
संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने देश की सबसे प्रतिष्ठित सिविल सेवा परीक्षा की व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के लिए अब तक का सबसे बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाया है। आयोग ने पहली बार सिविल सेवा प्रीलिम्स परीक्षा 2026 की प्रोविजनल उत्तर-कुंजी (Provisional Answer Key) को परीक्षा संपन्न होने के तुरंत बाद जारी करने का नीतिगत निर्णय लिया है। मालूम हो कि यूपीएससी सिविल सेवा प्रीलिम्स परीक्षा 2026 का आयोजन आगामी 24 मई 2026 को होने जा रहा है। आयोग ने सोमवार को आधिकारिक बयान जारी कर बताया कि यह क्रांतिकारी कदम परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाने और सर्वोच्च मानकों को अक्षुण्ण बनाए रखने के उद्देश्य से उठाया गया है। सिविल सेवा की तैयारी करने वाले लाखों अभ्यर्थी लंबे समय से एग्जाम के तुरंत बाद आंसर-की जारी करने की मांग कर रहे थे, जिसे अब स्वीकार कर लिया गया है। इस नई व्यवस्था से अभ्यर्थियों को अपने प्रदर्शन का सटीक प्रारंभिक आकलन करने और समय रहते आपत्तियों को दर्ज कराने का बेहतरीन अवसर मिलेगा।
अनिश्चितता का दौर खत्म, अब प्रीलिम्स के तुरंत बाद छात्र तय कर सकेंगे आगे का प्लान
यूपीएससी के इस नीतिगत बदलाव से हर साल परीक्षा में बैठने वाले 5 लाख से ज्यादा उम्मीदवारों को बहुत बड़ा फायदा होने जा रहा है। आपको बता दें कि पुरानी व्यवस्था के तहत आयोग पूरी चयन प्रक्रिया यानी फाइनल रिजल्ट घोषित होने के बाद ही प्रीलिम्स परीक्षा की आंसर-की सार्वजनिक करता आ रहा था। इसके कारण अभ्यर्थियों में यह अनिश्चितता बनी रहती थी कि वे कट-ऑफ पार कर पाएंगे या नहीं, और उन्हें मुख्य परीक्षा (Mains) पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए या अगले साल की प्रीलिम्स की तैयारी शुरू कर देनी चाहिए।
सिविल सेवा अभ्यर्थी वर्षों से यह शिकायत भी कर रहे थे कि प्रारंभिक परीक्षा में आयोग द्वारा की गई संभावित गलतियों या विवादित प्रश्नों को चुनौती देने का उनके पास कोई जरिया नहीं था। चूंकि हर साल 5 लाख से अधिक उम्मीदवारों में से केवल 12 से 15 हजार अभ्यर्थी ही मुख्य परीक्षा के लिए क्वालिफाई कर पाते हैं, ऐसे में यह आंसर-की उम्मीदवारों को प्रभावी ढंग से अपना करियर प्लान करने में मदद करेगी। हालांकि, आयोग ने साफ किया है कि फाइनल आंसर-की अंतिम परिणाम घोषित होने के बाद ही जारी की जाएगी।
यूपीएससी अध्यक्ष अजय कुमार बोले- “यह अधिक पारदर्शिता और जवाबदेही की नई शुरुआत है”
यूपीएससी के अध्यक्ष अजय कुमार ने इस व्यवस्था को देश की प्रशासनिक परीक्षा प्रणाली के लिए एक ‘नई शुरुआत’ करार दिया है। उन्होंने कहा कि आयोग के इतिहास में पहली बार सिविल सेवा परीक्षा की प्रोविजनल उत्तर-कुंजी एग्जाम के तुरंत बाद जारी होने जा रही है। उन्होंने आगे कहा, “यह अभूतपूर्व पहल आयोग के अधिक पारदर्शिता, त्वरित संवाद और देश के भविष्य यानी अभ्यर्थियों के प्रति जवाबदेही सुनिश्चित करने के निरंतर प्रयासों को दर्शाती है।” कुमार ने स्पष्ट किया कि इस नीति का उद्देश्य पूरी परीक्षा प्रक्रिया को अधिक सहभागी बनाना है, साथ ही इसकी पवित्रता, निष्पक्षता और योग्यता-आधारित ऊंचे ढांचे को मज़बूती से बनाए रखना भी है।
