
उत्तर प्रदेश के करोड़ों बिजली उपभोक्ताओं के लिए राहत भरी खबर है। उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (UPPCL) ने बिजली नियमों में बड़े बदलाव किए हैं, जिससे अब उपभोक्ताओं को बेवजह की परेशानियों से निजात मिलेगी। नए नियमों के तहत स्मार्ट मीटर वाले उपभोक्ताओं को विशेष राहत दी गई है, साथ ही सिक्योरिटी मनी के रिफंड और रात के समय बिजली कनेक्शन काटने को लेकर भी सख्त दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। आइए जानते हैं इन नए नियमों से आपकी जेब और सहूलियत पर क्या असर पड़ेगा।
रात में नहीं कटेगी बिजली: ‘नो डिस्कनेक्शन’ पॉलिसी लागू
अब तक बिजली बिल जमा न होने पर विभाग किसी भी समय कनेक्शन काट देता था, जिससे रात के समय उपभोक्ताओं को भारी परेशानी होती थी। नए नियमों के अनुसार, अब बकाया होने पर भी शाम 6 बजे से लेकर सुबह 10 बजे तक किसी भी उपभोक्ता का कनेक्शन नहीं काटा जाएगा। इसके अलावा, सरकारी छुट्टियों के दिन भी बिजली काटने पर रोक लगा दी गई है। यह नियम विशेष रूप से उन घरों के लिए संजीवनी साबित होगा जहां बुजुर्ग या बच्चे हैं।
स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं के लिए नया नियम
स्मार्ट मीटर लगवाने वाले उपभोक्ताओं के लिए भी प्रक्रिया को सरल बनाया गया है। अब स्मार्ट मीटर की लागत उपभोक्ताओं से किश्तों में ली जाएगी, जिससे उन पर एकमुश्त आर्थिक बोझ नहीं पड़ेगा। साथ ही, यदि स्मार्ट मीटर में कोई तकनीकी खराबी आती है, तो विभाग को उसे निर्धारित समय सीमा के भीतर ठीक करना होगा। मीटर खराब होने की स्थिति में उपभोक्ता से औसत बिल के आधार पर तब तक चार्ज लिया जाएगा जब तक नया मीटर नहीं लग जाता।
सिक्योरिटी मनी पर मिलेगा ब्याज और रिफंड की सुविधा
पावर कॉरपोरेशन ने सिक्योरिटी मनी से जुड़े नियमों में भी पारदर्शिता लाने का फैसला किया है। अब बिजली कनेक्शन लेते समय जमा की गई सिक्योरिटी मनी पर उपभोक्ताओं को बैंक दर के अनुसार ब्याज दिया जाएगा। यदि कोई उपभोक्ता अपना कनेक्शन कटवाता है, तो उसकी सिक्योरिटी मनी का रिफंड 30 दिनों के भीतर सुनिश्चित करना होगा। यदि विभाग इसमें देरी करता है, तो उसे उपभोक्ता को अतिरिक्त ब्याज देना पड़ सकता है।
लोड बढ़ाने की प्रक्रिया हुई आसान
अक्सर घरों में एयर कंडीशनर या भारी उपकरण लगाने पर लोड बढ़ाने की जरूरत पड़ती है, जिसके लिए पहले दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ते थे। अब यूपी में बिजली का लोड बढ़ाना पूरी तरह से डिजिटल और पारदर्शी होगा। उपभोक्ता ऑनलाइन पोर्टल के जरिए लोड बढ़ाने की अर्जी दे सकेंगे और बिना किसी अतिरिक्त ‘सुविधा शुल्क’ के उनका काम तय समय में पूरा होगा। विभाग ने स्पष्ट किया है कि भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के लिए अब अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी
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