
उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार में हाल ही में हुए कैबिनेट विस्तार ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी थी। अब सरकार को मजबूती देने के बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का पूरा ध्यान अपने संगठन की ओर केंद्रित हो गया है। विधानसभा चुनाव 2027 में अभी लगभग एक साल का समय शेष है और पार्टी किसी भी तरह की ढिलाई बरतने के मूड में नहीं है। भाजपा सूत्रों का कहना है कि 2014 से लेकर अब तक पार्टी की चुनावी सफलता का सबसे बड़ा राज उसकी मजबूत चुनावी मशीनरी ही रही है, इसलिए अब पार्टी इस तंत्र को और भी धारदार बनाने में जुट गई है। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष पंकज चौधरी फिलहाल इसी कवायद में व्यस्त हैं और जल्द ही पार्टी पदाधिकारी घोषित किए जा सकते हैं।
दिल्ली में मंथन और नई नियुक्ति की हलचल
संगठन में बदलाव की सुगबुगाहट तेज होते ही प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने दिल्ली का रुख किया, जहां उन्होंने भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के साथ लंबी मंत्रणा की। इस मुलाकात के बाद से ही राजनीतिक हलकों में चर्चाओं का बाजार गर्म है कि आखिर वो कौन से चेहरे होंगे जिन्हें संगठन में नई कमान मिलेगी। पार्टी की अब तक की कार्ययोजना के अनुसार, उन नेताओं को प्राथमिकता दी जाएगी जो लंबे समय से संगठन में काम कर रहे हैं और जिन्हें जमीनी स्तर पर पार्टी की रीति-नीति का गहरा अनुभव है। इसमें आरएसएस (RSS) पृष्ठभूमि से आने वाले नेताओं को विशेष महत्व दिया जाएगा, जिन्हें भाजपा में ‘संगठन का आदमी’ कहा जाता है।
जातीय समीकरण से इतर ‘अनुभव’ को प्राथमिकता
कैबिनेट विस्तार के दौरान भाजपा ने जातीय संतुलन और सामाजिक समीकरणों को साधने पर जोर दिया था, जिसमें ओबीसी और दलित वर्ग के नेताओं को प्रमुखता मिली थी। लेकिन संगठन के मामले में पार्टी की रणनीति थोड़ी अलग रहने वाली है। पार्टी के एक वरिष्ठ नेता के मुताबिक, आने वाली नियुक्तियों में जातीय संतुलन के बजाय ‘संगठन की समझ’ को ज्यादा अहमियत दी जाएगी। पार्टी कम से कम 60 ऐसे पदाधिकारियों को चुनने की तैयारी में है जो वैचारिक रूप से मजबूत हों और संगठन के काम में माहिर हों। यह फैसला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पार्टी जानती है कि चुनाव जीतने के लिए केवल जातीय समीकरण पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि बूथ स्तर तक फैली चुनावी मशीनरी का मजबूत होना अनिवार्य है।
6 क्षेत्रीय इकाइयों में कद्दावर नेताओं की तैनाती
भाजपा की संगठनात्मक संरचना में राज्य को 6 क्षेत्रीय इकाइयों काशी, गोरखपुर, पश्चिम यूपी, अवध, ब्रज और कानपुर-बुंदेलखंड में विभाजित किया गया है। यह संरचना आरएसएस के 6 प्रांतों के स्वरूप से मेल खाती है, जिस पर पार्टी गंभीरता से काम करती है। सूत्रों की मानें तो इन 6 क्षेत्रीय अध्यक्षों के पदों पर भी भाजपा किसी कमजोर कड़ी को नहीं, बल्कि बेहद कद्दावर और अनुभवी नेताओं को बैठाने की तैयारी कर रही है। इन क्षेत्रों में संगठन को और अधिक सक्रिय करने के लिए पार्टी कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती। आगामी 2027 के चुनावी रण से पहले भाजपा अपनी पूरी तैयारी पुख्ता कर लेना चाहती है ताकि चुनाव के दौरान पार्टी मशीनरी में कहीं भी कोई कमी न रहे।
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