31 मई 2026 तक ऑनलाइन दर्ज करा सकेंगे आपत्ति, इन स्टेप्स का रखना होगा ध्यान
आयोग के अध्यक्ष अजय कुमार ने बताया कि जो भी अभ्यर्थी प्रोविजनल उत्तर कुंजी के किसी प्रश्न या उत्तर से असहमत हैं, वे आगामी 31 मई 2026 की शाम छह बजे तक अपनी आपत्तियां ऑनलाइन माध्यम से दर्ज करा सकेंगे। इसके लिए अभ्यर्थियों को यूपीएससी के विशेष डिजिटल पोर्टल ‘ऑनलाइन क्वेश्चन पेपर रिप्रेजेंटेशन पोर्टल (QPRep)’ का उपयोग करना होगा। यह पोर्टल यूपीएससी की आधिकारिक लॉगिन वेबसाइट https://upsconline.nic.in/login पर समय सीमा के भीतर लाइव उपलब्ध करा दिया जाएगा।
आपत्ति दर्ज कराने के लिए देने होंगे ये 3 प्रामाणिक सबूत, एक्सपर्ट टीम करेगी समीक्षा
आयोग द्वारा जारी गाइडलाइंस के मुताबिक, किसी भी प्रश्न को चुनौती देने के लिए अभ्यर्थियों को कड़े नियमों का पालन करना होगा:
अभ्यर्थियों को अपनी आपत्ति के पक्ष में एक संक्षिप्त और स्पष्ट विवरण (विवरणिका) लिखना होगा।
इसके साथ ही, अपनी समझ और दावे को सही साबित करने के लिए कम से कम तीन प्रामाणिक व विश्वसनीय स्रोतों (जैसे एनसीईआरटी या प्रामाणिक सरकारी संदर्भ पुस्तकें) से प्राप्त दस्तावेजों को साक्ष्य के रूप में अपलोड करना अनिवार्य होगा।
यूपीएससी ने साफ किया है कि पोर्टल के जरिए प्राप्त होने वाली सभी आपत्तियों की विषय विशेषज्ञों (Subject Experts) की एक हाई-लेवल टीम द्वारा व्यापक और सूक्ष्म स्तर पर वैज्ञानिक समीक्षा की जाएगी। विशेषज्ञ प्रत्येक आपत्ति की सावधानीपूर्वक जांच करेंगे, उम्मीदवारों द्वारा दिए गए सबूतों का मूल्यांकन करेंगे और संबंधित प्रश्नों की उत्तर कुंजी की सटीकता पर अपनी अंतिम रिपोर्ट दर्ज करेंगे। इन सभी आपत्तियों के निस्तारण के बाद ही अंतिम उत्तर कुंजी तैयार की जाएगी।
इस साल सिविल सेवा में 933 और वन सेवा में हैं 40 वैकेंसी
इस वर्ष यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा के माध्यम से कुल 933 पदों पर योग्य अधिकारियों की भर्ती की जाएगी, जबकि भारतीय वन सेवा (IFS) परीक्षा में 40 वैकेंसी निकाली गई हैं। गौरतलब है कि यूपीएससी हर साल भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS), भारतीय विदेश सेवा (IFS), भारतीय पुलिस सेवा (IPS) और भारतीय राजस्व सेवा (IRS) समेत देश की सर्वोच्च सिविल सेवाओं के लिए अधिकारियों का चयन करने के लिए प्रतिवर्ष तीन चरणों- प्रारंभिक (Prelims), मुख्य (Mains) और साक्षात्कार (Interview) में इस परीक्षा का राष्ट्रीय स्तर पर आयोजन कराता है।
यूपीएससी सीएसई 2026 के ये 3 सबसे बड़े बदलाव, जिन पर रहेगी सबकी नजर
1. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) फेस ऑथेंटिकेशन हुआ अनिवार्य: साल 2026 से सिविल सेवा समेत यूपीएससी की सभी भर्ती परीक्षाओं में सुरक्षा का एक नया सुरक्षा कवच जोड़ा जा रहा है। अब परीक्षा केंद्र पर प्रवेश करने वाले सभी उम्मीदवारों का अनिवार्य रूप से ‘फेस टेस्ट’ यानी एआई फेस ऑथेंटिकेशन किया जाएगा। यह अत्याधुनिक एआई सिस्टम न केवल परीक्षा में बैठने वाले डमी कैंडिडेट्स और जालसाजों को तुरंत पकड़ने में सक्षम है, बल्कि यह पारंपरिक मैन्युअल चेकिंग के मुकाबले कहीं अधिक तेज और सटीक है। इससे परीक्षा की शुचिता और गोपनीयता पहले से कहीं ज्यादा सुरक्षित होगी।
2. दिव्यांग उम्मीदवारों को मिलेगा मनपसंद परीक्षा केंद्र: सामाजिक सरोकार और संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए आयोग ने इस बार से सभी दिव्यांग (PwBD) उम्मीदवारों को बड़ी राहत दी है। अब से हर दिव्यांग उम्मीदवार को परीक्षा के लिए उनके द्वारा चुना गया पसंदीदा और पहला केंद्र (मनपसंद एग्जाम सेंटर) ही आवंटित किया जाएगा, ताकि उन्हें यात्रा करने में किसी प्रकार की असुविधा न हो।
3. रैंक सुधारने के लिए बार-बार परीक्षा देने पर लगी सख्त रोक: जो अभ्यर्थी पहले से सिविल सेवा परीक्षा पास कर प्रतिष्ठित सेवाओं में कार्यरत हैं, उनके दोबारा परीक्षा में बैठने को लेकर नियमों को बेहद कड़ा कर दिया गया है। नए सेवा नियमों के अनुसार, वर्तमान में आईएएस (IAS) या आईएफएस (IFS) के पद पर कार्यरत कोई भी अधिकारी सीएसई-2026 में बैठने के लिए पात्र नहीं माना जाएगा। यदि कोई उम्मीदवार इस साल प्रारंभिक परीक्षा पास करने के बाद आईएएस या आईएफएस पद पर नियुक्त हो जाता है, तो उसे मुख्य परीक्षा में शामिल होने की अनुमति नहीं मिलेगी। इसी तरह यदि किसी की नियुक्ति मुख्य परीक्षा के बाद लेकिन रिजल्ट से पहले होती है, तो सीएसई-2026 के परिणाम के आधार पर उसे किसी अन्य पद के लिए विचार नहीं किया जाएगा।
एग्जाम हॉल जाने से पहले गांठ बांध लें गाइडलाइंस के ये 4 अहम नियम
30 मिनट पहले बंद हो जाएंगे एंट्री गेट: परीक्षा शुरू होने के ठीक 30 मिनट पहले परीक्षा केंद्र का मुख्य प्रवेश द्वार पूरी तरह बंद कर दिया जाएगा। सुबह के सत्र में सुबह 09:00 बजे और दोपहर के सत्र में दोपहर 02:00 बजे के बाद किसी भी परिस्थिति में किसी भी उम्मीदवार को परीक्षा केंद्र के अंदर जाने की अनुमति नहीं मिलेगी। बता दें कि पहली शिफ्ट की परीक्षा सुबह 9.30 बजे और दूसरी शिफ्ट की परीक्षा दोपहर 2.30 बजे से शुरू होगी।
केवल काला बॉल प्वाइंट पेन ही मान्य: उम्मीदवारों को ओएमआर आंसरशीट (OMR Sheet) और अटेंडेंस शीट भरने के लिए केवल और केवल काले बॉल प्वाइंट पेन का ही इस्तेमाल करना होगा। किसी अन्य रंग या जेल पेन से दिए गए उत्तरों की ओएमआर चेकिंग मशीन द्वारा जांच नहीं की जाएगी।
अनिवार्य दस्तावेज: परीक्षा केंद्र पर अपना ओरिजिनल ई-एडमिट कार्ड और उसके साथ फॉर्म में भरी गई वैध फोटो आईडी प्रूफ (जैसे आधार कार्ड, वोटर आईडी या पासपोर्ट) साथ लाना अनिवार्य है।
इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स पर पूर्ण प्रतिबंध: परीक्षा हॉल के भीतर किसी भी प्रकार का मोबाइल फोन, स्मार्ट वॉच, सामान्य घड़ी, ब्लूटूथ डिवाइस, कैलकुलेटर या अन्य कोई भी इलेक्ट्रॉनिक गैजेट ले जाना पूरी तरह वर्जित और गैर-कानूनी है।
girls globe