिक के इंदिरानगर इलाके का रहने वाला है। वह खुद मेडिकल क्षेत्र का छात्र बताया जा रहा है, जिसका कनेक्शन मध्य प्रदेश के सीहोर स्थित श्री सत्यसाई यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी एंड मेडिकल साइंसेज से जुड़ा है। जांच एजेंसियों का दावा है कि शुभम के पास परीक्षा से काफी पहले ‘गेस पेपर’ आ गया था, जिसकी डिजिटल कॉपी उसने हरियाणा और अन्य राज्यों में फॉरवर्ड की। यही वह कड़ी है जिसके जरिए पेपर Telegram और WhatsApp ग्रुप्स में आग की तरह फैल गया।
देवदर्शन के वक्त दबोचा गया आरोपी: हुलिया बदलकर दे रहा था चकमा
शुभम को भनक लग गई थी कि पुलिस उसके पीछे है। खुद को बचाने के लिए उसने अपना पूरा लुक बदल लिया, बाल कटवा लिए और फर्जी पहचान का सहारा लेने लगा। हालांकि, तकनीकी सर्विलांस (Technical Surveillance) और पुराने डेटा की मदद से पुलिस उस तक पहुंच गई। बताया जा रहा है कि जब वह देवदर्शन के लिए मंदिर जा रहा था, तभी क्राइम ब्रांच की टीम ने उसे चारों तरफ से घेरकर हिरासत में ले लिया।
सीहोर यूनिवर्सिटी और मनीष यादव: जांच की सुई अब इन पर
शुभम की गिरफ्तारी के बाद अब जांच का केंद्र मध्य प्रदेश की श्री सत्यसाई यूनिवर्सिटी बन गई है। एजेंसियां यह पता लगा रही हैं कि क्या यूनिवर्सिटी के अन्य छात्र या स्टाफ भी इस नेटवर्क का हिस्सा थे। वहीं, इस पूरे खेल का मास्टरमाइंड मनीष यादव को माना जा रहा है, जो अलग-अलग राज्यों में पेपर सप्लाई का नेटवर्क चला रहा था। इसके साथ ही राकेश मंडावरिया नाम के एक अन्य आरोपी को भी हिरासत में लिया गया है, जो लीक पेपर को डिस्ट्रीब्यूट करने का काम कर रहा था।
सोशल मीडिया पर 42 घंटे पहले लीक हुआ पेपर, CBI की एंट्री से बढ़ी हलचल
3 मई को हुई परीक्षा के बाद जब छात्रों ने सोशल मीडिया पर वायरल पेपर से मिलान किया, तो वे सन्न रह गए; सवाल हूबहू असली परीक्षा जैसे थे। आरोप है कि पेपर परीक्षा से 42 घंटे पहले ही डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर उपलब्ध था। मामले की गंभीरता को देखते हुए केंद्र सरकार ने जांच CBI को सौंप दी है। अब तक 5 राज्यों से 9 गिरफ्तारियां हो चुकी हैं और CBI की टीमें नासिक में डेरा डाले हुए हैं।
22 लाख छात्रों का भविष्य अधर में: मेहनत पर फिरा पानी
इस महाघोटाले ने देश के 22 लाख होनहार छात्रों के सपनों को अधर में लटका दिया है। NTA द्वारा परीक्षा रद्द किए जाने के बाद छात्र अब नई तारीखों और प्रवेश प्रक्रिया को लेकर भारी तनाव में हैं। छात्रों का स्पष्ट कहना है कि सिस्टम की खामियों और चंद लोगों के लालच ने सालों की उनकी कड़ी मेहनत को दांव पर लगा दिया है।
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