वृंदावन के विश्व प्रसिद्ध बांके बिहारी मंदिर को लेकर आई बेहद चिंताजनक खबर, जर्जर और कमजोर पाई गई सदियों पुरानी इमारत

देश-दुनिया से उत्तर प्रदेश के पावन धाम वृंदावन आने वाले करोड़ों कृष्ण भक्तों के लिए एक बेहद हैरान करने वाली और बड़ी चिंताजनक खबर सामने आ रही है। आस्था के सबसे बड़े केंद्रों में से एक, ठाकुर बांके बिहारी जी महाराज के ऐतिहासिक मंदिर (Banke Bihari Mandir) की मुख्य इमारत को लेकर एक बड़ी तकनीकी रिपोर्ट में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। हर दिन लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ से गुलजार रहने वाले इस मंदिर की भव्य इमारत वर्तमान समय में बेहद जर्जर और कमजोर स्थिति में पहुंच चुकी है। विशेषज्ञों द्वारा की गई शुरुआती जांच और सर्वे में यह बात सामने आई है कि समय की मार और उचित रखरखाव न होने के कारण भवन के कई हिस्से डैमेज हो चुके हैं। सबसे ज्यादा हैरान और परेशान करने वाली बात मंदिर की नींव (Foundation) को लेकर सामने आई है, जिसकी जर्जर हालत ने जिला प्रशासन और मंदिर प्रबंधन के माथे पर चिंता की गहरी लकीरें खींच दी हैं।

समय की मार और सीलन ने खोखली कर दी मंदिर की ऐतिहासिक दीवारें

बांके बिहारी मंदिर की यह इमारत सदियों पुरानी है, जिसे प्राचीन स्थापत्य कला और पारंपरिक निर्माण सामग्री से तैयार किया गया था। लेकिन पिछले कुछ दशकों में वृंदावन के इस क्षेत्र में जलस्तर के बदलाव, लगातार होने वाली सीलन और बिना किसी वैज्ञानिक योजना के आस-पास हुए कंक्रीट के भारी निर्माण के कारण मुख्य परिसर की दीवारों में दरारें आनी शुरू हो गई हैं। विशेषज्ञों की टीम ने जब मंदिर के अंदरूनी हिस्सों और खंभों का निरीक्षण किया, तो पाया कि कई जगहों पर चूना और पत्थर अपनी पकड़ छोड़ रहे हैं। भारी भीड़ के दबाव और वीआईपी मूवमेंट के दौरान होने वाले कंपन से इस जर्जर ढांचे को भविष्य में बड़ा नुकसान पहुंचने का खतरा और ज्यादा बढ़ गया है।

नींव का तो पूछिए ही मत! भूगर्भीय बदलावों ने बढ़ाई आर्किटेक्ट्स की धड़कनें

इस पूरे मामले में जो सबसे ज्यादा डरावनी बात सामने आई है, वह मंदिर की नींव से जुड़ी है। जमीन के नीचे मौजूद मंदिर की बुनियादी संरचना और सहायक खंभों की स्थिति का आकलन करने वाले आर्किटेक्ट्स और भूवैज्ञानिकों (Geologists) की टीम उस समय दंग रह गई, जब उन्होंने देखा कि नींव का एक बड़ा हिस्सा पानी के रिसाव और भूगर्भीय दबाव के कारण कमजोर हो चुका है। विशेषज्ञों का कहना है कि यमुना नदी के तटीय क्षेत्र के नजदीक होने और ड्रेनेज सिस्टम (निकासी व्यवस्था) दुरुस्त न होने की वजह से जमीन के नीचे लगातार पानी जमा हो रहा है, जो मंदिर की जड़ों को धीरे-धीरे खोखला कर रहा है। यदि इस पर तुरंत ध्यान नहीं दिया गया, तो किसी बड़े हादसे से इनकार नहीं किया जा सकता।

हर दिन उमड़ती है लाखों की भीड़, सुरक्षा को लेकर उठे गंभीर सवाल

ठाकुर बांके बिहारी मंदिर में सामान्य दिनों में भी पैर रखने की जगह नहीं होती है, वहीं त्योहारों, वीकेंड और छुट्टियों के दिनों में तो यहां श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ता है। संकरी गलियों और सीमित परिसर के बीच जब लाखों लोग एक साथ मंदिर की इस कमजोर हो चुकी इमारत के भीतर प्रवेश करते हैं, तो पूरी संरचना पर भारी दबाव बनता है। पहले भी कई बार भीड़ के दबाव के कारण यहां अप्रिय स्थितियां बन चुकी हैं, लेकिन अब इमारत के ही तकनीकी रूप से अनसेफ (असुरक्षित) होने की बात सामने आने के बाद स्थानीय प्रशासन और भक्तों के बीच एक डर का माहौल बन गया है। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस रिपोर्ट के बाद मंदिर में भीड़ नियंत्रण (Crowd Management) के नियमों को और ज्यादा कड़ा करना बेहद जरूरी हो गया है।

क्या कॉरिडोर निर्माण और जीर्णोद्धार से सुलझेगा यह बड़ा संकट

बांके बिहारी मंदिर की इस चिंताजनक स्थिति के सामने आने के बाद अब प्रस्तावित ‘बांके बिहारी मंदिर कॉरिडोर’ (Banke Bihari Corridor) परियोजना की आवश्यकता और ज्यादा बढ़ गई है। सरकार और प्रशासन का तर्क है कि कॉरिडोर के बनने से न सिर्फ श्रद्धालुओं को सुलभ दर्शन होंगे, बल्कि मुख्य मंदिर की ऐतिहासिक इमारत को संरक्षित करने और उसकी नींव को आधुनिक तकनीकों (जैसे ग्राउटिंग और जैकेटिंग) के जरिए दोबारा मजबूत करने का मौका भी मिलेगा। फिलहाल, पुरातत्व और सिविल इंजीनियरिंग के बड़े विशेषज्ञों की एक उच्च स्तरीय टीम विस्तृत सर्वे रिपोर्ट तैयार कर रही है, जिसके आधार पर ठाकुर जी के इस भव्य दरबार को सुरक्षित और अभेद्य बनाने के लिए जल्द ही बड़े और कड़े कदम उठाए जाएंगे।