
विदेश में रहने वाले अनिवासी भारतीय (NRI) जब अपनी मातृभूमि में संपत्ति खरीदने का निर्णय लेते हैं, तो अक्सर वे भारत में किए गए अपने पुराने निवेश—विशेष रूप से इक्विटी म्यूचुअल फंड और शेयरों—को बेचकर पूंजी जुटाते हैं। भारत में इक्विटी फंड्स पर 12.5% लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन (LTCG) टैक्स और रिडेम्पशन के समय सीधे टीडीएस (TDS) कटौती का नियम लागू होता है। यदि किसी पोर्टफोलियो में भारी मुनाफा हुआ हो, तो यह टैक्स देनदारी लाखों रुपये में पहुंच सकती है। हालांकि, आयकर अधिनियम की धारा 54F (Section 54F) के तहत एक ऐसा कानूनी प्रावधान मौजूद है, जिसका सही उपयोग करके एनआरआई अपने म्यूचुअल फंड बेचने पर बनने वाले इस पूरे टैक्स को शून्य कर सकते हैं।
आयकर कानून की धारा 54F के तहत कोई भी व्यक्ति (चाहे वह रेजिडेंट हो या एनआरआई) किसी गैर-आवासीय लॉन्ग-टर्म कैपिटल एसेट (जैसे इक्विटी म्यूचुअल फंड, शेयर, सोना या कमर्शियल प्रॉपर्टी) को बेचकर उससे मिलने वाली राशि को भारत में नया आवासीय मकान खरीदने या बनवाने में निवेश करता है, तो उसे लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन टैक्स से छूट मिलती है।
धारा 54 (जो केवल मकान बेचकर दूसरा मकान खरीदने पर मिलती है) के विपरीत, धारा 54F में सबसे अहम अंतर यह है कि यहाँ केवल ‘मुनाफे’ (Capital Gain) को नहीं, बल्कि म्यूचुअल फंड से मिली पूरी शुद्ध बिक्री राशि (Net Sale Consideration) को नए मकान में निवेश करना होता है:
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पूर्ण छूट (Full Exemption): यदि आपने म्यूचुअल फंड की पूरी नेट सेल वैल्यू नए घर में लगा दी, तो आपका पूरा कैपिटल गेन टैक्स-फ्री हो जाएगा।
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आनुपातिक छूट (Proportionate Exemption): यदि आपने पूरी रकम के बजाय आंशिक रकम लगाई, तो टैक्स छूट उसी अनुपात में मिलेगी:
$$\text{छूट की राशि} = \text{LTCG} \times \left( \frac{\text{नए मकान में निवेश}}{\text{कुल नेट बिक्री राशि}} \right)$$
| विवरण | उदाहरण राशि |
| म्यूचुअल फंड की कुल रिडेम्पशन राशि (Net Consideration) | ₹1,00,00,000 (1 करोड़) |
| मूल लागत (Cost of Investment) | ₹40,00,000 (40 लाख) |
| लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन (LTCG) | ₹60,00,000 (60 लाख) |
| सामान्य स्थिति में टैक्स (12.5% + सेस) | लगभग ₹7,80,000 (7.8 लाख) |
| नए मकान में पूरा ₹1 करोड़ निवेश करने पर टैक्स (U/s 54F) | ₹0 (शून्य) |
धारा 54F का फायदा लेने के लिए आयकर विभाग ने सख्त शर्तें और समय-सीमा तय की हैं:
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खरीद या निर्माण की समय-सीमा:
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नया तैयार मकान म्यूचुअल फंड बेचने की तारीख से 1 वर्ष पहले या 2 वर्ष के भीतर खरीदा जाना चाहिए।
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यदि आप मकान बनवा रहे हैं (या अंडर-कंस्ट्रक्शन फ्लैट बुक किया है), तो निर्माण बिक्री की तारीख से 3 वर्ष के भीतर पूरा होना चाहिए।
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मौजूदा संपत्तियों पर सीमा:
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जिस दिन म्यूचुअल फंड बेचे जा रहे हैं, उस दिन आपके पास (नया खरीदे जाने वाले मकान के अलावा) एक से अधिक आवासीय मकान अपने नाम पर नहीं होने चाहिए।
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नया मकान भारत में ही होना चाहिए:
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यह छूट केवल भारत की भौगोलिक सीमा के भीतर स्थित आवासीय संपत्ति के लिए लागू है। विदेश में घर खरीदने पर यह फायदा नहीं मिलता।
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अधिकतम सीमा (Cap Limit):
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3 साल का लॉक-इन पीरियड:
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छूट के तहत खरीदे गए नए मकान को खरीद या निर्माण पूरा होने के 3 वर्षों के भीतर नहीं बेचा जा सकता। यदि इसे बेच दिया जाता है, तो पहले माफ किया गया टैक्स दोबारा लागू हो जाएगा।
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रेजिडेंट भारतीयों के विपरीत, जब कोई एनआरआई म्यूचुअल फंड रिडीम करता है, तो फंड हाउस (AMC) भुगतान करने से पहले ही कानूनन टीडीएस काट लेता है। इक्विटी फंड्स पर 12.5% (प्लस सरचार्ज और 4% सेस) तुरंत कट जाता है। इस टीडीएस को वापस पाने के दो मुख्य तरीके हैं:
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लोअर डिडक्शन सर्टिफिकेट (Form 13 / धारा 197): म्यूचुअल फंड बेचने से पहले आप आयकर विभाग के पोर्टल पर फॉर्म 13 भरकर कम या शून्य टीडीएस का सर्टिफिकेट प्राप्त कर सकते हैं। इसे फंड हाउस को सौंपने पर टीडीएस नहीं कटेगा।
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ITR फाइल कर TDS रिफंड: यदि टीडीएस कट चुका है, तो वित्त वर्ष समाप्त होने पर भारत में अपना आईटीआर (ITR) दाखिल करते समय धारा 54F के तहत छूट क्लेम करें और कटे हुए टीडीएस का पूरा रिफंड अपने एनआरओ/बैंक खाते में वापस प्राप्त कर लें।
यदि आपने म्यूचुअल फंड बेच दिए हैं, लेकिन इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल करने की देय तिथि (आम तौर पर 31 जुलाई) तक घर की रजिस्ट्री या पूरा भुगतान नहीं हो पाया है, तो बची हुई बिक्री राशि को किसी राष्ट्रीयकृत या अधिकृत बैंक में कैपिटल गेन्स अकाउंट स्कीम (CGAS), 1988 के तहत जमा कराना अनिवार्य होता है। इस खाते में जमा की गई राशि को घर में निवेशित मान लिया जाता है और आप छूट का दावा कर सकते हैं। बाद में इस खाते से चेक द्वारा केवल घर के निर्माण या बिल्डर/विक्रेता को भुगतान किया जा सकता है।
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