Thursday , October 22 2026

बहुमत के गणित में उलझा थलापति विजय का राजतिलक, राज्यपाल के फैसले पर भड़की कांग्रेस

चेन्नई। तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के नतीजों ने राज्य में एक नई राजनीतिक क्रांति को जन्म दिया है, लेकिन सत्ता की कुर्सी तक पहुंचने की राह ‘थलापति’ विजय के लिए कांटों भरी साबित हो रही है। अभिनेता से राजनेता बने विजय की पार्टी ‘तमिलगा वेत्री कड़गम’ (TVK) सबसे बड़ी पार्टी बनकर तो उभरी है, लेकिन ‘बहुमत के जादुई आंकड़े’ और राज्यपाल के कड़े रुख ने फिलहाल सरकार गठन पर ब्रेक लगा दिया है।

विधानसभा का समीकरण: 118 का आंकड़ा और विजय की चुनौती

तमिलनाडु की 234 सदस्यीय (नोट: लेख में 243 का उल्लेख है, जो संभवतः टाइपो है, क्योंकि तमिलनाडु विधानसभा में 234 सीटें हैं) विधानसभा में सरकार बनाने का गणित बेहद पेचीदा हो गया है:

  • TVK का प्रदर्शन: विजय की पार्टी ने 108 सीटों पर जीत दर्ज की।

  • सीटों का गणित: विजय ने खुद दो सीटों (पेरंबूर और तिरुचिरापल्ली ईस्ट) से जीत हासिल की है। नियमतः उन्हें एक सीट छोड़नी होगी, जिससे टीवीके की प्रभावी संख्या 107 रह जाएगी।

  • गठबंधन की स्थिति: कांग्रेस ने अपने विधायकों के साथ विजय को समर्थन देने का ऐलान किया है, जिससे यह आंकड़ा 113 तक पहुंच गया है।

  • बहुमत की कमी: 118 के बहुमत के आंकड़े को छूने के लिए विजय को अभी भी 5 और विधायकों के समर्थन की दरकार है।

राज्यपाल का सख्त रुख: ‘पहले आंकड़ा लाओ, फिर न्योता पाओ’

राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर और विजय के बीच दो दिनों में दो मुलाकातें हो चुकी हैं। राजभवन ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक टीवीके बहुमत (118 विधायक) का ठोस समर्थन पत्र पेश नहीं करती, तब तक सरकार बनाने का न्योता नहीं दिया जा सकता। राज्यपाल कार्यालय का तर्क है कि बिना बहुमत के सरकार को आमंत्रित करना संवैधानिक अस्थिरता पैदा कर सकता है।

सड़कों पर संग्राम: कांग्रेस और टीवीके का उग्र प्रदर्शन

राज्यपाल के इस फैसले ने राज्य में सियासी आग लगा दी है। टीवीके समर्थकों और कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने पूरे तमिलनाडु में विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है:

  • बीजेपी का एजेंट बताने का आरोप: मदुरै शहर कांग्रेस अध्यक्ष ने तीखा हमला बोलते हुए राज्यपाल को ‘भाजपा का एजेंट’ करार दिया है।

  • राजभवन घेराव की धमकी: कांग्रेस ने चेतावनी दी है कि अगर सबसे बड़ी पार्टी होने के नाते विजय को मौका नहीं दिया गया, तो वे राजभवन (लोक भवन) का घेराव करेंगे।

  • दिग्गजों का समर्थन: पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम और कर्नाटक के डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार ने भी विजय का पक्ष लेते हुए कहा है कि उन्हें सदन में बहुमत साबित करने का मौका मिलना चाहिए।

चेन्नई में सुरक्षा के कड़े इंतजाम

विरोध प्रदर्शनों को देखते हुए चेन्नई स्थित राजभवन के बाहर किलेबंदी कर दी गई है। भारी पुलिस बल तैनात है और प्रदर्शन कर रहे कई कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया है। फिलहाल सबकी नजरें विजय के अगले कदम और छोटे दलों के रुख पर टिकी हैं कि क्या वे इस ‘सियासी संकट’ को सुलझाने के लिए आगे आएंगे।