UP सूचना विभाग के 411 संविदा कर्मियों का 6 साल का इंतजार खत्म: बढ़े हुए पारिश्रमिक की वो कहानी, जिसने सबकी आंखें नम कर दीं

आंखों में नमी और गले का रुंधना…जुबान में दुआ..!! (पवन सिंह)
 
उत्तर प्रदेश सूचना एवं जनसंपर्क विभाग.: जब आंखों में नमी पैबस्त हो जाए और गले में कुछ कहने के लिए हर्फ रुंधने लगें, शब्द बहुत हों लेकिन उन्हें प्रगट करने का भाव समंदर जैसा हो और वह कहा न जा पाए..तो आदमी की उस दशा या उसके मनोभाव की थाह नहीं ली जी सकती..!! छह सालों का वह लंबा इंतजार…!! किरच-किरच का खिसकती जिदंगी की गाड़ी जब बमुश्किल से खिसक कर चल रही हो..!! ऐसे में अगर कोई आपके दर्द को सहेज ले..!! समझ ले…!! तो ऐसा ही मंजर होता है। बेशक..!! मेरी टिप्पणी को “राग तेलाही” समझ लिया जाए, इससे मेरी संवेदना और मेरे मानवीय विचारों पर कोई फर्क नहीं पड़ता है लेकिन उत्तर प्रदेश सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के उन 411 संविदा कर्मियों की वह उलझन/बच्चों की फीस/राशन की जद्दोजहद/बिजली का बिल और महीने के आखिर में हाथ रखा “शून्य” सा सन्नाटा.! वेतन के नाम पर  “पारिश्रमिक इतना” भी नहीं… कि महीने भर के आटे  व चावल का बोझ उठा सके.! ऐसे में उससे पूछिए कि जब महीने का वेतन 2000/- से 8000/- तक बढ़ जाए ! 

पारिश्रमिक बढ़ोतरी कीफाइल छह सालों तक पंचम तल पर सावन का झूला झूलती रहे और बगैर निर्णय के  ढले हुए सूरज के मानिंद हर बार अस्त हो जाए…तो एक उम्मीद टूटती है कि अब शायद  यूं ही जिंदगी की शाम ढल जायेगी..!

किसी संवेदनशील विभागीय अधिकारी ने निदेशक सूचना विशाल सिंह जी को 411 संविदा कर्मियों के हालातों की जानकारी दी…!! गोया “किस्सा-ए-उजरत” पर कवायद कुछ यूं कर शुरू हुई कि जैसे ही इन चंद रूपयों के पारिश्रमिक की जानकारी सरबराह-ए-शोबा याने कि मुदीर-ए-महकमा याने कि विभागीय मुखिया विशाल सिंह जी को हुई, फौरन फाइल तलब फरमा ली गई..!! कुछ ही घंटों में यह फैसला तामीर हुआ कि अब पारिश्रमिक इतना तो मिलेगा ही कि महीने भर की रोटी का बंदोबस्त हो सके…!! यहीं नहीं, महीने के बीच में यह फैसला हुआ और यह तय किया गया कि बढ़ा वेतन/पारिश्रमिक पूरे जून, 2026 का मिलेगा..!! मतलब सभी 411 संविदा कर्मियों को बढ़ा वेतन वह भी पूरे महीने का पारिश्रमिक जून, 2026  में मिला, जिसे मई, 2026 से लागू किया गया..!! 

सूत्रों के अनुसार एडी, अरविंद कुमार मिश्रा और पीसीएस अधिकारी आत्रेय मिश्रा व फाइनेंस कंट्रोलर संजय सिंह ने जबरदस्त भूमिका निभाई..। आनन-फानन में सारी विभागीय कार्यवाही पूरी की गई और पारिश्रमिक बढ़ोतरी का आदेश जारी हो गया..!! अगले दिन जब मैं सूचना विभाग पहुंचा तो निदेशक महोदय के पीए, मौर्या जी ने मिठाई खिलवाई… और जब फाइनेंस कंट्रोलर के कक्ष में पहुंचा तो वहां भी मिठाई खाने को मिली.! मिठाई की खुशी की वजह यह बताई गई कि किसी का विभागीय प्रमोशन हुआ है लेकिन यह जानकारी इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के एक वरिष्ठ अधिकारी ने दी…!!

पता चला कि एक खूबसूरत काम हुआ है…

इलेक्ट्रानिक मीडिया से बाहर आया तो कुछ संविदा कर्मियों से बात की…!! इस मसले पर कुछ लोगों से बात की तो लोगों की आंखों में नमी आ गई..!! उनमें से कुछ ने कुछ कहना चाहा तो उनका गला रुंध गया..!! आवाज से विशाल सिंह और संजय सिंह का नाम निकला इसके बाद खुशी व कृतज्ञता के भावों ने आगे कुछ कहने न दिया..!! संविदा कर्मी चले गये..मैं सहज सा खड़ा सोचता रहा कि 2000/- से 8000/- रुपये माह की बढ़ोत्तरी भी जीवन की गाड़ी में कैसे और कितनी खुशियां, कितनी आशाएं, कितनी उम्मीदों के दरवाज़े खोल सकती है..!!??

यहां ऐसे भी लोग हैं जिनका मन लाखों कमाने के बाद भी तृप्त नहीं होता..!! 
श्रेणी-दो के 269 संविदा कर्मियों को अब 20 हजार मासिक की जगह 25 हजार, श्रेणी-तीन में टीवी टेक्नीशियन, कनिष्ठ फोटोग्राफर, कैमरामैन, कम्प्यूटर आपरेटर, सहा0 निदेशक उर्दू, संपादक, देखा सहायक का जो पारिश्रमिक 16 हजार मासिक था वह अब 22 हजार हो गया…।
मल्टी टास्किंग स्टाफ/अनुचर का जो वेतन 1200 था वह 20 हजार हो गया…!!! 
उदास चेहरों पर मुस्कान देखने के भी अपने सुख हुआ करते हैं..!! 
बेसाख्ता एक शेर याद आ गया 

“घर से मस्जिद है बहुत दूर चलो यूं कर लें‌।
किसी रोते हुए बच्चे को हसाया जाए।”
मुदीर-ए-महकमा, विशाल सिंह जी..आपने, अपने कर्मियों की “व्यथा कथा का मर्म’ सुनने, सहेजने और उसे महसूस कर, उस पर जो निर्णय लिया है…वह सुखद है…!! आज तमाम संविदाकर्मी मुझसे मिले…!! आपसे कुछ कहने की हिमाकत न कर सके हैं शायद…!! उनकी ख्वाहिश है कि एक लंच सूचना विभाग के परिसर में उनके साथ करके उन्हें अनुग्रहित करें…!!