UP TET 2027: फरवरी के अंत में परीक्षा कराएगा UPESSC, साल में दो बार आयोजन की तैयारी तेज; 15 लाख युवाओं को बड़ी राहत

उत्तर प्रदेश के बेसिक और माध्यमिक विद्यालयों में शिक्षक बनने का सपना संजोए बैठे लाखों प्रशिक्षित युवाओं के लिए बहुप्रतीक्षित राहत भरी खबर सामने आई है। प्रयागराज स्थित उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग (UPESSC) ने उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UP TET) के आयोजन को लेकर अपनी आंतरिक तैयारियां तेज कर दी हैं। आयोग के आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, यूपी टीईटी परीक्षा का आयोजन फरवरी 2027 के अंतिम सप्ताह में कराए जाने की पुख्ता रूपरेखा तैयार की गई है। लंबे समय से अटकी इस परीक्षा के आयोजन की सुगबुगाहट शुरू होते ही बीटीसी (D.El.Ed), बीएड और शिक्षाशास्त्र के छात्रों में नई उम्मीद जाग उठी है। पिछले काफी समय से नई शिक्षक भर्ती और पात्रता परीक्षा के इंतजार में बैठे करीब 15 लाख से अधिक अभ्यर्थी इस परीक्षा के नोटिफिकेशन का इंतजार कर रहे थे।

उत्तर प्रदेश सरकार और शिक्षा आयोग ने इस बार केवल एक परीक्षा कराने तक अपनी योजना सीमित नहीं रखी है, बल्कि केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) के केंद्रीय शिक्षक पात्रता परीक्षा (CTET) मॉडल की तर्ज पर एक क्रांतिकारी बदलाव का मसौदा तैयार किया है। नए प्रस्ताव के तहत अब यूपी टीईटी को भी वर्ष में दो बार नियमित अंतराल पर आयोजित करने की योजना बनाई जा रही है। इसका मुख्य उद्देश्य यह है कि डिग्री या डिप्लोमा पूरा करने वाले नए अभ्यर्थियों को पात्रता प्रमाण पत्र हासिल करने के लिए कई-कई वर्षों का लंबा इंतजार न करना पड़े। साल में दो बार परीक्षा होने से जहां युवाओं को अपनी स्कोरिंग सुधारने और समय पर पात्रता पाने का अवसर मिलेगा, वहीं बेसिक और माध्यमिक शिक्षा परिषदों को भी रिक्त पदों के सापेक्ष पर्याप्त योग्य शिक्षक उपलब्ध हो सकेंगे।

पहले यूपी टीईटी का आयोजन परीक्षा नियामक प्राधिकारी (ERA), उत्तर प्रदेश द्वारा कराया जाता था, लेकिन राज्य सरकार द्वारा सभी स्तरों के शिक्षकों और पात्रता परीक्षाओं के लिए गठित एकीकृत ‘उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग’ (UPESSC) अब इस पूरी प्रक्रिया की कमान संभाल रहा है। आयोग अपनी पहली बड़ी शिक्षक पात्रता परीक्षा को पूरी तरह पारदर्शी, तकनीक-सक्षम और नकलविहीन बनाने के लिए नए सुरक्षा प्रोटोकॉल पर काम कर रहा है। परीक्षा केंद्रों के चयन में केवल राजकीय, सहायता प्राप्त और उच्च गुणवत्ता वाले शिक्षण संस्थानों को प्राथमिकता दी जाएगी। इसके अतिरिक्त, ओएमआर शीट की त्रिस्तरीय बारकोडिंग, बायोमेट्रिक और फेस रिकग्निशन सत्यापन तथा सभी केंद्रों पर लाइव सीसीटीवी वेबकास्टिंग अनिवार्य करने का खाका खींचा गया है ताकि पूर्व में सामने आई पेपर लीक जैसी अनियमितताओं की कोई गुंजाइश न रहे।

यूपी टीईटी का आयोजन दो अलग-अलग सत्रों में दो स्तरों पर किया जाएगा। प्राथमिक स्तर (कक्षा 1 से 5) के लिए पेपर-1 और उच्च प्राथमिक स्तर (कक्षा 6 से 8) के लिए पेपर-2 का आयोजन होगा। प्रत्येक प्रश्नपत्र में 150 अंकों के 150 बहुविकल्पीय प्रश्न पूछे जाएंगे, जिन्हें हल करने के लिए अभ्यर्थियों को 2 घंटे 30 मिनट का समय दिया जाएगा। इस परीक्षा में किसी भी प्रकार की नेगेटिव मार्किंग का प्रावधान नहीं होगा। सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों के लिए न्यूनतम 60% (90 अंक) और ओबीसी, एससी, एसटी तथा दिव्यांग वर्ग के अभ्यर्थियों के लिए न्यूनतम 55% (82 अंक) क्वालीफाइंग अंक निर्धारित रहेंगे। गौरतलब है कि राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (NCTE) के नए दिशा-निर्देशों के अनुसार टीईटी प्रमाण पत्र की वैधता अब आजीवन (Lifetime Validity) कर दी गई है, जिससे एक बार परीक्षा पास करने वाले उम्मीदवारों को दोबारा सिर्फ अपने अंक सुधारने के लिए ही परीक्षा में बैठना होगा।

आयोग की कार्ययोजना के मुताबिक, फरवरी 2027 के अंत में लिखित परीक्षा संपन्न कराने के लिए दिसंबर 2026 के आखिरी हफ्ते या जनवरी 2027 के प्रथम सप्ताह तक आधिकारिक विज्ञापन जारी कर दिया जाएगा। नोटिफिकेशन जारी होने के साथ ही आयोग के आधिकारिक वेब पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन की खिड़की खोल दी जाएगी, जो लगभग 25 दिनों तक सक्रिय रहेगी। परीक्षा से 10 दिन पूर्व अभ्यर्थियों के प्रवेश पत्र जारी किए जाएंगे। आयोग के अधिकारियों का कहना है कि परीक्षा के सुचारू संचालन के लिए जिलाधिकारियों और पुलिस कप्तानों के साथ प्रशासनिक समन्वय की प्रारंभिक बैठकें जल्द शुरू की जाएंगी, ताकि तय कैलेंडर के अनुसार समय पर रिजल्ट जारी कर आगामी शिक्षक भर्ती परीक्षाओं का मार्ग प्रशस्त किया जा सके।