लखनऊ: हिंदू पंचांग के अनुसार, जब सूर्य एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश करते हैं, तो उसे ‘संक्रांति’ कहा जाता है। इस साल 15 मई 2026, शुक्रवार को सूर्य देव मेष राशि की अपनी यात्रा समाप्त कर शुक्र के स्वामित्व वाली वृषभ राशि में प्रवेश करेंगे। इसे ‘वृषभ संक्रांति’ के नाम से जाना जाता है।
ज्योतिष शास्त्र में सूर्य का शुक्र की राशि में जाना सुख-सुविधाओं, आर्थिक समृद्धि और कृषि कार्यों के लिए अत्यंत शुभ माना गया है। आइए जानते हैं इस दिन के शुभ मुहूर्त और करने योग्य कार्यों के बारे में।
वृषभ संक्रांति 2026: शुभ मुहूर्त
संक्रांति के दिन पुण्य काल में स्नान और दान का विशेष महत्व होता है।
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वृषभ संक्रांति पुण्य काल: सुबह 05:30 बजे से सुबह 06:28 बजे तक।
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संक्रांति का मुख्य क्षण: सुबह 06:28 बजे।
पुण्य फल के लिए क्या करें?
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पवित्र स्नान: इस दिन किसी पवित्र नदी, विशेषकर गंगा में स्नान करना अत्यंत फलदायी होता है। यदि घर पर स्नान कर रहे हैं, तो पानी में थोड़ा गंगाजल मिलाकर स्नान करें।
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सूर्य देव को अर्घ्य: सूर्योदय से पूर्व उठकर तांबे के लोटे में जल लेकर भगवान भास्कर को अर्घ्य दें। अर्घ्य देते समय “ॐ घृणि सूर्याय नमः” मंत्र का जाप करें।
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अन्न-वस्त्र का दान: अपनी क्षमता के अनुसार गरीबों को अन्न, वस्त्र और धन का दान करें। इस दिन गायों को हरा चारा खिलाने से मां लक्ष्मी और सूर्य देव दोनों की कृपा प्राप्त होती है।
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जल सेवा: संक्रांति के समय प्यासों को पानी पिलाना या प्याऊ लगवाना बहुत शुभ माना जाता है। इससे मन को शांति मिलती है और अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है।
इन बातों का रखें विशेष ध्यान (क्या न करें)
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देर तक न सोएं: संक्रांति के दिन सूर्योदय से पहले उठना अनिवार्य माना गया है। देर तक सोने से शरीर में नकारात्मकता बढ़ती है और ऊर्जा का नाश होता है।
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तामसिक भोजन का त्याग: इस पवित्र दिन पर मांस, मछली, अंडा या नशीली वस्तुओं का सेवन बिल्कुल न करें। सात्विक आहार ही ग्रहण करें और बहुत अधिक तीखे भोजन से बचें।
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क्रोध और विवाद से बचें: मन की शुद्धता बनाए रखें। किसी से बिना वजह विवाद न करें और न ही झूठ बोलें।
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दिन में सोने से बचें: संक्रांति के दिन को साधना और दान के लिए उत्तम माना गया है, इसलिए दिन के समय सोने से बचना चाहिए।
वृषभ संक्रांति का महत्व
चूंकि वृषभ राशि के स्वामी शुक्र हैं, जो वैभव और विलासिता के कारक हैं, इसलिए सूर्य का यह गोचर आपकी आर्थिक स्थिति को मजबूत करने वाला हो सकता है। किसानों के लिए यह समय नई फसलों की योजना और कृषि संबंधी कार्यों की शुरुआत के लिए बहुत ही पवित्र माना जाता है।
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